पौधरोपण से तिब्बती विद्यालय के वार्षिकोत्सव का शुभारंभ, डॉ. कौशल ने पढ़ाया पर्यावरण धर्म का पाठ
मेदिनीनगर, पालमू।
हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले स्थित तिब्बती विद्यालय के वार्षिकोत्सव का शुभारंभ गुरुवार को पौधरोपण और पर्यावरण संरक्षण के संदेश के साथ हुआ। मुख्य अतिथि विश्वव्यापी पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह वन राखी मूवमेंट के जनक डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने कन्या पूजन, पर्यावरण धर्म की प्रार्थना और पौधरोपण कर कार्यक्रम की शुरुआत की।
वन राखी मूवमेंट की स्वर्ण जयंती के अवसर पर विद्यालय परिसर में वृक्षों को रक्षासूत्र बांधा गया। डॉ. कौशल ने छात्र-छात्राओं को पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का संकल्प दिलाया। उन्होंने कहा कि वन राखी मूवमेंट के 50 वर्ष पूरे होने पर देश-विदेश में स्वर्ण जयंती मनाई जा रही है। इसी कड़ी में मैकलोडगंज में भी पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया गया।
उन्होंने कहा कि देश ने अंग्रेजी हुकूमत से आजादी के लिए लंबा संघर्ष किया और शहीदों ने अपने प्राणों की आहुति देकर देश को स्वतंत्र कराया। अब पूरी दुनिया को प्रदूषण रूपी शत्रु के खिलाफ जंग लड़नी है। इस जंग को जीतने के लिए बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को पर्यावरण धर्म अपनाना होगा। उन्होंने पौधों को धरती की रक्षा के लिए ‘मिसाइल’ बताते हुए अधिक से अधिक पौधे लगाने का आह्वान किया।
डॉ. जायसवाल ने तिब्बती धर्मगुरु 11वें पंचेन लामा की रिहाई का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पंचेन लामा और उनके माता-पिता को चीन द्वारा उठाकर ले जाने के बाद आज तक उनके संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि किसी भी धर्मगुरु को कैद रखना मानवाधिकारों का उल्लंघन है। भारत-तिब्बत सीमा सामान्य समिति के माध्यम से वर्ष 2009 से पंचेन लामा की रिहाई की मांग की जा रही है। चीन को उन्हें जल्द रिहा करना चाहिए।
विद्यालय के प्राचार्य तेनजिन ने डॉ. कौशल किशोर जायसवाल के पर्यावरण संरक्षण के प्रयासों की सराहना की। मौके पर सूरज जायसवाल, सचिन शर्मा समेत विद्यालय के शिक्षक-शिक्षिकाएं और बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएं मौजूद थे।






