लंदन। वैश्विक समुद्री व्यापार में जहाज रजिस्ट्रियों के बीच प्रतिस्पर्धा का संतुलन तेजी से बदल रहा है। ताजा Clarksons Research आंकड़ों के अनुसार, लाइबेरिया ने ग्रॉस टन भार के मामले में अपनी बढ़त मजबूत कर ली है, जबकि मार्शल आइलैंड्स ने पनामा को पीछे छोड़कर दूसरा स्थान हासिल कर लिया है। पनामा अब तीसरे स्थान पर है। 1 सितंबर 2026 के Clarksons आंकड़ों के मुताबिक लाइबेरिया के झंडे के तहत पंजीकृत जहाजों का कुल आकार करीब 317.4 मिलियन ग्रॉस टन (GT) पहुंच गया है। इसके साथ लाइबेरिया वैश्विक जहाज रजिस्ट्रियों में पहले स्थान पर है। मार्शल आइलैंड्स करीब 212.7 मिलियन GT के साथ दूसरे और पनामा करीब 196 मिलियन GT के साथ तीसरे स्थान पर है। यानी पनामा और दूसरे स्थान के बीच का अंतर अब काफी स्पष्ट हो गया है। पनामा लंबे समय तक दुनिया की सबसे बड़ी जहाज रजिस्ट्री रहा है। लेकिन पिछले कुछ वर्षों में समुद्री उद्योग में इसका दबदबा धीरे-धीरे कम हुआ है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, लाइबेरिया ने 2023 में पनामा को पीछे छोड़ा था और अब मार्शल आइलैंड्स भी उससे आगे निकल चुका है। हालांकि जहाजों की कुल संख्या के मामले में तस्वीर अलग है। नवीनतम आंकड़ों में पनामा के पास लगभग 7,516 जहाज हैं, जो लाइबेरिया के 6,167 और मार्शल आइलैंड्स के 4,808 जहाजों से ज्यादा हैं। इससे स्पष्ट होता है कि रैंकिंग केवल जहाजों की संख्या से नहीं, बल्कि उनके कुल ग्रॉस टन भार से भी प्रभावित होती है। Clarksons के आंकड़ों के अनुसार, 2025 के अंत में पनामा के झंडे वाले बेड़े का आकार करीब 230.5 मिलियन GT था, जो 2026 में घटकर लगभग 196 मिलियन GT रह गया। दूसरी ओर, लाइबेरिया और मार्शल आइलैंड्स दोनों के बेड़े में इस अवधि में वृद्धि दर्ज की गई। पनामा की समुद्री प्राधिकरण ने रजिस्टर की गुणवत्ता पर ज्यादा ध्यान देने की नीति अपनाई है। इसके तहत प्रतिबंधों का सामना कर रहे जहाजों, खराब प्रदर्शन वाले जहाजों और कुछ पुराने या उच्च जोखिम वाले जहाजों को रजिस्टर से हटाने की प्रक्रिया तेज की गई है। पनामा का कहना है कि वह केवल जहाजों की संख्या बढ़ाने के बजाय सुरक्षा और बेहतर गुणवत्ता वाले बेड़े को प्राथमिकता दे रहा है। पनामा के जहाज रजिस्टर में बदलाव के पीछे अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों का पालन भी एक महत्वपूर्ण कारक बताया जा रहा है। रिपोर्टों के मुताबिक, अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़े कुछ जहाजों को रजिस्टर से हटाया गया है। इसके अलावा कुछ पनामा-झंडे वाले जहाजों को चीन के बंदरगाहों पर जांच और हिरासत का सामना करना पड़ा। समुद्री उद्योग के कुछ विशेषज्ञों ने इन घटनाओं को जहाज मालिकों के रजिस्ट्रियां बदलने के फैसलों से जोड़कर देखा है। हालांकि इन कारणों की भूमिका पर उद्योग में अलग-अलग आकलन मौजूद हैं। पनामा के बेड़े में कमी के दौरान मार्शल आइलैंड्स की रजिस्ट्री में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। Clarksons के अनुसार, 2025 के अंत से अगस्त/सितंबर 2026 के बीच मार्शल आइलैंड्स के पंजीकृत बेड़े में लगभग 7–9 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जबकि पनामा के बेड़े में स्पष्ट गिरावट देखी गई। अलग-अलग रिपोर्टों में डेटा कटऑफ के कारण वास्तविक आंकड़ों में थोड़ा अंतर है। इस बदलाव से संकेत मिलता है कि बड़े जहाज मालिकों के लिए झंडा चुनने का फैसला केवल रजिस्ट्रेशन की सुविधा पर निर्भर नहीं है। सुरक्षा मानक, नियामकीय वातावरण, तकनीकी सेवाएं, बंदरगाहों पर जांच का रिकॉर्ड और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों से जुड़े जोखिम भी महत्वपूर्ण होते जा रहे हैं। किसी जहाज का रजिस्ट्रेशन उस देश या क्षेत्र से जुड़ा होता है जिसका झंडा वह जहाज समुद्र में इस्तेमाल करता है। इसे Flag State व्यवस्था कहा जाता है। जहाज की सुरक्षा, नियामकीय अनुपालन और कई प्रशासनिक जिम्मेदारियों में इस रजिस्ट्रेशन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। दुनिया के बड़े व्यापारिक जहाज अक्सर उस देश के स्वामित्व में नहीं होते जिसके झंडे के नीचे वे चलते हैं। संयुक्त राष्ट्र व्यापार एवं विकास संगठन (UNCTAD) के अनुसार, जहाजों का स्वामित्व और उनका रजिस्ट्रेशन अलग-अलग देशों में केंद्रित हो सकता है। 2026 की शुरुआत में लाइबेरिया, पनामा और मार्शल आइलैंड्स दुनिया की प्रमुख जहाज रजिस्ट्रियों में शामिल थे। इस खबर में इस्तेमाल ग्रॉस टन (GT) जहाज के अंदर उपलब्ध कार्गो वजन का माप नहीं है। यह जहाज के कुल आंतरिक आकार से संबंधित माप है। जबकि Deadweight Tonnage (DWT) जहाज की माल, ईंधन और अन्य भार ले जाने की क्षमता को दर्शाता है। इसी कारण किसी रजिस्ट्री के पास जहाजों की संख्या ज्यादा होने के बावजूद उसका कुल GT किसी दूसरी रजिस्ट्री से कम हो सकता है। UNCTAD भी रजिस्ट्रियों की तुलना में GT और जहाजों की वास्तविक वहन क्षमता के लिए DWT को अलग-अलग माप के रूप में इस्तेमाल करता है। वैश्विक रजिस्ट्रियों की शीर्ष सूची में बदलाव केवल पहले तीन स्थानों तक सीमित नहीं है। नवीनतम आंकड़ों में सिंगापुर करीब 141.1 मिलियन GT के साथ चौथे और हांगकांग करीब 111.6 मिलियन GT के साथ पांचवें स्थान पर है। इससे पता चलता है कि समुद्री रजिस्ट्रियों के बीच प्रतिस्पर्धा कई बड़े वैश्विक केंद्रों के बीच जारी है। जहाज रजिस्ट्रियों में बदलाव सीधे तौर पर वैश्विक व्यापार के रुकने का संकेत नहीं है। लेकिन यह समुद्री उद्योग में बदलती प्राथमिकताओं को जरूर दिखाता है। बड़े जहाज मालिक अब रजिस्ट्रेशन चुनते समय नियामकीय अनुपालन, जहाज की उम्र, सुरक्षा रिकॉर्ड, तकनीकी सहायता और अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों जैसे पहलुओं पर भी ध्यान दे रहे हैं। लाइबेरिया और मार्शल आइलैंड्स की बढ़त तथा पनामा के रजिस्टर में कमी से यह भी संकेत मिलता है कि आने वाले समय में प्रमुख जहाज रजिस्ट्रियों के बीच प्रतिस्पर्धा केवल अधिक जहाज दर्ज करने तक सीमित नहीं रहेगी। बेड़े की गुणवत्ता और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुरूप संचालन भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। पनामा के लिए चुनौती यह होगी कि वह अपने रजिस्टर की गुणवत्ता सुधारने की मौजूदा नीति के साथ-साथ बड़े और विश्वसनीय जहाज मालिकों को आकर्षित करने की क्षमता बनाए रखे। वहीं लाइबेरिया और मार्शल आइलैंड्स के सामने अपने बढ़ते बेड़े के साथ सुरक्षा और नियामकीय मानकों को मजबूत बनाए रखने की जिम्मेदारी होगी। इस तरह वैश्विक समुद्री रजिस्ट्रियों की नई तस्वीर में लाइबेरिया शीर्ष पर, मार्शल आइलैंड्स दूसरे और पनामा तीसरे स्थान पर दिखाई दे रहा है। हालांकि जहाजों की संख्या में पनामा अभी भी आगे है, लेकिन कुल ग्रॉस टन भार के आधार पर उसकी स्थिति में बड़ा बदलाव आया है। कॉपीराइट नोट: यह समाचार उपलब्ध स्रोतों के तथ्यों को आधार बनाकर मौलिक शब्दों और स्वतंत्र वाक्य-विन्यास में तैयार किया गया है। किसी स्रोत की सामग्री को लाइन-दर-लाइन कॉपी नहीं किया गया है। फोटो, वीडियो, ग्राफिक्स और अन्य मीडिया के अधिकार अलग हो सकते हैं।लाइबेरिया की बढ़त और मजबूत
कभी पनामा था सबसे बड़ा
पनामा के रजिस्टर में क्यों आई गिरावट?
अमेरिकी प्रतिबंधों का भी असर
मार्शल आइलैंड्स को मिला फायदा
जहाज रजिस्ट्रियां क्यों महत्वपूर्ण हैं?
ग्रॉस टन और जहाजों की संख्या में अंतर समझना जरूरी
सिंगापुर और हांगकांग भी प्रमुख खिलाड़ी
वैश्विक व्यापार पर इसका क्या मतलब?
आगे की तस्वीर
पनामा के बाद वैश्विक समुद्री व्यापार में रजिस्ट्रियों की नई प्रतिस्पर्धा, लाइबेरिया सबसे आगे






