भुवनेश्वर, 26 अक्टूबर 2026। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि आधुनिक समय में किसी देश को कमजोर करने के लिए केवल पारंपरिक हथियारों का इस्तेमाल ही जरूरी नहीं है, बल्कि उसकी अर्थव्यवस्था और डिजिटल व्यवस्था पर साइबर हमले भी गंभीर खतरा पैदा कर सकते हैं। ऐसे में भारत की बैंकिंग प्रणाली, डिजिटल भुगतान नेटवर्क और महत्वपूर्ण वित्तीय डेटा की सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा बन गई है। प्रधानमंत्री ने यह बात 25 अक्टूबर को ओडिशा के भुवनेश्वर के पास भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के नए डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान के उद्घाटन के दौरान कही। RBI की इन दोनों नई सुविधाओं का उद्देश्य देश के वित्तीय बुनियादी ढांचे को अधिक सुरक्षित, भरोसेमंद और तकनीकी रूप से सक्षम बनाना है। अधिकारियों के अनुसार, इन परियोजनाओं पर लगभग 169 करोड़ रुपये खर्च किए गए हैं। ये सुविधाएं भुवनेश्वर के निकट जटनी क्षेत्र के इन्फो वैली-II में स्थापित की गई हैं। नया डेटा सेंटर केंद्रीय बैंक की महत्वपूर्ण तकनीकी जरूरतों को पूरा करने के साथ भुगतान और निपटान प्रणालियों से जुड़े अहम कार्यों को सहारा देगा। भारत में डिजिटल लेनदेन के तेजी से बढ़ते दायरे को देखते हुए वित्तीय आंकड़ों का सुरक्षित भंडारण और सेवाओं का निर्बाध संचालन विशेष महत्व रखता है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि जैसे-जैसे भारत आर्थिक रूप से मजबूत हो रहा है, वैसे-वैसे उसकी वित्तीय व्यवस्था को साइबर अपराधियों और साइबर आतंकवादियों से सुरक्षित रखना भी जरूरी होता जा रहा है। बैंकिंग नेटवर्क पर हमला होने से केवल किसी एक संस्थान की सेवाएं प्रभावित नहीं होतीं, बल्कि इसका असर डिजिटल भुगतान, वित्तीय लेनदेन और आम लोगों के भरोसे पर भी पड़ सकता है। आज बैंकिंग सेवाओं का बड़ा हिस्सा इंटरनेट, मोबाइल एप और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर निर्भर है। ऐसे में डेटा चोरी, ऑनलाइन धोखाधड़ी, रैनसमवेयर हमले और भुगतान प्रणालियों को बाधित करने जैसी घटनाएं गंभीर चुनौती बन सकती हैं। इन खतरों से निपटने के लिए तकनीकी सुरक्षा के साथ प्रशिक्षित विशेषज्ञों और लगातार अद्यतन सुरक्षा प्रणालियों की जरूरत है। नए साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का प्रमुख उद्देश्य बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र के कर्मचारियों तथा तकनीकी विशेषज्ञों की क्षमताओं को विकसित करना है। यहां साइबर सुरक्षा, एंटरप्राइज टेक्नोलॉजी और उभरती तकनीकों से संबंधित प्रशिक्षण एवं शोध को बढ़ावा दिया जाएगा। प्रधानमंत्री ने जोर दिया कि बदलते साइबर खतरों का मुकाबला पुराने प्रशिक्षण तरीकों और पारंपरिक उपकरणों के सहारे नहीं किया जा सकता। इसके लिए आधुनिक तकनीकी ढांचे के साथ कुशल मानव संसाधन भी तैयार करने होंगे। इस संस्थान के माध्यम से वित्तीय क्षेत्र में साइबर जोखिमों की पहचान, डिजिटल प्रणालियों की सुरक्षा और संभावित हमलों से निपटने की तैयारियों को बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। प्रधानमंत्री ने कहा कि पिछले दशक में बैंकिंग सेवाओं को अधिक से अधिक लोगों तक पहुंचाने पर जोर दिया गया, जबकि आने वाले समय में इन सेवाओं को अधिक प्रभावी और विश्वसनीय बनाना महत्वपूर्ण होगा। डिजिटल बैंकिंग के विस्तार ने आम नागरिकों, छोटे कारोबारियों, दुकानदारों और उद्यमियों के लिए वित्तीय सेवाओं तक पहुंच आसान की है। हालांकि, डिजिटल सुविधाओं के बढ़ने के साथ ग्राहकों की निजी जानकारी, बैंक खातों और ऑनलाइन लेनदेन की सुरक्षा भी उतनी ही महत्वपूर्ण हो गई है। RBI का नया डेटा सेंटर इस दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है, क्योंकि इससे केंद्रीय बैंक की आवश्यक तकनीकी क्षमताओं और महत्वपूर्ण वित्तीय प्रणालियों की मजबूती को समर्थन मिलेगा। प्रधानमंत्री ने ओडिशा को पूर्वी भारत के विकास का महत्वपूर्ण केंद्र बताते हुए कहा कि राज्य में पारंपरिक खनिज आधारित उद्योगों के साथ-साथ सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, डेटा सेंटर और उन्नत कंप्यूटिंग जैसे क्षेत्रों में भी अवसर विकसित हो रहे हैं। इन क्षेत्रों में निवेश बढ़ने से तकनीकी कौशल, रोजगार और नए उद्योगों के विकास की संभावनाएं मजबूत हो सकती हैं। भुवनेश्वर में RBI की नई सुविधाओं की स्थापना को भी इसी व्यापक तकनीकी विकास से जोड़कर देखा जा रहा है। नई सुविधाओं का प्रभाव केवल बैंकिंग संस्थानों तक सीमित नहीं रहेगा। सुरक्षित डिजिटल ढांचा ऑनलाइन भुगतान की विश्वसनीयता बढ़ाने, महत्वपूर्ण वित्तीय सेवाओं की निरंतरता बनाए रखने और साइबर जोखिमों से निपटने की क्षमता मजबूत करने में मदद कर सकता है। हालांकि, साइबर सुरक्षा के लिए संस्थागत तैयारियों के साथ नागरिकों की सतर्कता भी जरूरी है। लोगों को अनजान लिंक से बचना चाहिए, बैंकिंग ओटीपी और पासवर्ड किसी के साथ साझा नहीं करने चाहिए तथा संदिग्ध लेनदेन की सूचना तुरंत संबंधित बैंक को देनी चाहिए। कुल मिलाकर, भुवनेश्वर में RBI के डेटा सेंटर और साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान का उद्घाटन भारत की डिजिटल वित्तीय व्यवस्था को अधिक सुरक्षित बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल है। बढ़ते साइबर खतरों के बीच मजबूत तकनीकी ढांचा, प्रशिक्षित विशेषज्ञ और प्रभावी सुरक्षा व्यवस्था देश की आर्थिक स्थिरता तथा डिजिटल सेवाओं पर जनता के भरोसे को बनाए रखने में अहम भूमिका निभाएंगे।करीब 169 करोड़ रुपये की लागत से तैयार हुईं सुविधाएं
साइबर हमलों से अर्थव्यवस्था को हो सकता है नुकसान
साइबर सुरक्षा प्रशिक्षण संस्थान निभाएगा अहम भूमिका
डिजिटल बैंकिंग को अधिक भरोसेमंद बनाने की तैयारी
पूर्वी भारत में तकनीकी निवेश को मिलेगा बढ़ावा
आम नागरिकों के लिए क्या होगा इसका महत्व?
पीएम मोदी का बड़ा संदेश: साइबर सुरक्षा राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा, बैंकिंग सिस्टम को सुरक्षित रखने पर जोर


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