झारखंड में व्यावसायिक स्थलों पर घरेलू एलपीजी सिलेंडर का धड़ल्ले से अवैध इस्तेमाल
पलामु /दिल्ली :
झारखंड राज्य के विभिन्न जिलों और शहरों में व्यावसायिक प्रतिष्ठानों (होटल, रेस्टोरेंट, ढाबा, कैफे और टपरी) में व्यावसायिक सिलेंडर के बजाय सब्सिडी वाले 'घरेलू एलपीजी सिलेंडर' का अवैध और खुलेआम उपयोग किया जा रहा है। इस बात का खुलासा ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन द्वारा पिछले 3 महीनों के दौरान राज्यभर में किए गए एक विस्तृत और गोपनीय सर्वेक्षण में हुआ है।
सर्वेक्षण की गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार, राज्यभर के 10 प्रमुख जिलों/शहरों के 1,576 प्रतिष्ठानों में भारी मात्रा में घरेलू सिलेंडर का इस्तेमाल होता पाया गया है। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि राज्य की राजधानी रांची में ही सबसे अधिक (749 प्रतिष्ठानों पर) घरेलू सिलेंडरों का व्यावसायिक उपयोग हो रहा है।
> "झारखंड की राजधानी रांची समेत कई जिलों में घरेलू एलपीजी सिलेंडरों का व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में अवैध उपयोग एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय है। कानून के अनुसार व्यावसायिक स्थानों पर केवल कमर्शियल सिलेंडर का उपयोग होना चाहिए। घरेलू सिलेंडर का व्यावसायिक उपयोग न केवल एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर, 2000 और आवश्यक वस्तु अधिनियम, 1955 का उल्लंघन है, बल्कि यह सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा खतरा भी है। घरेलू और व्यावसायिक सिलेंडरों के प्रेशर में अंतर होता है, जिससे किसी भी वक्त भीषण आग या विस्फोट जैसी दुर्घटना हो सकती है। ऐसी स्थिति में किसी बीमा दावों का संरक्षण भी नहीं मिलता।
> हमने खाद्य एवं उपभोक्ता मामले विभाग, झारखंड सरकार के माननीय सचिव को 1,576 अवैध प्रतिष्ठानों की गोपनीय सूची के साथ पत्र प्रेषित किया है। हमारी मांग है कि प्रशासन उड़न दस्तों के माध्यम से तुरंत छापेमारी कर कठोर कानूनी कार्रवाई करे। अब देखना यह है कि सुस्ती में भरा प्रशासन इस गंभीर मुद्दे पर कब तक कार्रवाई करता है और अवैध इस्तेमाल पर कब तक पूर्ण पाबंदी लगाता है।"
> — नितिन सोलंके, राष्ट्रीय अध्यक्ष, ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन
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ज़िला/शहरवार आंकड़ों का ब्योरा:
रांची: 749
धनबाद: 378
पूर्वी सिंहभूम: 168
गिरिडीह: 85
हजारीबाग: 65
जमशेदपुर: 33
पश्चिमी सिंहभूम: 33
सरायकेला: 31
पलामू: 20
गढ़वा: 14
कुल योग: 1,576 प्रतिष्ठान.
प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार
ग्राहक दक्षता कल्याण फाउंडेशन ने इस गोपनीय रिपोर्ट और पत्र की प्रतियां केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय तथा पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस नियामक बोर्ड, नई दिल्ली को भी कार्रवाई हेतु भेजी हैं। अब देखना यह होगा कि झारखंड सरकार का खाद्य एवं आपूर्ति विभाग इस पर कितनी त्वरित कार्रवाई करता है।






