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संसद के विशेष सत्र की अटकलें तेज, परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों पर हो सकता है फोकस


नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026: केंद्र सरकार अगले महीने संसद का विशेष सत्र बुलाने के विकल्प पर विचार कर रही है। ताजा रिपोर्टों के मुताबिक, संभावित विशेष सत्र में परिसीमन और महिला आरक्षण से जुड़े विधेयकों को आगे बढ़ाने की कोशिश हो सकती है। हालांकि, सरकार की ओर से अभी तक विशेष सत्र की तारीखों या अंतिम एजेंडे की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

विशेष सत्र को लेकर क्या है चर्चा?

हिंदुस्तान टाइम्स की 17 सितंबर की रिपोर्ट के अनुसार, केंद्र सरकार अगले महीने संसद का विशेष सत्र बुलाने में रुचि दिखा रही है। रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि सरकार ने राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के कुछ सहयोगी दलों से संपर्क भी किया है। विपक्षी दलों का कहना है कि उन्हें इस प्रस्ताव के बारे में औपचारिक रूप से जानकारी नहीं दी गई है।

वहीं, यूनाइटेड न्यूज ऑफ इंडिया (UNI) की रिपोर्ट के मुताबिक, राजनीतिक हलकों में तीन दिन के संभावित विशेष सत्र की चर्चा है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इसमें परिसीमन और महिला आरक्षण से संबंधित विधेयकों को फिर से आगे बढ़ाने की कोशिश की जा सकती है।

किन विधेयकों पर नजर?

मामले के केंद्र में संविधान (131वां संशोधन) विधेयक, 2026 और परिसीमन विधेयक, 2026 हैं। इसके अलावा इन प्रस्तावों से संबंधित केंद्रशासित प्रदेश कानून (संशोधन) विधेयक, 2026 भी पहले संसद में पेश किया जा चुका है।

केंद्रीय बजट सत्र के दौरान अप्रैल 2026 में ये विधेयक लोकसभा में पेश किए गए थे। संसदीय कार्य मंत्रालय के आधिकारिक रिकॉर्ड के अनुसार, संविधान संशोधन विधेयक को अनुच्छेद 368(2) के तहत आवश्यक बहुमत नहीं मिल सका, जिसके बाद उस पर आगे की कार्रवाई नहीं हुई। इससे जुड़े अन्य दोनों विधेयक भी आगे नहीं बढ़े।

महिला आरक्षण से क्या है संबंध?

2023 के 106वें संविधान संशोधन के तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए एक-तिहाई सीटें आरक्षित करने का प्रावधान किया गया था। इसके लागू होने को जनगणना और उसके बाद होने वाली परिसीमन प्रक्रिया से जोड़ा गया था।

2026 में पेश किए गए प्रस्तावित संवैधानिक संशोधन में महिला आरक्षण के लागू होने की प्रक्रिया में बदलाव का प्रावधान किया गया है। PRS Legislative Research के अनुसार, प्रस्तावित व्यवस्था में 2011 की जनगणना के आधार पर परिसीमन को सक्षम करने और लोकसभा की अधिकतम सदस्य संख्या बढ़ाकर 850 करने का प्रस्ताव शामिल है।

लोकसभा सीटों के परिसीमन का मुद्दा

परिसीमन का मतलब लोकसभा और विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की सीमाओं तथा सीटों के पुनर्निर्धारण से है। प्रस्तावित 2026 के परिसीमन विधेयक में एक परिसीमन आयोग के गठन का प्रावधान किया गया है। इसके अध्यक्ष के रूप में सुप्रीम कोर्ट के वर्तमान या पूर्व न्यायाधीश तथा निर्वाचन आयोग और संबंधित राज्य निर्वाचन आयोग से जुड़े सदस्यों को शामिल करने का प्रस्ताव है।

यह मुद्दा राजनीतिक रूप से संवेदनशील है क्योंकि सीटों के पुनर्निर्धारण से विभिन्न राज्यों और क्षेत्रों के लोकसभा प्रतिनिधित्व में बदलाव हो सकता है। इसी कारण संभावित विधेयकों को लेकर केंद्र और विपक्षी दलों के बीच राजनीतिक चर्चा जारी है।

विपक्ष से संपर्क की भी खबर

न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री किरन रिजिजू के कार्यालय ने कांग्रेस अध्यक्ष और राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे से संपर्क कर विशेष सत्र की संभावना पर चर्चा की है। रिपोर्ट में कहा गया है कि प्रस्तावित सत्र को 11 अक्टूबर से पहले आयोजित करने की संभावना पर बातचीत हुई थी। हालांकि, सरकार की ओर से विशेष सत्र बुलाने की औपचारिक घोषणा अभी नहीं हुई है।

इससे पहले सितंबर में इंडिया टुडे ने भी सूत्रों के हवाले से बताया था कि केंद्र विशेष सत्र का विकल्प खुला रख रहा है और इस पर अंतिम निर्णय के लिए राजनीतिक परिस्थितियों का आकलन किया जा रहा है।

पहले भी हो चुका है राजनीतिक विवाद

अप्रैल 2026 में इन विधेयकों पर संसद में व्यापक बहस हुई थी। सरकार की ओर से इसे महिला प्रतिनिधित्व और परिसीमन से जोड़कर पेश किया गया, जबकि विपक्षी दलों ने प्रस्तावित व्यवस्था और उसके प्रभावों को लेकर आपत्तियां दर्ज कराई थीं। संसदीय कार्य मंत्रालय के रिकॉर्ड के अनुसार, संविधान संशोधन विधेयक आवश्यक विशेष बहुमत हासिल नहीं कर सका था।

अभी क्या स्थिति है?

फिलहाल विशेष सत्र की तारीख, अवधि और अंतिम एजेंडा आधिकारिक तौर पर घोषित नहीं हुआ है। संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त को अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हुआ था और 17 सितंबर तक उसके औपचारिक रूप से प्रोरोग किए जाने की खबर नहीं थी। इसी वजह से विशेष सत्र को लेकर अटकलों को बल मिला है।

इसलिए फिलहाल परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयकों को संभावित एजेंडे के रूप में देखा जा रहा है, लेकिन इन्हें विशेष सत्र में निश्चित रूप से पेश या पारित किया जाएगा—इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।