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क्या खत्म हो पाएगा बेरमो में कोयला माफिया का राज?


सीआईएसएफ(CISF) की नई रणनीति और 14 संवेदनशील इलाकों का पूरा सच
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बोकारो थर्मल (Alka Mishra जोगेंद्र गिरी की रिपोर्ट):

झारखंड का बेरमो अनुमंडल, जो देश के सबसे बड़े कोयला क्षेत्रों में से एक है, इन दिनों एक बड़े प्रशासनिक बदलाव का गवाह बन रहा है। केंद्र सरकार और गृह मंत्रालय के कड़े निर्देशों के बाद, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) ने इस पूरे इलाके में अवैध कोयला खनन और तस्करी के खिलाफ एक बहुत ही आक्रामक अभियान छेड़ दिया है। सीआईएसएफ ने इस अभियान को "जीरो कोल लीकेज" (यानी कोयले की एक बूंद भी चोरी नहीं होने देना) का नाम दिया है।
हाल ही में बेरमो के अमलो, करगली और चरकपनिया (B&K एरिया) में सीआईएसएफ ने आधुनिक तकनीक का इस्तेमाल करते हुए ड्रोन कैमरों और खोजी कुत्तों (श्वान दस्ते) के साथ ताबड़तोड़ छापेमारी की। इस कार्रवाई में सैकड़ों टन अवैध कोयला और तस्करी में इस्तेमाल होने वाले दर्जनों वाहन जब्त किए गए। इस अचानक हुई कार्रवाई से कोयला तस्करों और सिंडिकेट में हड़कंप मच गया है।

## *बिना लोकल पुलिस के सीधे एक्शन का क्या है कानूनी राज?*

आमतौर पर आपने देखा होगा कि जब भी कोयला चोरी पर कोई छापा पड़ता है, तो सीआईएसएफ या सीसीएल की टीम स्थानीय पुलिस प्रशासन की मदद लेती है। लेकिन इस प्रक्रिया में कई बार छापेमारी की भनक माफिया तक पहले ही पहुंच जाती थी और तस्कर सतर्क हो जाते थे।
इस बार खेल पूरी तरह बदल चुका है:

* नया कानून, नई ताकत: केंद्र सरकार द्वारा हाल ही में किए गए प्रशासनिक संशोधनों के तहत सीआईएसएफ को खान और खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 (MMDR Act) के तहत विशेष और बेहद मजबूत अधिकार दिए गए हैं।
* इंटेलिजेंस-बेस्ड छापेमारी: इन अधिकारों के तहत अब सीआईएसएफ को किसी स्थानीय अनुमति या पुलिस बल का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। वे अपनी खुफिया जानकारी (इंटेलिजेंस) के आधार पर सीधे छापेमारी कर रहे हैं।
* सीसीएल के साथ सीधा तालमेल:*
 बिना किसी बाहरी हस्तक्षेप के सीआईएसएफ की टीमें सीधे सेंट्रल कोलफील्ड्स लिमिटेड (CCL) के सुरक्षा विभाग को अपने साथ जोड़कर औचक दबिश दे रही हैं, जिससे सूचनाएं लीक होने की गुंजाइश खत्म हो गई है।
## *तस्करी के वो 14 संवेदनशील रास्ते और इलाके, जो सुरक्षा बलों के निशाने पर हैं*

स्थानीय जानकारों और सूत्रों का कहना है कि बेरमो अनुमंडल में कोयला माफिया की जड़ें बहुत पुरानी हैं। तस्करों ने सुरक्षा एजेंसियों की नजरों से बचने के लिए अलग-अलग इलाकों में अपने 'सेफ हाउस' और गुप्त रास्ते बना रखे हैं। अगर सीआईएसएफ अपने इस अभियान का दायरा इन चिन्हित 14 संवेदनशील इलाकों तक बढ़ा देती है, तो कोयला सिंडिकेट पूरी तरह से टूट जाएगा:

* दुर्गम और छिपे हुए ठिकाने (3 इलाके): बुडगड्डा, गोबिंदपुर अरमो और गड़के के रास्ते इतने कठिन और पहाड़ी हैं कि माफिया यहाँ अवैध कोयला डिपो (स्टॉकयार्ड) बनाकर आसानी से छिप जाते हैं।
* खदानों के नजदीक से रिसाव (4 इलाके): अरमो, गड़के, कंजकीरो और कथारा के आसपास सीसीएल की कई चालू और बंद खदानें हैं। इन खदानों के मुहाने खुले होने के कारण रात के अंधेरे में बड़े पैमाने पर अवैध खनन और कोयले का रिसाव होता है।
* बस्तियों के रास्ते छोटी तस्करी (3 इलाके): बोरया बस्ती, खेतको और असनापामी जैसे रिहाइशी और सीमावर्ती इलाकों का इस्तेमाल माफिया ढाल के रूप में करते हैं। यहाँ से स्थानीय लोगों के जरिए साइकिल, मोटरसाइकिल और ट्रैक्टरों पर लादकर अवैध कोयला बाहर भेजा जाता है।
* औद्योगिक क्षेत्रों की आड़ में हेराफेरी (3 इलाके): बोकारो थर्मल, गोबिंदपुर और पिलपिलो औद्योगिक (इंडस्ट्रियल) क्षेत्र हैं। यहाँ भारी वाहनों का आना-जाना लगा रहता है, जिसकी आड़ में ट्रकों के जरिए असली और नकली कोयले की हेराफेरी और अवैध स्टॉक जमा करने की शिकायतें अक्सर आती हैं।
* माफिया का मुख्य हाईवे (1 इलाका): रामा हरिया के कुछ हिस्सों को कोयला सिंडिकेट का सबसे बड़ा 'ट्रांजिट रूट' (निकासी रास्ता) माना जाता है। यहाँ से अवैध कोयले की बड़ी-बड़ी खेपें सीधे दूसरे राज्यों या जिलों में सप्लाई कर दी जाती हैं।
## इस कड़ाई से कोल इंडिया और देश को कैसे होगा अरबों-खरबों का फायदा?
अगर सीआईएसएफ अपनी इस कड़ाई को बिना रुके सिर्फ बेरमो में ही नहीं, बल्कि BCCL, ECL और CCL के सभी कोयला क्षेत्रों में लगातार जारी रखती है, तो देश और कोल इंडिया लिमिटेड (CIL) को सीधे तौर पर तीन बड़े फायदे होंगे:

   1. सरकारी खजाने में करोड़ों की वापसी: बुडगड्डा, गोबिंदपुर, कथारा और बोकारो थर्मल जैसे इलाकों से रोज करोड़ों रुपये का सरकारी कोयला चोरी होकर अवैध भट्टों और चोर बाजारों में बेहद सस्ते दामों पर बिक जाता है। यह चोरी रुकने से कोयले का एक-एक पैसा आधिकारिक रूप से सरकारी कंपनी (सीसीएल) के खाते में जाएगा।
   2. पावर प्लांटों को कोयले की कमी नहीं होगी: हर साल कोल इंडिया का करोड़ों टन कोयला चोरी के कारण फाइलों से गायब हो जाता है, जिससे सरकारी फाइलों के आंकड़े और जमीन पर मौजूद स्टॉक में बड़ा अंतर आ जाता है। 'जीरो कोल लीकेज' से यह अंतर खत्म होगा और देश के पावर प्लांटों (बिजली घरों) को बिजली बनाने के लिए शत-प्रतिशत कोयले की आपूर्ति हो सकेगी।
   3. गरीब मजदूरों की जान बचेगी: सबसे महत्वपूर्ण और मानवीय पहलू यह है कि माफिया जब अवैध रूप से मिट्टी और कोयला खोदते हैं, तो खदानें अंदर से खोखली और असुरक्षित हो जाती हैं। इसके कारण अक्सर चाल (खदान की छत) धंसने से वहाँ काम करने वाले गरीब मजदूरों की दर्दनाक मौत हो जाती है। सीआईएसएफ की कड़ाई से ऐसे हादसों पर हमेशा के लिए लगाम लग जाएगी।

## निष्कर्ष: आगे की राह और बड़ी चुनौती
सीआईएसएफ द्वारा बेरमो अनुमंडल में उठाया गया यह कदम वाकई काबिलेतारीफ है। लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि कोयला सिंडिकेट का जाल बहुत गहरा और रसूखदार है। अब देखना है कि क्या बुडगड्डा से लेकर पिलपिलो और रामा हरिया तक चल रहा यह अभियान बिना किसी राजनीतिक, स्थानीय या प्रशासनिक दबाव के इसी तरह लगातार जारी रह पाता है या नहीं। अगर यह घेराबंदी कायम रही, तो निश्चित रूप से राष्ट्रीय संपत्ति की यह खुली लूट हमेशा के लिए बंद हो जाएगी l