कोलंबो, 18 सितंबर 2026: श्रीलंका लंबे समय से जारी गर्म और शुष्क मौसम की चपेट में है। पानी के प्राकृतिक स्रोतों के सूखने से वन्यजीवों के लिए मुश्किलें बढ़ गई हैं। देश के प्रमुख वन्यजीव क्षेत्र Yala National Park में जानवरों की पानी की जरूरत पूरी करने के लिए प्रशासन को आपात व्यवस्था करनी पड़ रही है। Yala में कई प्राकृतिक जलस्रोत और जलाशय कम होते-होते सूख गए हैं। इससे हाथी, हिरण, तेंदुए और अन्य वन्यजीवों को पानी की तलाश में लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। अधिकारियों ने जानवरों के लिए पार्क के भीतर मौजूद जलकुंडों और तालाबों में बाहर से पानी पहुंचाना शुरू किया है। वन्यजीव विभाग के अनुसार, Block 1 में कम से कम 20 water holes में प्रतिदिन पानी पहुंचाया जा रहा है। चार solar-powered pumps के जरिए भी पानी उपलब्ध कराया जा रहा है। इसके अतिरिक्त पानी के टैंकरों का इस्तेमाल किया जा रहा है। Yala में स्थिति इतनी गंभीर हो गई कि अधिकारियों ने पानी की नियमित आपूर्ति के लिए व्यापक व्यवस्था की है। करीब 200,000 लीटर पानी प्रतिदिन bowsers के जरिए प्राकृतिक और कृत्रिम तालाबों तक पहुंचाया जा रहा है। Menik Ganga क्षेत्र से solar-powered pumping systems के माध्यम से भी पानी पार्क के भीतर भेजा जा रहा है। इसके साथ ही कुछ पुराने ponds और water holes की मरम्मत तथा नए जलकुंड बनाने का काम भी किया जा रहा है, ताकि सूखे के दौरान वन्यजीवों के लिए वैकल्पिक जलस्रोत बनाए जा सकें। लगातार सूखे और गर्मी के बीच Sri Lanka के Wildlife and Forest Conservation अधिकारियों ने Yala National Park के Blocks 1 और 2 को 14 सितंबर से 15 अक्टूबर 2026 तक पर्यटकों के लिए बंद कर दिया है। इसका उद्देश्य पानी और भोजन की तलाश में घूम रहे जानवरों को मानवीय गतिविधियों से कम से कम परेशान करना है। अधिकारियों ने यह भी संकेत दिया है कि यदि गर्मी और शुष्क परिस्थितियां और गंभीर होती हैं, तो अन्य राष्ट्रीय उद्यानों में भी अस्थायी प्रतिबंध लगाए जा सकते हैं। पानी की कमी केवल Yala तक सीमित नहीं है। Wilpattu, Kumana, Bundala, Kaudulla और Maduru Oya जैसे अन्य संरक्षित क्षेत्रों में भी जरूरत के अनुसार पानी पहुंचाने की व्यवस्था की गई है। कुछ स्थानों पर solar-powered pumps और water bowsers का इस्तेमाल किया जा रहा है। उत्तरी श्रीलंका के Delft Island पर भी करीब 400 free-roaming wild ponies के लिए पानी की कमी सामने आई है, जिसके बाद उन्हें आपात जल आपूर्ति की जरूरत पड़ी। सूखे का असर जलीय जीवन पर भी दिखाई दे रहा है। सितंबर की एक रिपोर्ट के अनुसार, उत्तर-पूर्वी श्रीलंका के Mullaithivu lagoon में हजारों छोटी मछलियां मृत पाई गईं। अधिकारियों ने इसकी वजह समुद्री और मीठे पानी के मिश्रण से जुड़ी परिस्थितियों को बताया। यह घटना Yala में वन्यजीवों की पानी की कमी से अलग है, लेकिन यह दिखाती है कि लंबे समय तक चल रही जल-संबंधी समस्या का प्रभाव स्थलीय और जलीय दोनों ecosystems पर पड़ रहा है। श्रीलंका में इस समय चल रहा सूखा El Niño से जुड़ी असामान्य गर्म और शुष्क परिस्थितियों के बीच आया है। Reuters के अनुसार, कई क्षेत्रों में कुएं, नदियां और जलाशय तेजी से सूखे हैं तथा ग्रामीण आबादी को भी पेयजल की कमी का सामना करना पड़ रहा है। हालांकि किसी एक मौसम घटना से किसी विशेष वन्यजीव की स्थिति को पूरी तरह समझना संभव नहीं है। वर्षा की मात्रा, स्थानीय जलस्रोत, तापमान और मानव गतिविधियां भी संकट की गंभीरता को प्रभावित करती हैं। विशेषज्ञों और वन्यजीव अधिकारियों के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक ओर जानवरों को तत्काल पानी उपलब्ध कराना और दूसरी ओर सीमित जलस्रोतों के आसपास वन्यजीवों की अत्यधिक भीड़ से पैदा होने वाले जोखिमों को नियंत्रित करना। सूखे के दौरान पानी के छोटे स्रोत वन्यजीवों के लिए जीवनरेखा बन जाते हैं, इसलिए उनका सुरक्षित और व्यवस्थित प्रबंधन बेहद महत्वपूर्ण हो गया है। निष्कर्ष: श्रीलंका का मौजूदा सूखा वन्यजीव संरक्षण के लिए गंभीर चुनौती बन चुका है। Yala में पानी की नियमित आपूर्ति, पर्यटक क्षेत्रों को अस्थायी रूप से बंद करना और अन्य राष्ट्रीय उद्यानों में जल व्यवस्था बढ़ाना इस संकट से निपटने के तत्काल उपाय हैं।Yala में प्राकृतिक जलस्रोत सूखे
रोज करीब 2 लाख लीटर पानी की आपूर्ति
Yala के दो हिस्से पर्यटकों के लिए बंद
अन्य राष्ट्रीय उद्यान भी प्रभावित
हजारों मछलियों की मौत की भी रिपोर्ट
सूखे और El Niño की पृष्ठभूमि
संरक्षण के लिए बढ़ी चुनौती
Sri Lanka में सूखे से वन्यजीवों पर बढ़ा पानी का संकट, Yala में रोज पहुंचाया जा रहा पानी






