भाई की लंबी उम्र की कामना में उमड़ा उल्लास, सरना स्थल पर दिखी आदिवासी संस्कृति की रंगीन छटा
“ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमा गुदड़ीगढ़ा, करम गीतों से महका सरना स्थल”
“ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमा गुदड़ीगढ़ा, करम गीतों से महका सरना स्थल”
करम डाल-जावा की विधि-विधान से हुई स्थापना ढोल-नगाड़ों की थाप पर झूमे महिला-पुरुष और युवा
रांची एक्सप्रेस संवाददाता
बरकाकाना। करमा पर्व की पूर्व संध्या पर रविवार को बरकाकाना के गुदड़ीगढ़ा सरना स्थल पर करम महोत्सव का उल्लास चरम पर रहा। क्षेत्र के विभिन्न स्थानों से सरना समिति के सदस्यों और बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के पहुंचने से पूरा सरना स्थल पारंपरिक संस्कृति और उत्सवी रंग में सराबोर हो गया। घुटूवा, दुर्गी, नया नगर बरकाकाना, मसमोहना, बारीडीह, कडरू, उरलूंग, पहनबेड़ा, सीआईसी बस्ती और लाइन पार सहित कई क्षेत्रों से लोग महोत्सव में शामिल हुए। कार्यक्रम की अध्यक्षता वार्ड पार्षद गीता देवी ने की, जबकि संचालन विक्की बेदिया ने किया। मुख्य अतिथि के रूप में नगर परिषद अध्यक्ष कुसुम लता मुंडा, उपाध्यक्ष रणधीर गुप्ता, समाजसेवी नेपाल यादव, राजी पड़हा सरना प्रार्थना सभा भारत के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष छोटेलाल करमाली, डॉ मनोज अगरिया, गौरव कुमार साहू, नेपाल विश्वकर्मा एवं गोविंद बेदिया उपस्थित हुए।
विधि-विधान से हुई करम डाल की स्थापना
महोत्सव के दौरान धर्मगुरु संदीप उरांव, पहान सुभाष उरांव, अशोक मुंडा एवं मनोज मुंडा ने पारंपरिक रीति-रिवाज और विधि-विधान के साथ श्रद्धालुओं की मौजूदगी में करम डाल की स्थापना कराई। इसके बाद नवसृजित जावा को स्थापित किया गया।
भाइयों की लंबी उम्र की कामना
पूजा-अर्चना के दौरान बहनों ने करम गोसाईं की आराधना कर भाइयों की लंबी उम्र, सुख-समृद्धि, उन्नति और परिवार की खुशहाली की कामना की। पूजा संपन्न होते ही करम पर्व के पारंपरिक लोकगीतों से सरना स्थल गूंज उठा।
ढोल-नगाड़ों पर थिरके कदम, देर रात तक चला उल्लास
“भादो मास एकादशी”, “करम गाड़ो रे”, “भाई खातिर करम गोसांई, दया मांगो रे” और “करम करम कहेला” सहित विभिन्न पारंपरिक गीतों की प्रस्तुति ने माहौल को भक्तिमय बना दिया। ढोल-नगाड़ों की थाप पर करम झूमर नृत्य ने महोत्सव में चार चांद लगा दिए। महिला, पुरुष और युवाओं ने सामूहिक रूप से लोकगीत एवं नृत्य प्रस्तुत कर आदिवासी संस्कृति की जीवंत झलक पेश की।
करम गीतों से गुदड़ीगढ़ा सरना स्थल देर रात तक गुलजार
करम महोत्सव में सरना संस्कृति, परंपरा और प्रकृति के प्रति आस्था का अद्भुत संगम देखने को मिला। पारंपरिक वेशभूषा में पहुंचे श्रद्धालुओं ने सामूहिक पूजा-अर्चना कर करम देव से क्षेत्र में सुख-शांति और समृद्धि की प्रार्थना की। ढोल-नगाड़ों की गूंज और करम गीतों से गुदड़ीगढ़ा सरना स्थल देर रात तक गुलजार रहा।
ये थे उपस्थित
मौके पर रामदयाल बेदिया, भरत करमाली, तूफान उरांव, दिनेश करमाली, मुकेश मुंडा, दिवाकर बेदिया, पूनम कुजूर, अंजू कच्छप, गाजू मुंडा, धनेश बेदिया, जग्गू मुंडा, सुरेंद्र उरांव, महावीर उरांव, फग्गन उरांव, पार्वती देवी, सुनीता देवी, रेणु बेदिया, तूलिका कुमारी, सुनील उरांव, सुनीता उरांव, प्रतिमा देवी एवं धनकिशोर उरांव सहित बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित थे।






