18 सितंबर 2026: प्रशांत महासागर में समुद्र की सतह का असामान्य रूप से बढ़ता तापमान इस साल के El Niño को बेहद शक्तिशाली बना रहा है। विश्व मौसम विज्ञान संगठन (WMO) के अनुसार, यह घटना आने वाले महीनों में और मजबूत हो सकती है तथा 2026 के अंत तक बहुत मजबूत स्तर पर पहुंचने की संभावना है। El Niño के केंद्र माने जाने वाले केंद्रीय और पूर्वी भूमध्यरेखीय Pacific में समुद्र की सतह का तापमान सामान्य से काफी ऊपर पहुंच चुका है। WMO के अनुसार, जुलाई 2026 में Niño 3.4 क्षेत्र में तापमान सामान्य से करीब 2°C ऊपर था, जबकि अगस्त के दौरान कुछ साप्ताहिक आंकड़े लगभग 2.2 से 2.6°C अधिक रहे। अमेरिकी NOAA के 10 सितंबर के आकलन में भी El Niño के मजबूत होने की पुष्टि की गई। NOAA ने उत्तरी गोलार्ध की शरद और सर्दियों के दौरान बहुत मजबूत El Niño बनने की संभावना 90% से अधिक बताई थी। El Niño का प्रभाव केवल Pacific Ocean तक सीमित नहीं रहता। यह वायुमंडलीय परिसंचरण में बदलाव के जरिए दुनिया के कई हिस्सों में तापमान और बारिश के पैटर्न को प्रभावित कर सकता है। Asia-Pacific क्षेत्र में विशेषज्ञों ने अत्यधिक गर्मी, कम बारिश, सूखे और कुछ क्षेत्रों में भारी वर्षा या बाढ़ के बढ़े जोखिम को लेकर तैयारी तेज की है। हालांकि किसी क्षेत्र में वास्तविक असर स्थानीय मौसम प्रणालियों और Indian Ocean Dipole जैसे अन्य climate factors पर भी निर्भर करेगा। मौसम में बड़े बदलाव का सीधा असर कृषि पर पड़ सकता है। बारिश में कमी से फसलों और जल संसाधनों पर दबाव बढ़ सकता है, जबकि अचानक भारी बारिश और बाढ़ से खेतों, फसलों और बुनियादी ढांचे को नुकसान हो सकता है। UN एजेंसियों के Asia-Pacific आकलन के मुताबिक, मजबूत El Niño के साथ पहले से मौजूद खाद्य, ईंधन और उर्वरक संबंधी दबाव मिलकर 2026 के अंत और 2027 में खाद्य असुरक्षा का जोखिम बढ़ा सकते हैं। भारत में El Niño का प्रभाव मानसून और क्षेत्रीय वर्षा वितरण के जरिए महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि El Niño की तीव्रता अकेले यह तय नहीं करती कि भारत में बारिश कैसी रहेगी। Indian Ocean Dipole और अन्य क्षेत्रीय परिस्थितियां परिणाम को बदल सकती हैं। सितंबर 2026 की रिपोर्टों में भारत के कई हिस्सों में वर्षा की असमानता और कुछ जिलों में सूखे जैसी परिस्थितियों की बात सामने आई है। इसलिए विशेषज्ञ स्थानीय मौसम पूर्वानुमानों और जल-संसाधन संकेतकों पर लगातार निगरानी की सलाह दे रहे हैं। WMO के नवीनतम पूर्वानुमान में El Niño के फरवरी 2027 तक बने रहने की लगभग 100% संभावना बताई गई है। संगठन ने कहा है कि मजबूत El Niño वैश्विक तापमान, बारिश और वायुमंडलीय परिसंचरण में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकता है। हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि किसी El Niño को “बहुत मजबूत” या “रिकॉर्ड स्तर” का होना अपने-आप किसी खास देश में सबसे गंभीर मौसम की गारंटी नहीं देता। स्थानीय परिस्थितियां और अन्य climate drivers भी उसके प्रभाव को कम या बढ़ा सकते हैं। El Niño की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसके विकसित होने के संकेत महीनों पहले मिल सकते हैं। इसी वजह से WMO और राष्ट्रीय मौसम एजेंसियां early-warning systems, कृषि योजना, जल प्रबंधन और आपदा तैयारी को मजबूत करने पर जोर दे रही हैं। महत्वपूर्ण बात: वर्तमान वैज्ञानिक आकलन El Niño को असाधारण रूप से मजबूत घटना के रूप में देख रहे हैं, लेकिन इसके प्रभाव हर देश और क्षेत्र में एक जैसे नहीं होंगे। स्थानीय मौसम विभागों के पूर्वानुमान किसी क्षेत्र के लिए अधिक उपयोगी मार्गदर्शन प्रदान करेंगे।Pacific Ocean में असाधारण गर्मी
Asia में बदल सकता है मौसम का पैटर्न
खाद्य सुरक्षा पर भी चिंता
भारत पर भी नजर
2027 तक रह सकता है असर
वैज्ञानिकों की प्राथमिकता—पहले से तैयारी
दुनिया के सबसे शक्तिशाली El Niño की आशंका, Asia में गर्मी, सूखे और बाढ़ का खतरा






