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कर्नाटक में सूखे का दायरा बढ़ा, 124 तालुक अब सूखाग्रस्त


बेंगलुरु, 18 सितंबर 2026: कर्नाटक में बारिश की कमी और लगातार बने शुष्क हालात के बीच सरकार ने 23 और तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया है। इसके साथ ही खरीफ 2026 के लिए राज्य में आधिकारिक तौर पर सूखाग्रस्त घोषित तालुकों की संख्या बढ़कर 124 हो गई है।

23 नए तालुकों में 21 गंभीर श्रेणी में

सरकार के ताजा आदेश के तहत नए घोषित 23 तालुकों में 21 को गंभीर सूखा प्रभावित और दो को मध्यम सूखा प्रभावित श्रेणी में रखा गया है। पोनमपेट और विराजपेट को मध्यम श्रेणी में शामिल किया गया है, जबकि बाकी 21 तालुक गंभीर श्रेणी में हैं।

इन नए क्षेत्रों में तुमकुरु, कोप्पल, रायचूर, कलबुर्गी, बीदर, विजयपुरा, हावेरी, धारवाड़, चीक्कमगलुरु और कोडागु समेत कई जिले शामिल हैं। इससे साफ है कि बारिश की कमी का असर राज्य के अलग-अलग हिस्सों में फैला हुआ है।

वैज्ञानिक आकलन के बाद लिया गया फैसला

यह घोषणा केवल बारिश के आंकड़ों पर आधारित नहीं है। Karnataka State Natural Disaster Monitoring Centre (KSNDMC) की विस्तृत रिपोर्ट और जमीनी सत्यापन के बाद नए तालुकों को सूची में शामिल किया गया।

पहले चरण में 27 अगस्त को 101 तालुकों को सूखाग्रस्त घोषित किया गया था। इसके बाद बाकी क्षेत्रों का वैज्ञानिक मूल्यांकन किया गया। दूसरे चरण में 23 और तालुक पात्र पाए गए।

214 गांवों में हुआ जमीनी सत्यापन

सरकार के निर्देश पर 24 तालुकों के 214 गांवों में ground-truthing की गई। इसके लिए मोबाइल एप्लिकेशन की मदद से स्थानीय स्तर पर स्थिति का आकलन किया गया। इसमें बारिश, फसल की स्थिति और सूखे से जुड़े अन्य संकेतकों को ध्यान में रखा गया।

किसानों के लिए राहत प्रक्रिया शुरू

सूखाग्रस्त घोषित क्षेत्रों में जिला प्रशासन को State Disaster Response Fund के दिशा-निर्देशों के अनुसार राहत और बचाव संबंधी कदम उठाने की अनुमति दी गई है। कृषि विभाग, बागवानी विभाग और संबंधित जिला प्रशासन को संयुक्त रूप से फसल नुकसान का सर्वे करने के निर्देश भी दिए गए हैं।

फसल नुकसान का आकलन पूरा होने के बाद संबंधित विभाग सरकार को राहत संबंधी रिपोर्ट सौंपेंगे। इसका उद्देश्य प्रभावित किसानों तक नियमों के तहत सहायता पहुंचाने के लिए नुकसान का वास्तविक आंकड़ा तैयार करना है।

सूखे की स्थिति पर लगातार नजर

राज्य सरकार ने कहा है कि KSNDMC सूखे की स्थिति की साप्ताहिक समीक्षा करेगा। सितंबर में सामान्य से कम बारिश का अनुमान होने के कारण आने वाले दिनों में स्थिति पर नजर रखी जाएगी। पात्रता पूरी करने वाले अन्य तालुकों को भी आगे के चरणों में सूखाग्रस्त घोषित किया जा सकता है।

कृषि और जल उपलब्धता पर बढ़ी चुनौती

सूखे की बढ़ती सूची का सीधा असर खेती और ग्रामीण जल संसाधनों पर पड़ सकता है। खासकर बारिश पर निर्भर क्षेत्रों में फसल उत्पादन, मिट्टी की नमी और किसानों की आय पर दबाव बढ़ने की आशंका है। हालांकि वास्तविक नुकसान का आकलन फसल सर्वे और आगे के मौसम पर निर्भर करेगा।

कर्नाटक में अब 124 तालुकों का सूखाग्रस्त घोषित होना राज्य के लिए व्यापक राहत और जल प्रबंधन की चुनौती को रेखांकित करता है। सरकार ने फिलहाल वैज्ञानिक आकलन और चरणबद्ध राहत प्रक्रिया जारी रखने की बात कही है।