इंफाल, 25 अक्टूबर 2026। मणिपुर में सुरक्षा व्यवस्था को लेकर एक गंभीर मामला सामने आया है। कांगपोकपी जिले के एक निर्धारित कुकी उग्रवादी शिविर में जांच के दौरान 150 से अधिक पंजीकृत कैडर मौजूद नहीं मिले। अधिकारियों के अनुसार, माउंट सिनाई शिविर में कुल 159 अधिकृत कैडरों के रहने की जानकारी थी, लेकिन निरीक्षण के दौरान वहां केवल एक पंजीकृत सदस्य मिला। इस घटनाक्रम के बाद सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और लापता कैडरों के बारे में जानकारी जुटाई जा रही है। संयुक्त सुरक्षा अभियान के दौरान शिविर से 17 ऐसे लोगों को भी गिरफ्तार किया गया, जिनकी पहचान अधिकृत कैडरों के रिकॉर्ड से मेल नहीं खाती थी। सुरक्षा बलों ने शिविर का नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया है। मामले की जांच में हथियारों के अनधिकृत इस्तेमाल, पहचान संबंधी गड़बड़ी और संघर्षविराम समझौते के नियमों के उल्लंघन की आशंकाओं पर ध्यान दिया जा रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, मणिपुर पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) और उसकी CoBRA इकाई समेत अन्य सुरक्षा कर्मियों ने 20 से 23 अक्टूबर के बीच कांगपोकपी जिले के साइमोल गांव स्थित माउंट सिनाई शिविर में तलाशी अभियान चलाया। यह कार्रवाई इम्फाल पूर्वी और कांगपोकपी जिलों की सीमा के पास 19 अक्टूबर को तीन मैतेई नागरिकों की हत्या के बाद सुरक्षा जांच तेज किए जाने के क्रम में हुई। जांच के दौरान शिविर में मौजूद लोगों के पहचान दस्तावेजों का अधिकृत सूची से मिलान किया गया। अधिकारियों को वहां केवल एक पंजीकृत कैडर मिला, जबकि बाकी 17 लोगों की पहचान संदिग्ध पाई गई। इन लोगों को गिरफ्तार कर पूछताछ शुरू की गई है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार व्यक्तियों को 31 अक्टूबर तक आठ दिन की पुलिस हिरासत में भेजा गया है। तलाशी अभियान के दौरान सुरक्षा बलों ने शिविर से बड़ी संख्या में हथियार, कारतूस और संचार उपकरण बरामद किए। अधिकारियों के अनुसार, बरामद सामान में 24 आग्नेयास्त्र, बड़ी मात्रा में गोला-बारूद, मैगजीन और वायरलेस सेट शामिल हैं। बरामद हथियारों में एके सीरीज की राइफलें, जी-3 राइफलें, एम-16 राइफलें और अन्य हथियार शामिल बताए गए हैं। इसके अलावा, सुरक्षा बलों को शिविर से पहचान पत्र तथा अन्य सैन्य उपयोग की सामग्री भी मिली है। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि शिविर में मौजूद हथियारों और अन्य उपकरणों का इस्तेमाल किस उद्देश्य से किया जा रहा था। साथ ही, यह भी जांच की जा रही है कि वहां मिले 17 लोगों का प्रतिबंधित गतिविधियों या किसी अन्य आपराधिक मामले से कोई संबंध है या नहीं। यह मामला कुकी-जो संगठनों और केंद्र तथा मणिपुर सरकार के बीच हुए सस्पेंशन ऑफ ऑपरेशंस (SoO) समझौते से भी जुड़ा है। इस व्यवस्था का उद्देश्य सशस्त्र समूहों के साथ संघर्ष रोकना और राजनीतिक बातचीत के लिए परिस्थितियां तैयार करना था। समझौते के नियमों के तहत संबंधित संगठनों के कैडरों को निर्धारित शिविरों में रहना होता है। उन्हें हिंसक गतिविधियों से दूर रहने और हथियारों को तय सुरक्षा व्यवस्था के अंतर्गत रखने की शर्तों का पालन करना होता है। अधिकारियों के अनुसार, SoO समझौते की अवधि 4 सितंबर 2026 को समाप्त हो गई थी और इसे अब तक नवीनीकृत नहीं किया गया है। हालांकि, समझौते को औपचारिक रूप से समाप्त किए जाने की स्थिति अलग है। सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि इसकी शर्तों और हथियारों के प्रबंधन से जुड़े नियमों के पालन की जांच की जा रही है। माउंट सिनाई शिविर में सामने आई स्थिति के बाद राज्य के अन्य निर्धारित शिविरों की भी जांच करने की योजना बनाई गई है। अधिकारियों का उद्देश्य यह पता लगाना है कि पंजीकृत कैडरों की वास्तविक संख्या क्या है और क्या दूसरे शिविरों में भी इसी तरह की अनियमितताएं मौजूद हैं। इस जांच के दौरान कैडरों की पहचान, उनकी उपस्थिति, हथियारों के भंडारण और शिविरों के संचालन से जुड़े नियमों की समीक्षा की जा सकती है। इससे सुरक्षा एजेंसियों को समझौते के अनुपालन की वास्तविक स्थिति का आकलन करने में मदद मिलेगी। मणिपुर में मैतेई और कुकी-जो समुदायों के बीच मई 2023 से जातीय हिंसा और तनाव की स्थिति बनी हुई है। इस संघर्ष में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई और हजारों परिवारों को अपने घर छोड़ने पड़े। ऐसे माहौल में किसी निर्धारित उग्रवादी शिविर से बड़ी संख्या में पंजीकृत सदस्यों का अनुपस्थित मिलना सुरक्षा एजेंसियों के लिए गंभीर चिंता का विषय है। हालिया घटनाक्रम के बाद सुरक्षा बलों की प्राथमिकता लापता कैडरों का पता लगाना, बरामद हथियारों की जांच करना और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि अनुपस्थित कैडर कहां हैं और उनकी गैरमौजूदगी के पीछे क्या कारण हैं। मामले में गिरफ्तार 17 लोगों से पूछताछ जारी है। पुलिस यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि उन्होंने कथित तौर पर किस आधार पर शिविर में प्रवेश किया और क्या वे किसी संगठन के अधिकृत सदस्य थे। जांच एजेंसियां लापता कैडरों के बारे में जानकारी जुटाने के साथ हथियारों तथा दस्तावेजों की भी जांच कर रही हैं। निष्कर्ष: मणिपुर के माउंट सिनाई शिविर में 159 अधिकृत कैडरों में से केवल एक के मौजूद मिलने की रिपोर्ट ने सुरक्षा व्यवस्था और संघर्षविराम समझौते के अनुपालन पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। 17 संदिग्धों की गिरफ्तारी, हथियारों की बरामदगी और अन्य शिविरों की प्रस्तावित जांच आने वाले दिनों में महत्वपूर्ण होगी। फिलहाल, लापता कैडरों की स्थिति और पूरे मामले की वास्तविक परिस्थितियों पर अंतिम निष्कर्ष जांच पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।चार दिनों तक चला संयुक्त सुरक्षा अभियान
शिविर से भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद
संघर्षविराम समझौते के उल्लंघन की आशंका
सभी निर्धारित शिविरों की जांच की तैयारी
मणिपुर में पहले से तनावपूर्ण है स्थिति
अब आगे क्या होगा?
मणिपुर में कुकी उग्रवादी शिविर से 150 से अधिक कैडर लापता, सुरक्षा बलों ने संभाला कैंप; 17 संदिग्ध गिरफ्तार


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