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दिल्ली की हवा में सुधार, AQI घटकर 191 पर पहुंचा; प्रदूषण नियंत्रण अभियान तेज


नई दिल्ली, 25 अक्टूबर 2026। राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में वायु प्रदूषण को लेकर निगरानी और नियंत्रण के प्रयास तेज किए गए हैं। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) के आंकड़ों के अनुसार, 24 अक्टूबर को शाम 4 बजे दिल्ली का 24 घंटे का औसत वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) 191 दर्ज किया गया। इससे पहले शुक्रवार को इसी समय AQI 230 था। वायु गुणवत्ता में इस सुधार के बाद दिल्ली की हवा खराब श्रेणी से निकलकर मध्यम श्रेणी में पहुंच गई। हालांकि, विशेषज्ञों के अनुसार, सर्दियों की शुरुआत के साथ प्रदूषण दोबारा बढ़ने की आशंका को देखते हुए सतर्कता जरूरी है। 

दस वर्षों में इस तारीख का बेहतर स्तर

दिल्ली सरकार के पर्यावरण विभाग के अनुसार, 24 अक्टूबर को दर्ज 191 का AQI पिछले दस वर्षों में इस तारीख के लिए सबसे बेहतर स्तर रहा, यदि कोविड महामारी के दौर को अलग रखा जाए। आंकड़ों के मुताबिक, 24 अक्टूबर 2024 को AQI 306 और 2025 में 275 दर्ज किया गया था, जबकि इस साल यह घटकर 191 पर आ गया।

पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा ने प्रदूषण नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों, नियमित निगरानी और सरकारी विभागों की कार्रवाई को इस सुधार से जोड़ा है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि प्रदूषण कम करने के लिए अभियान आगे भी जारी रहेगा। 

प्रदूषण रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए?

दिल्ली सरकार के अनुसार, प्रदूषण के प्रमुख स्रोतों पर नियंत्रण के लिए पिछले 24 घंटों के दौरान कई कदम उठाए गए। इनमें वाहनों की जांच, सड़कों की सफाई, पानी का छिड़काव और निर्माण स्थलों का निरीक्षण शामिल है।

प्रशासन की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक:

  • प्रदूषण नियमों के उल्लंघन पर 9,883 वाहनों के चालान काटे गए।

  • धूल नियंत्रित करने के लिए 2,810 किलोमीटर सड़कों की मशीनों से सफाई की गई।

  • 1,075 किलोमीटर सड़कों पर पानी का छिड़काव किया गया।

  • करीब 12,702 मीट्रिक टन कचरा हटाया गया।

  • निर्माण और तोड़फोड़ से निकले 2,223 मीट्रिक टन मलबे का निपटारा किया गया।

  • निर्माण एवं विध्वंस से जुड़े 160 स्थलों या भूखंडों का निरीक्षण किया गया।

सरकार के अनुसार, इन उपायों का उद्देश्य सड़क की धूल, वाहन उत्सर्जन और खुले में कचरा जलाने जैसे प्रदूषण स्रोतों पर लगाम लगाना है।

दिल्ली में प्रदूषण बढ़ने के प्रमुख कारण

राजधानी में वायु प्रदूषण के पीछे कई कारण जिम्मेदार हैं। वाहनों से निकलने वाला धुआं, औद्योगिक उत्सर्जन, निर्माण कार्यों की धूल, सड़कों पर जमा मिट्टी और आसपास के क्षेत्रों में पराली जलाने से हवा की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

सर्दियों के दौरान हवा की गति कम होने और मौसम संबंधी परिस्थितियों के कारण प्रदूषक वातावरण में लंबे समय तक बने रह सकते हैं। इससे प्रदूषण का स्तर तेजी से बढ़ सकता है। त्योहारों के दौरान पटाखों से निकलने वाला धुआं भी वायु गुणवत्ता पर अतिरिक्त दबाव डाल सकता है।

इसी वजह से प्रशासन को केवल प्रदूषण बढ़ने के बाद कार्रवाई करने के बजाय पूरे मौसम में नियमित निगरानी और नियंत्रण उपाय जारी रखने की आवश्यकता है।

AQI 191 का क्या मतलब है?

वायु गुणवत्ता सूचकांक हवा में मौजूद प्रदूषकों के प्रभाव को समझने का एक मानक है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के वर्गीकरण के अनुसार, 101 से 200 तक का AQI मध्यम श्रेणी में आता है। इसलिए 191 का स्तर खराब श्रेणी से बेहतर जरूर है, लेकिन इसे पूरी तरह स्वच्छ हवा का संकेत नहीं माना जा सकता।

मध्यम श्रेणी की हवा भी कुछ संवेदनशील लोगों, विशेषकर सांस और हृदय संबंधी समस्याओं से जूझ रहे व्यक्तियों को परेशानी दे सकती है। बच्चों और बुजुर्गों को भी प्रदूषण के स्तर और अपनी शारीरिक स्थिति के अनुसार सावधानी बरतनी चाहिए।

निगरानी व्यवस्था को मजबूत करने पर जोर

दिल्ली सरकार ने प्रदूषण के प्रमुख हॉटस्पॉट की पहचान, नियमित निरीक्षण और विभागों के बीच समन्वय पर जोर दिया है। एकीकृत कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के माध्यम से कैमरों, वायु गुणवत्ता निगरानी और तकनीकी प्रणालियों की मदद से प्रदूषण नियंत्रण उपायों की निगरानी भी की जा रही है।

प्रशासन ने लोगों से खुले में कचरा नहीं जलाने, निर्माण सामग्री को ढककर रखने और प्रदूषण नियंत्रण नियमों का पालन करने की अपील की है। साथ ही, सार्वजनिक परिवहन का उपयोग बढ़ाने और निजी वाहनों पर निर्भरता कम करने से भी उत्सर्जन घटाने में मदद मिल सकती है।

आगे क्या रहेगी चुनौती?

हालिया आंकड़ों से दिल्ली की हवा में सुधार के संकेत मिले हैं, लेकिन इस स्थिति को लंबे समय तक बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। सर्दियों में मौसम की प्रतिकूल परिस्थितियां और क्षेत्रीय प्रदूषण राजधानी की वायु गुणवत्ता को फिर प्रभावित कर सकते हैं।

प्रशासन के सामने नियमित निरीक्षण, नियमों का सख्ती से पालन कराने और प्रदूषण फैलाने वाले स्रोतों पर प्रभावी कार्रवाई जारी रखने की जिम्मेदारी है। नागरिकों की भागीदारी भी इस अभियान की सफलता के लिए महत्वपूर्ण होगी।

निष्कर्ष: दिल्ली का AQI 191 तक गिरना राहत का संकेत है। फिर भी, प्रदूषण की समस्या पूरी तरह समाप्त नहीं हुई है। वायु गुणवत्ता में स्थायी सुधार के लिए वाहनों के उत्सर्जन, सड़क की धूल, निर्माण गतिविधियों और कचरा जलाने पर लगातार नियंत्रण आवश्यक है।