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जम्मू-कश्मीर में दशकों से रह रहे 65 लोगों पर कार्रवाई, 15 की हो चुकी है मौत; चार जिलों में आठ मामलों की जांच पूरी


जम्मू, 25 अक्टूबर 2026। जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तानी नागरिकों के कथित अवैध प्रवास और फर्जी भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल करने से जुड़े मामलों में क्राइम ब्रांच ने बड़ी कानूनी कार्रवाई की है। जम्मू की स्पेशल क्राइम विंग ने जम्मू संभाग के चार जिलों में दर्ज आठ मामलों की जांच पूरी कर संबंधित अदालतों में आरोपपत्र दाखिल किए हैं। अधिकारियों के मुताबिक, जांच में कुल 65 लोगों की भूमिका सामने आई, जिनमें से 15 की आरोपपत्र दाखिल होने से पहले ही मृत्यु हो चुकी थी। शेष 50 लोगों के खिलाफ अदालतों में आरोपपत्र पेश किए गए हैं।

वैध दस्तावेजों पर आए, लेकिन निर्धारित अवधि के बाद भी रुके रहने का आरोप

क्राइम ब्रांच के अनुसार, यह मामला उन पाकिस्तानी नागरिकों से जुड़ा है, जिनमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) के कुछ निवासी भी शामिल हैं। आरोप है कि ये लोग 1970 के दशक के अंतिम वर्षों और उसके बाद वैध यात्रा दस्तावेजों के आधार पर भारत आए थे। हालांकि, निर्धारित अवधि समाप्त होने के बाद भी वे जम्मू संभाग के अलग-अलग इलाकों में रह रहे थे।

इस संबंध में स्पेशल क्राइम विंग के थाने में वर्ष 2024 में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। इसके बाद मामले की जांच के लिए क्राइम ब्रांच मुख्यालय ने विशेष जांच दल (SIT) गठित किया। जांच पूरी होने पर आठ अलग-अलग मामलों में संबंधित अदालतों के समक्ष आरोपपत्र दाखिल किए गए।

चार जिलों में सामने आए मामले

जांच एजेंसी ने जम्मू, पुंछ, राजौरी और कठुआ जिलों में इन मामलों की पड़ताल की। अधिकारियों के मुताबिक, जांच के दौरान पाकिस्तान के सिंध, लाहौर, गुजरांवाला और सरगोधा जैसे क्षेत्रों से जुड़े परिवारों का पता चला। इसके अलावा पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के मीरपुर, रावलकोट और कोटली से संबंध रखने वाले परिवारों की भी पहचान की गई।

जांच में सामने आया कि इनमें से कई परिवार जम्मू संभाग के अखनूर, मेंढर, थन्नामंडी, दरहाल और कठुआ समेत विभिन्न इलाकों में बस गए थे। इनमें कुछ लोग कई दशकों से स्थानीय स्तर पर रह रहे थे।

भारतीय पहचान पत्र बनवाने और सरकारी नौकरी पाने के आरोप

क्राइम ब्रांच का आरोप है कि कुछ लोगों ने अपनी विदेशी नागरिकता की जानकारी छिपाकर कथित तौर पर भारतीय पहचान दस्तावेज हासिल किए। जांच एजेंसी ने यह भी दावा किया है कि कुछ लोगों ने इन दस्तावेजों का इस्तेमाल सरकारी विभागों में नौकरी प्राप्त करने के लिए किया।

मामले की जांच के दौरान कुछ भारतीय जीवनसाथियों, परिवार के सदस्यों और अन्य व्यक्तियों की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है। एजेंसी के अनुसार, कथित साजिश में शामिल होने के आरोप में ऐसे लोगों के नाम भी आरोपपत्रों में शामिल किए गए हैं।

हालांकि, इन आरोपों पर अंतिम फैसला अदालत में सुनवाई और उपलब्ध साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही होगा।

किन कानूनों के तहत हुई कार्रवाई?

अधिकारियों के अनुसार, इन मामलों में विदेशी अधिनियम, 1946 और पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) अधिनियम, 1920 के संबंधित प्रावधानों के तहत कार्रवाई की गई है। इसके साथ पासपोर्ट (भारत में प्रवेश) नियम, 1950 के नियम 6 तथा संबंधित दंड कानूनों के प्रावधान भी लगाए गए हैं।

विशेष जांच दल ने अलग-अलग मामलों से संबंधित दस्तावेजों और अन्य जानकारियों की जांच के बाद सक्षम अदालतों में आरोपपत्र दाखिल किए। जिन 15 लोगों की मृत्यु हो चुकी है, उनकी कथित भूमिका से संबंधित विवरण भी जांच रिकॉर्ड में शामिल किया गया है।

15 लोगों की मौत, बाकी 50 के खिलाफ आरोपपत्र

इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण तथ्य यह है कि जांच के दौरान कुल 65 लोगों की भूमिका सामने आई। इनमें 15 लोगों की मृत्यु आरोपपत्र दाखिल होने से पहले हो गई थी। शेष 50 लोगों के खिलाफ अदालतों में आरोपपत्र पेश किए गए हैं।

इसका अर्थ है कि 65 लोगों से संबंधित जांच निष्कर्ष दर्ज किए गए हैं, लेकिन सभी के खिलाफ समान स्थिति में मुकदमा नहीं चल रहा है। मृत व्यक्तियों के संबंध में कानूनी स्थिति अलग होती है, जबकि जीवित आरोपियों के मामलों में आगे की कार्रवाई न्यायालय की प्रक्रिया के अनुसार होगी।

अब अदालतों में आगे की कार्रवाई

क्राइम ब्रांच की ओर से जांच पूरी कर आरोपपत्र दाखिल किए जाने के बाद अब मामलों की अगली प्रक्रिया संबंधित अदालतों में आगे बढ़ेगी। अदालतें प्रस्तुत दस्तावेजों, आरोपों और लागू कानूनों के आधार पर आगे की सुनवाई करेंगी।

यह मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें लंबे समय से रह रहे विदेशी नागरिकों की कानूनी स्थिति, यात्रा दस्तावेजों की वैधता और कथित तौर पर गलत तरीके से भारतीय पहचान हासिल करने जैसे सवाल शामिल हैं।

निष्कर्ष: जम्मू संभाग के चार जिलों में सामने आए इन आठ मामलों में क्राइम ब्रांच ने अपनी जांच पूरी कर कानूनी प्रक्रिया को आगे बढ़ाया है। हालांकि, आरोपपत्र दाखिल होना दोष सिद्ध होने के समान नहीं है। संबंधित आरोपियों की जिम्मेदारी और मामले के अंतिम निष्कर्ष का निर्धारण अदालतों में होने वाली सुनवाई के बाद ही किया जाएगा।