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तमिलनाडु बनाम केंद्र: नवोदय स्कूलों पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई, भाषा नीति को लेकर फिर सामने आया विवाद


नई दिल्ली, 17 सितंबर 2026: तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालय (JNV) स्थापित करने को लेकर राज्य सरकार और केंद्र के बीच चल रहा विवाद गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट में फिर सामने आया। सुनवाई के दौरान अदालत ने तमिलनाडु सरकार को हर जिले में नवोदय विद्यालय के लिए उपयुक्त जमीन चिन्हित करने के अपने पहले के निर्देश का पालन करने को कहा। साथ ही, केंद्र और राज्य को आपसी बातचीत के जरिए मतभेद सुलझाने तथा सहकारी संघवाद की भावना से आगे बढ़ने की सलाह दी। मामले की अगली सुनवाई 14 दिसंबर 2026 को होगी।

क्या है पूरा मामला?

यह मामला तमिलनाडु में जवाहर नवोदय विद्यालय स्थापित करने से जुड़ा है। तमिलनाडु सरकार ने राज्य में इन स्कूलों की स्थापना को लेकर आपत्ति जताई है और इस मामले में मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है।

सुप्रीम कोर्ट ने पहले 15 दिसंबर 2025 को तमिलनाडु सरकार को राज्य के प्रत्येक जिले में नवोदय विद्यालय स्थापित करने के लिए जमीन की पहचान करने का निर्देश दिया था। गुरुवार की सुनवाई में अदालत ने इस निर्देश को वापस लेने से इनकार कर दिया, हालांकि राज्य को जमीन चिन्हित करने के लिए तीन महीने का अतिरिक्त समय दिया गया।

भाषा नीति पर तमिलनाडु की आपत्ति

तमिलनाडु सरकार की मुख्य चिंताओं में से एक नवोदय विद्यालयों की भाषा व्यवस्था है। राज्य में लंबे समय से दो-भाषा नीति का पालन किया जाता है, जबकि नवोदय विद्यालयों में तीन-भाषा व्यवस्था लागू है।

राज्य की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता जयदीप गुप्ता ने अदालत में दलील दी कि राज्य की आपत्ति स्कूलों या हिंदी पढ़ाए जाने के खिलाफ नहीं है, बल्कि उस भाषा नीति से जुड़ी है जिसे नवोदय विद्यालयों के साथ लागू किया जाता है। राज्य का कहना है कि मौजूदा व्यवस्था तमिलनाडु की भाषा नीति और राज्य के संबंधित कानूनों के साथ तालमेल नहीं बैठाती।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

न्यायमूर्ति बीवी नागरत्ना और न्यायमूर्ति ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की पीठ ने सुनवाई के दौरान भाषा के मुद्दे पर राज्य और केंद्र के बीच संवाद की आवश्यकता पर जोर दिया।

पीठ ने कहा कि भाषा संबंधी मतभेदों को बातचीत के जरिए सुलझाया जा सकता है और राज्य सरकार को केंद्र के साथ इस विषय पर चर्चा करनी चाहिए। अदालत ने इसे सहकारी संघवाद की भावना के अनुरूप आगे बढ़ाने पर जोर दिया।

अदालत ने यह भी संकेत दिया कि केंद्र द्वारा संचालित किसी शैक्षणिक संस्थान की मौजूदगी को राज्य की मौजूदा शिक्षा व्यवस्था के लिए खतरे के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।

केंद्र का भाषा व्यवस्था पर क्या कहना है?

इससे पहले मार्च 2026 में केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष कहा था कि गैर-हिंदी भाषी क्षेत्रों में जवाहर नवोदय विद्यालयों में शिक्षा का माध्यम मुख्य रूप से क्षेत्रीय भाषा या अंग्रेजी होता है। केंद्र की यह दलील तमिलनाडु की उस आशंका के जवाब में सामने आई थी कि नवोदय विद्यालयों की भाषा व्यवस्था राज्य में हिंदी को बढ़ावा देने का माध्यम बन सकती है।

इस तरह मामले में केवल स्कूलों की स्थापना ही नहीं, बल्कि भाषा नीति, राज्य की शिक्षा व्यवस्था और केंद्र-राज्य अधिकारों से जुड़े सवाल भी महत्वपूर्ण हो गए हैं।

तमिलनाडु की दलील क्या है?

तमिलनाडु सरकार ने अदालत में कहा है कि शिक्षा संविधान की समवर्ती सूची में आती है, लेकिन किसी केंद्रीय योजना को राज्य में लागू करते समय राज्य के कानूनों, नीतियों, प्रशासनिक परिस्थितियों और वित्तीय क्षमता को भी ध्यान में रखना चाहिए।

राज्य ने यह भी तर्क दिया है कि यदि नवोदय विद्यालय योजना राज्य की मौजूदा भाषा नीति से टकराती है, तो उसे उसी रूप में लागू करना कानूनी और प्रशासनिक कठिनाइयां पैदा कर सकता है।

नवोदय विद्यालय क्या हैं?

जवाहर नवोदय विद्यालय केंद्र सरकार के शिक्षा मंत्रालय के अधीन नवोदय विद्यालय समिति द्वारा संचालित सह-शैक्षणिक, आवासीय विद्यालय हैं। इनका उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों सहित विभिन्न क्षेत्रों के प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आवासीय शिक्षा उपलब्ध कराना है।

तमिलनाडु वर्तमान में ऐसा राज्य है जहां एक भी जवाहर नवोदय विद्यालय नहीं है। राज्य का इन स्कूलों को लेकर विरोध मुख्य रूप से भाषा नीति और राज्य की शिक्षा व्यवस्था से जुड़े मुद्दों पर केंद्रित रहा है।

आगे क्या होगा?

सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल तमिलनाडु को तीन महीने में प्रत्येक जिले में उपयुक्त जमीन की पहचान करने का समय दिया है। साथ ही, केंद्र और राज्य के अधिकारियों को भाषा नीति समेत विवाद के अन्य पहलुओं पर आगे बातचीत करने को कहा गया है।

अब इस मामले में अगली महत्वपूर्ण सुनवाई 14 दिसंबर 2026 को होगी। उस समय अदालत के सामने केंद्र और तमिलनाडु के बीच हुई बातचीत तथा जमीन की पहचान से संबंधित स्थिति रखी जा सकती है।

फिलहाल विवाद का केंद्र नवोदय विद्यालयों की स्थापना, तमिलनाडु की दो-भाषा नीति और केंद्र की तीन-भाषा व्यवस्था के बीच तालमेल का सवाल है। सुप्रीम कोर्ट ने तत्काल टकराव के बजाय केंद्र और राज्य के बीच संवाद को आगे बढ़ाने पर जोर दिया है।