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95 किमी का सफर 63 मिनट में: ग्रीन कॉरिडोर से दिल्ली पहुंचा donor heart


 18 सितंबर 2026: अंग प्रत्यारोपण में समय की अहमियत को देखते हुए हरियाणा और दिल्ली पुलिस के समन्वय से एक donor heart को रोहतक से दिल्ली तक महज 63 मिनट में पहुंचाया गया। करीब 95 किलोमीटर की इस यात्रा के लिए दोनों राज्यों के बीच विशेष inter-state green corridor बनाया गया।

PGIMS रोहतक से शुरू हुई यात्रा

दाता का हृदय Post Graduate Institute of Medical Sciences (PGIMS), Rohtak में शाम करीब 7:20 बजे निकाला गया। इसके बाद organ-carrying ambulance शाम 7:40 बजे दिल्ली के लिए रवाना हुई और रात 8:43 बजे Fortis Hospital, Shalimar Bagh पहुंची। अस्पताल में हृदय को emergency transplant के लिए ले जाया गया।

NOTTO नेटवर्क से शुरू हुई प्रक्रिया

इस पूरी प्रक्रिया की शुरुआत सुबह हुई थी। अस्पताल को National Organ and Tissue Transplant Organisation (NOTTO) नेटवर्क के माध्यम से एक B-positive recipient के लिए उपलब्ध donor heart की जानकारी मिली। डॉक्टरों ने उपयुक्त recipient की पुष्टि की और दोपहर में organ allocation की औपचारिक प्रक्रिया पूरी हुई।

इसके बाद दिल्ली की transplant team रोहतक के लिए रवाना हुई। टीम दोपहर 2:49 बजे दिल्ली से चली और शाम 4:34 बजे PGIMS पहुंची। हृदय निकालने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद उसे विशेष सुरक्षा और समयबद्ध व्यवस्था के तहत वापस दिल्ली भेजा गया।

दो राज्यों की पुलिस ने संभाली ट्रैफिक व्यवस्था

95 किलोमीटर का रास्ता हरियाणा और दिल्ली—दो अलग-अलग प्रशासनिक क्षेत्रों से होकर गुजरता है। इसलिए ambulance को बिना अनावश्यक रुकावट आगे बढ़ाने के लिए दोनों राज्यों की पुलिस ने मिलकर ट्रैफिक को नियंत्रित किया।

Green corridor का उद्देश्य emergency organ transport के दौरान रास्ते में लगने वाले सामान्य ट्रैफिक अवरोधों को कम करना है। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस भी heart, liver और kidney जैसे organs के आपात परिवहन के लिए green-corridor व्यवस्था का उल्लेख करती है।

एक-एक मिनट की अहमियत

Organ transplantation में donor organ को निर्धारित समय-सीमा के भीतर recipient तक पहुंचाना जरूरी होता है। ऐसे में donor hospital, transplant team, recipient hospital, NOTTO और पुलिस के बीच सटीक तालमेल महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

इस मामले में रोहतक से दिल्ली तक की तेज आवाजाही ने दिखाया कि inter-state coordination के जरिए organ transport को कितनी तेजी से पूरा किया जा सकता है। अस्पताल की ओर से भी पुलिस और medical teams के बीच बेहतर synchronization को इस अभियान का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया।

चिकित्सा व्यवस्था और प्रशासनिक तालमेल की मिसाल

यह पूरा ऑपरेशन केवल तेज ambulance यात्रा तक सीमित नहीं था। इसके पीछे donor organ की पहचान, recipient matching, allocation, organ retrieval, सुरक्षित transportation और transplant centre तक समय पर पहुंचाने की पूरी श्रृंखला काम कर रही थी।

रोहतक से दिल्ली पहुंचा यह donor heart अब उस मरीज के लिए transplant प्रक्रिया का हिस्सा बना, जिसके लिए organ allocation किया गया था।