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दिल्ली के हर्ष विहार में निर्माणाधीन मकान ढहा, मलबे में दो लोगों के फंसे होने की आशंका


नई दिल्ली, 26 अक्टूबर 2026। उत्तर-पूर्वी दिल्ली के हर्ष विहार इलाके में रविवार शाम एक निर्माणाधीन मकान का हिस्सा अचानक ढह गया। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई। शुरुआती जानकारी के अनुसार, मलबे में दो लोगों के दबे होने की आशंका जताई गई है। घटना की सूचना मिलते ही दमकल विभाग, दिल्ली पुलिस, राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (DDMA) की टीमें मौके पर पहुंचीं और राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया।

मिलन गार्डन इलाके में हुआ हादसा

यह घटना हर्ष विहार के मिलन गार्डन इलाके में रविवार शाम करीब 6:45 से 7 बजे के बीच हुई। शुरुआती जानकारी के मुताबिक, वहां पहले से मौजूद एक पुराने मकान में अतिरिक्त मंजिल बनाने का काम चल रहा था। इसी दौरान निर्माणाधीन हिस्से की स्लैब गिर गई, जिससे मकान का एक हिस्सा मलबे में तब्दील हो गया।

घटना की सूचना मिलने के बाद आपातकालीन सेवाओं को तुरंत सक्रिय किया गया। दमकल विभाग की कई गाड़ियों को घटनास्थल पर भेजा गया। पुलिस ने आसपास के क्षेत्र में लोगों की आवाजाही नियंत्रित की, ताकि बचाव दल बिना किसी बाधा के काम कर सकें।

दो लोगों के दबे होने की आशंका

स्थानीय स्तर पर मिली जानकारी के अनुसार, हादसे के बाद दो लोगों का पता नहीं चल पा रहा था। आशंका जताई गई कि इनमें एक करीब 60 वर्षीय व्यक्ति और दूसरा 36 वर्षीय व्यक्ति शामिल है। परिजनों को उनके मोबाइल फोन पर संपर्क नहीं हो पाने के कारण उनके मलबे में फंसे होने की चिंता थी।

हालांकि, शुरुआती रिपोर्ट तैयार होने तक दोनों के मलबे में दबे होने की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई थी। बचाव दल का मुख्य उद्देश्य मलबे को सावधानीपूर्वक हटाकर यह पता लगाना था कि वहां कोई व्यक्ति फंसा है या नहीं। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि स्थिति का सही आकलन तलाशी अभियान आगे बढ़ने के बाद ही किया जा सकेगा।

NDRF और दमकल विभाग ने संभाला मोर्चा

हादसे के बाद NDRF, दिल्ली पुलिस, दमकल विभाग और नागरिक सुरक्षा कर्मियों ने संयुक्त रूप से बचाव कार्य शुरू किया। मलबे की तलाशी के लिए विशेष उपकरणों और खोजी कुत्तों की सहायता भी ली गई। आसपास की जगह से मलबा हटाकर संभावित फंसे लोगों तक पहुंचने की कोशिश की गई।

घनी आबादी और आसपास बने मकानों के कारण घटनास्थल तक पहुंचने तथा गिरे हुए हिस्से की सही पहचान करने में बचावकर्मियों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। ऐसी परिस्थितियों में मलबा हटाने के दौरान अतिरिक्त सावधानी बरतना जरूरी होता है, क्योंकि जल्दबाजी से बचावकर्मियों और संभावित पीड़ितों दोनों को खतरा हो सकता है।

निर्माण की गुणवत्ता पर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर पुराने मकानों पर अतिरिक्त मंजिल बनाने और निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन करने जैसे मुद्दों को सामने ला दिया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, मकान का निचला हिस्सा पुराना था और उसके ऊपर नई मंजिल का निर्माण किया जा रहा था।

हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि इमारत कमजोर संरचना, निर्माण में किसी तकनीकी गलती, अधिक भार या किसी अन्य वजह से गिरी। हादसे का वास्तविक कारण तकनीकी जांच के बाद ही सामने आएगा।

जांच में यह भी महत्वपूर्ण होगा कि निर्माण कार्य के लिए आवश्यक अनुमति ली गई थी या नहीं और भवन की संरचनात्मक मजबूती का उचित आकलन किया गया था या नहीं।

प्रशासन के सामने जवाबदेही तय करने की चुनौती

पुलिस ने मकान के मालिक की पहचान कर ली थी और मामले में कानूनी प्रक्रिया शुरू किए जाने की जानकारी सामने आई। आगे की जांच में निर्माण से संबंधित दस्तावेजों, भवन की स्थिति और मौके पर किए जा रहे काम की परिस्थितियों की पड़ताल की जा सकती है। यदि किसी स्तर पर नियमों की अनदेखी सामने आती है, तो संबंधित जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही तय करना महत्वपूर्ण होगा।

दिल्ली में इससे पहले भी इमारतें गिरने की घटनाएं सामने आ चुकी हैं। ऐसे हादसों के बाद अवैध निर्माण, कमजोर भवन संरचना और सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर सवाल उठते रहे हैं।

पुराने मकानों पर अतिरिक्त निर्माण में सावधानी जरूरी

विशेषज्ञों के अनुसार, किसी पुराने मकान पर नई मंजिल बनाने से पहले उसकी नींव, दीवारों, छत और भार सहने की क्षमता का तकनीकी परीक्षण जरूरी है। निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों की अनदेखी से श्रमिकों के साथ-साथ आसपास रहने वाले लोगों की जान भी जोखिम में पड़ सकती है।

हर्ष विहार की घटना में फिलहाल प्राथमिकता मलबे में किसी व्यक्ति के फंसे होने की पुष्टि करना और जरूरत पड़ने पर उसे सुरक्षित बाहर निकालना है। इसके बाद हादसे की वजह और संभावित लापरवाही की जांच से यह तय करने में मदद मिलेगी कि भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।

नोट: यह घटना से जुड़ी शुरुआती जानकारी पर आधारित रिपोर्ट है। मलबे में फंसे लोगों की स्थिति और हादसे के वास्तविक कारणों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही होगी।