चौपारण में स्थानीय ब्राह्मणों का प्रदर्शन, पूजा समिति से जताई नाराजगी
रामगढ़। धार्मिक अनुष्ठानों में स्थानीय ब्राह्मणों की भागीदारी, हक और सम्मान का मुद्दा अब विरोध का रूप लेने लगा है। चौपारण के चैथी गांव के ब्राह्मण समाज के लोगों ने दुर्गा पूजा में बाहरी ब्राह्मणों को बुलाकर पूजा-अर्चना कराने के विरोध में शंखनाद कर दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष एवं सचिव के खिलाफ प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने इसे स्थानीय ब्राह्मणों के अधिकारों और परंपराओं की अनदेखी करार दिया।
सदियों से परंपरा निभाने वालों को मिले उचित सम्मान
प्रदर्शन में शामिल ब्राह्मणों का कहना था कि स्थानीय ब्राह्मण समाज सदियों से धार्मिक परंपराओं का निर्वहन करता आ रहा है। इसके बावजूद दुर्गा पूजा जैसे महत्वपूर्ण धार्मिक आयोजन में बाहरी ब्राह्मणों को बुलाकर पूजा-अर्चना कराना उचित नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब स्थानीय ब्राह्मण उपलब्ध हैं, तो पूजा समिति के अध्यक्ष और सचिव ने किस आधार पर बाहर से ब्राह्मणों को आमंत्रित किया। विरोध कर रहे लोगों ने कहा कि स्थानीय ब्राह्मणों को केवल एकादशी पूजा और भोज तक सीमित रखना उचित नहीं है। धार्मिक अनुष्ठानों में भी उन्हें उचित भागीदारी और सम्मान मिलना चाहिए। समाज के लोगों ने इस मामले में अपनी नाराजगी जाहिर करते हुए स्थानीय ब्राह्मणों के अधिकारों की रक्षा की मांग की।
कान्यकुब्ज ब्राह्मण महासमिति ने किया समर्थन
स्थानीय ब्राह्मणों के विरोध प्रदर्शन का समर्थन करते हुए कान्यकुब्ज ब्राह्मण महासमिति, झारखंड प्रदेश के अध्यक्ष अमरेश गणक ने कहा कि स्थानीय ब्राह्मणों के अधिकारों की अनदेखी निंदनीय है। उन्होंने कहा कि सुख-दुख के किसी भी धार्मिक अनुष्ठान में स्थानीय ब्राह्मणों को प्राथमिकता और उचित अवसर मिलना चाहिए। अमरेश गणक ने दुर्गा पूजा समिति के अध्यक्ष और सचिव के इस निर्णय पर नाराजगी जताते हुए उनसे स्थानीय ब्राह्मणों से माफी मांगने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि समाज की परंपराओं और स्थानीय ब्राह्मणों के सम्मान का ध्यान रखना जरूरी है।
एकजुटता को बताया समाज के लिए मील का पत्थर
अमरेश गणक ने चौपारण के ब्राह्मण समाज सहित सभी विप्र बंधुओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि स्थानीय ब्राह्मणों ने एकजुट होकर कथित गलत नीति के खिलाफ आवाज उठाई है। उन्होंने इसे समाज की एकता और अधिकारों के प्रति जागरूकता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने यह भी अपील की कि समाज के लोग इस मामले में एकजुट रहें। साथ ही, उन्होंने संबंधित लोगों के यहां शुभ-अशुभ कार्यों में धार्मिक अनुष्ठान नहीं कराने तथा बाहर से आने वाले ब्राह्मणों के विरोध की अपील की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि कान्यकुब्ज ब्राह्मण महासमिति, झारखंड प्रदेश स्थानीय ब्राह्मणों के साथ खड़ी है और आगे भी उनका समर्थन करती रहेगी।


.jpg)



