लखनऊ, 26 अक्टूबर 2026। उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचन आयोग ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद मतदाताओं के नाम जोड़ने, हटाने और विवरण में बदलाव से संबंधित प्रविष्टियों की राज्यव्यापी जांच के निर्देश दिए हैं। इस फैसले के तहत राज्य की सभी 403 विधानसभा सीटों पर मतदाता सूची से जुड़े रिकॉर्ड की जांच की जाएगी। अधिकारियों को आवेदन प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखने, शिकायतों का समय पर निपटारा करने और किसी भी तरह की अनियमितता मिलने पर जिम्मेदार कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने को कहा गया है। यह कदम पीलीभीत जिले में मतदाता सूची से संबंधित प्रविष्टियों में गंभीर अनियमितताएं सामने आने के बाद उठाया गया है। जांच में पीलीभीत सदर विधानसभा क्षेत्र में मतदाताओं के विवरण में बदलाव के लिए 31 मई से 29 अगस्त 2026 के बीच फॉर्म-8 की कुल 13,779 प्रविष्टियां दर्ज किए जाने की जानकारी मिली। इनमें से 10,470 प्रविष्टियां स्वीकृत और 3,309 अस्वीकृत की गई थीं। जांच के दौरान संबंधित आवेदनों और सहायक दस्तावेजों का रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं मिला। इस मामले में निर्वाचन अधिकारियों ने संबंधित कंप्यूटर ऑपरेटर और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। अब यह भी जांच की जा रही है कि कहीं इसी तरह की अनियमितताएं प्रदेश के दूसरे जिलों में तो नहीं हुई हैं। निर्वाचन आयोग की जांच में मतदाता सूची से जुड़े तीन महत्वपूर्ण प्रकार के आवेदनों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। फॉर्म-6: नए मतदाता के रूप में नाम दर्ज कराने के लिए। फॉर्म-7: मतदाता सूची से नाम हटाने के अनुरोध के लिए। फॉर्म-8: मतदाता के नाम, पते या अन्य विवरण में सुधार अथवा निर्धारित परिस्थितियों में बदलाव के लिए। अधिकारियों को निर्देश दिया गया है कि SIR प्रक्रिया समाप्त होने के बाद 10 अप्रैल 2026 से दर्ज किए गए संबंधित आवेदनों की जांच की जाए। इसका उद्देश्य यह पता लगाना है कि नाम जोड़ने, हटाने या संशोधित करने की प्रक्रिया निर्धारित नियमों के अनुसार हुई या नहीं और प्रत्येक प्रविष्टि के समर्थन में आवश्यक दस्तावेज मौजूद हैं या नहीं। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मतदाता सूची तैयार करने और उसमें बदलाव करने की प्रक्रिया की निगरानी मजबूत करने के निर्देश दिए हैं। सभी मंडलायुक्तों को अपने-अपने क्षेत्रों में मतदाता सूची संबंधी कार्यों का पर्यवेक्षण करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। जिला निर्वाचन अधिकारियों को भी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों के कामकाज की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है। निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (ERO), सहायक निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी (AERO) और कंप्यूटर सहायकों की भूमिका की जांच की जाएगी। यदि किसी स्तर पर जानबूझकर गड़बड़ी, नियमों की अनदेखी या गंभीर लापरवाही सामने आती है, तो संबंधित कानूनों के तहत कार्रवाई की जा सकती है। आयोग ने मतदाता सूची में एक ही व्यक्ति के नाम की दोहरी प्रविष्टियों की पहचान करने और नियमानुसार उन्हें ठीक करने के निर्देश भी दिए हैं। अधिकारियों को राजनीतिक दलों, नागरिकों और सोशल मीडिया के माध्यम से मिलने वाली शिकायतों की जांच कर समयबद्ध कार्रवाई करनी होगी। लंबित फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 आवेदनों की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है। साथ ही, मतदाताओं से प्राप्त कागजी आवेदनों को बूथ लेवल अधिकारी (BLO) के माध्यम से BLO ऐप पर दर्ज करने और मूल दस्तावेज सुरक्षित रखने के निर्देश दिए गए हैं। मतदाताओं की सहायता के लिए ECINET ऐप और निर्वाचन आयोग के पोर्टल पर उपलब्ध BLO से संपर्क करने की सुविधा के अनुरोधों का भी समय पर निपटारा सुनिश्चित करने को कहा गया है। उत्तर प्रदेश में SIR के बाद प्रकाशित अंतिम मतदाता सूची में मतदाताओं की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई थी। 27 अक्टूबर 2025 को प्रकाशित सूची में लगभग 15.44 करोड़ मतदाता थे, जबकि 10 अप्रैल 2026 को जारी अंतिम सूची में यह संख्या घटकर करीब 13.39 करोड़ रह गई। इस तरह लगभग 2.04 करोड़ नामों की शुद्ध कमी दर्ज हुई। हालांकि, नामों में कमी का आंकड़ा अपने आप में यह साबित नहीं करता कि सभी हटाई गई प्रविष्टियां गलत थीं। इसी तरह, नए नाम जोड़ने या विवरण बदलने में किसी भी प्रकार की अनियमितता की पुष्टि संबंधित रिकॉर्ड और जांच के आधार पर ही की जा सकती है। आयोग की मौजूदा कार्रवाई का उद्देश्य इन बदलावों की वैधता और प्रक्रिया की जांच करना है। मतदाता सूची में सही नाम, पता और पहचान संबंधी जानकारी होना स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव के लिए जरूरी है। गलत तरीके से नाम हटने पर पात्र नागरिक मतदान के अधिकार से वंचित हो सकता है, जबकि फर्जी या दोहरी प्रविष्टियां चुनावी प्रक्रिया की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर सकती हैं। इसलिए मतदाता सूची में किए गए प्रत्येक बदलाव का उचित रिकॉर्ड रखना, आवेदन की जांच करना और शिकायत मिलने पर समय पर सुधार करना महत्वपूर्ण है। नागरिकों को भी सलाह दी जाती है कि वे अपनी प्रविष्टियों की जांच करें और किसी गलती की स्थिति में संबंधित निर्वाचन अधिकारी के समक्ष नियमानुसार आवेदन या शिकायत दर्ज कराएं। निष्कर्ष: उत्तर प्रदेश में SIR के बाद मतदाता सूची से जुड़ी प्रविष्टियों की राज्यव्यापी जांच का उद्देश्य चुनावी रिकॉर्ड को अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाना है। अब जांच के निष्कर्षों से स्पष्ट होगा कि अनियमितताएं किन क्षेत्रों में हुईं, उनके लिए कौन जिम्मेदार है और मतदाता सूची को नियमों के अनुरूप दुरुस्त करने के लिए क्या कदम उठाए जाने चाहिए।पीलीभीत में गड़बड़ी सामने आने के बाद बढ़ी निगरानी
फॉर्म-6, फॉर्म-7 और फॉर्म-8 की होगी जांच
अधिकारियों की जिम्मेदारी होगी तय
डुप्लीकेट नाम हटाने और शिकायतों के निपटारे पर जोर
SIR के बाद मतदाता सूची में हुआ बड़ा बदलाव
मतदाताओं के लिए क्यों महत्वपूर्ण है यह कदम?
उत्तर प्रदेश में मतदाता सूची की राज्यव्यापी जांच के आदेश, SIR के बाद जुड़े और हटाए गए नामों की होगी पड़ताल


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