नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026: यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) के कुछ व्यापारी लेनदेन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के फैसले को लेकर कांग्रेस और केंद्र सरकार के बीच राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस ने सरकार से इस फैसले पर सवाल उठाते हुए इसके संभावित आर्थिक असर को लेकर चिंता जताई है। खास तौर पर छोटे कारोबारियों और उन ग्राहकों पर संभावित अप्रत्यक्ष असर को लेकर पार्टी ने आपत्ति दर्ज की है। नई व्यवस्था के तहत 15 अक्टूबर 2026 से ₹2,000 से अधिक के चुनिंदा Person-to-Merchant (P2M) UPI लेनदेन पर 0.4% MDR लागू होगा। हालांकि, यह शुल्क हर UPI भुगतान पर नहीं लगेगा। सरकार के अनुसार, व्यक्ति से व्यक्ति यानी P2P भुगतान पूरी तरह मुफ्त रहेगा। ₹2,000 तक के व्यापारी भुगतान भी MDR से मुक्त रहेंगे। इसके अलावा, छोटे कारोबारियों के लिए अलग शून्य-MDR प्रावधान जारी रहेगा। सरकार का दावा है कि लगभग 96% P2M लेनदेन इस बदलाव से प्रभावित नहीं होंगे। कांग्रेस ने MDR लागू करने के फैसले पर सवाल उठाते हुए कहा है कि UPI भारत में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाला डिजिटल भुगतान माध्यम है और शुल्क व्यवस्था में बदलाव का असर व्यापारियों और ग्राहकों के व्यवहार पर पड़ सकता है। विपक्ष की चिंता यह है कि भले ही MDR सीधे ग्राहक से न लिया जाए, लेकिन व्यापारी अपनी अतिरिक्त भुगतान लागत को वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल करने की कोशिश कर सकते हैं। इसी तरह, कुछ कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान की लागत बढ़ने पर नकद भुगतान को प्राथमिकता देने की संभावना पर भी चर्चा हो रही है। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि MDR कोई सरकारी टैक्स नहीं है। वित्त मंत्रालय के अनुसार, यह भुगतान व्यवस्था में शामिल बैंकों, भुगतान सेवा प्रदाताओं और UPI ऐप प्रदाताओं के बीच वितरित होने वाला शुल्क है। सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था का उद्देश्य UPI के बुनियादी ढांचे, साइबर सुरक्षा और भविष्य के विस्तार के लिए भुगतान व्यवस्था को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना है। सरकार ने यह भी कहा है कि ग्राहकों से सीधे MDR नहीं लिया जाएगा और बैंकों को निर्देश दिया गया है कि व्यापारी इस शुल्क को ग्राहक पर सीधे न डालें। UPI ऐप प्रदाताओं को भी अतिरिक्त प्लेटफॉर्म या छिपा हुआ शुल्क लगाने की अनुमति नहीं होगी। सरकार ने छोटे व्यापारियों को MDR के प्रभाव से बचाने के लिए विशेष प्रावधान किया है। P2PM श्रेणी में UPI QR के जरिए प्रति माह ₹1 लाख तक प्राप्त करने वाले छोटे विक्रेताओं को शून्य MDR का लाभ जारी रहेगा। इस श्रेणी में सड़क किनारे सामान बेचने वाले विक्रेता, मोहल्ले की छोटी दुकानें और अन्य छोटे कारोबार शामिल हो सकते हैं। सरकार का कहना है कि इससे छोटे कारोबारियों के लिए डिजिटल भुगतान की लागत में वृद्धि नहीं होगी। सामान्य पात्र P2M लेनदेन में ₹2,000 से अधिक की राशि पर MDR 0.4% निर्धारित किया गया है। वहीं, ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर प्रति ट्रांजैक्शन अधिकतम ₹300 की सीमा रखी गई है। कुछ आवश्यक क्षेत्रों के लिए अलग व्यवस्था है। रेलवे, दूरसंचार, बीमा, ईंधन और कृषि इनपुट जैसे क्षेत्रों में ₹2,000 से अधिक के भुगतान पर ₹5 का फ्लैट MDR निर्धारित किया गया है। पूंजी बाजार से जुड़े कुछ भुगतान पर 0.02% MDR और ₹300 की अधिकतम सीमा का प्रावधान है। MDR विवाद में संसद की वित्त संबंधी स्थायी समिति का मुद्दा भी सामने आया है। सरकार की ओर से कहा गया है कि UPI के लिए टिकाऊ राजस्व मॉडल की आवश्यकता से जुड़ी सिफारिशें संसदीय समिति की रिपोर्ट में मौजूद थीं। हालांकि, कांग्रेस सांसद गौरव गोगोई और मनीष तिवारी ने इस बात से इनकार किया है कि समिति में मौजूदा UPI MDR प्रस्ताव का समर्थन किया गया था। गोगोई ने कहा कि समिति में कथित "UPI टैक्स प्रस्ताव" पर चर्चा ही नहीं हुई थी। राजनीतिक बहस में यह आरोप भी सामने आया कि UPI पर MDR लगाने के पीछे विदेशी कंपनियों या अमेरिकी दबाव की भूमिका हो सकती है। कांग्रेस और अन्य विपक्षी नेताओं ने इस संबंध में सवाल उठाए हैं। वित्त मंत्रालय ने इन आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि MDR संबंधी फैसला किसी विदेशी दबाव के कारण नहीं लिया गया। मंत्रालय के मुताबिक, UPI पर क्रेडिट लेनदेन के लिए केवल RuPay क्रेडिट कार्ड को लिंक करने की मौजूदा नीति जारी है और विदेशी कार्ड नेटवर्क को कोई विशेष लाभ नहीं दिया गया है। UPI भारत के डिजिटल भुगतान तंत्र का एक प्रमुख हिस्सा बन चुका है। अगस्त 2026 में UPI पर करीब 24.5 अरब लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत लगभग ₹29.82 लाख करोड़ रही। इतने बड़े भुगतान नेटवर्क में शुल्क व्यवस्था में बदलाव का प्रभाव बैंकों, भुगतान ऐप कंपनियों, व्यापारियों और डिजिटल भुगतान के उपयोगकर्ताओं पर पड़ सकता है। व्यापारी संगठनों ने भी MDR को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि कम मार्जिन वाले कारोबारों में भुगतान लागत बढ़ना महत्वपूर्ण हो सकता है। कुछ संगठनों ने आशंका जताई है कि अतिरिक्त लागत के कारण कुछ व्यापारी डिजिटल भुगतान के बजाय नकद लेनदेन को प्राथमिकता दे सकते हैं। दूसरी ओर, सरकार का कहना है कि अधिकांश छोटे व्यापारी और सामान्य UPI उपयोगकर्ता इस बदलाव से बाहर रहेंगे तथा MDR से मिलने वाले संसाधनों का इस्तेमाल भुगतान व्यवस्था को मजबूत करने और ग्रामीण एवं अर्ध-शहरी क्षेत्रों में डिजिटल भुगतान के विस्तार के लिए किया जा सकता है। अब इस विवाद में तीन बातें महत्वपूर्ण रहेंगी—15 अक्टूबर से नई व्यवस्था का क्रियान्वयन, कारोबारियों द्वारा MDR को किस तरह वहन किया जाता है और क्या ग्राहक पर इसका कोई अप्रत्यक्ष प्रभाव दिखाई देता है। सरकार ने ग्राहक से सीधे शुल्क वसूलने से इनकार किया है, जबकि विपक्ष और कुछ कारोबारी संगठनों ने संभावित अप्रत्यक्ष लागत को लेकर सवाल उठाए हैं।क्या है नया MDR नियम?
कांग्रेस की मुख्य आपत्ति क्या है?
सरकार की सफाई
छोटे कारोबारियों के लिए क्या प्रावधान है?
बड़े भुगतान पर कितना शुल्क?
कांग्रेस और सरकार के बीच संसदीय समिति को लेकर भी विवाद
अमेरिकी दबाव के आरोप पर सरकार का जवाब
UPI के बड़े पैमाने को देखते हुए क्यों महत्वपूर्ण है फैसला?
कारोबारियों की चिंता
आगे क्या?
UPI पर MDR को लेकर कांग्रेस ने केंद्र पर उठाए सवाल, छोटे कारोबारियों और डिजिटल भुगतान की लागत पर जताई चिंता






