वैज्ञानिकों ने मानव मस्तिष्क के एक बेहद महत्वपूर्ण हिस्से में मौजूद कोशिकाओं की जीन गतिविधि का अब तक के सबसे बड़े पैमाने पर अध्ययन किया है। शोधकर्ताओं ने डॉर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स का एक विस्तृत सिंगल-सेल जीन-एक्सप्रेशन मैप तैयार किया है। यह हिस्सा योजना बनाने, निर्णय लेने, ध्यान केंद्रित करने और कई जटिल मानसिक गतिविधियों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इस बड़े शोध प्रयास में वैज्ञानिकों ने करीब 1,500 लोगों के मस्तिष्क ऊतक का अध्ययन किया। इनमें शिशुओं से लेकर 100 वर्ष से अधिक उम्र के लोग शामिल थे। शोधकर्ताओं ने 6.3 मिलियन से अधिक व्यक्तिगत मस्तिष्क कोशिकाओं के जीन-गतिविधि संबंधी डेटा का विश्लेषण किया। इस तरह का अध्ययन यह समझने में मदद करता है कि अलग-अलग प्रकार की कोशिकाओं में कौन-से जीन सक्रिय हैं और उम्र बढ़ने या किसी बीमारी की स्थिति में उनकी गतिविधि किस तरह बदलती है। प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स मस्तिष्क के सामने की तरफ स्थित क्षेत्र है। इसका डॉर्सोलैटरल हिस्सा उच्च स्तर की मानसिक गतिविधियों से जुड़ा है। इसमें कार्य-स्मृति, योजना बनाना, ध्यान और निर्णय लेने जैसी प्रक्रियाएं शामिल हैं। वैज्ञानिकों के लिए यह क्षेत्र इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उम्र बढ़ने के साथ यहां आणविक और कोशिकीय स्तर पर कई बदलाव दिखाई दे सकते हैं। नए शोध ने इन बदलावों को अलग-अलग कोशिका प्रकारों के स्तर पर देखने का अवसर दिया है। शोध में केवल स्वस्थ मस्तिष्कों को ही नहीं देखा गया, बल्कि अध्ययन में अल्जाइमर रोग, पार्किंसन रोग, लेवी बॉडी डिजीज, वैस्कुलर डिमेंशिया, फ्रंटोटेम्पोरल डिमेंशिया और अन्य मस्तिष्क संबंधी विकारों से जुड़े दान किए गए मस्तिष्क नमूने भी शामिल थे। वैज्ञानिकों ने अलग-अलग बीमारियों और सामान्य मस्तिष्क स्थितियों में जीन गतिविधि की तुलना की। इससे यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि किसी बीमारी से जुड़े आणविक बदलाव किन कोशिका प्रकारों में दिखाई देते हैं। हालांकि, यह कहना अभी सही नहीं होगा कि इस मैप ने अल्जाइमर या पार्किंसन का इलाज खोज लिया है। यह शोध मुख्य रूप से बीमारी के आणविक आधार को बेहतर तरीके से समझने के लिए एक संदर्भ-मानचित्र उपलब्ध कराता है। मस्तिष्क में केवल न्यूरॉन ही महत्वपूर्ण नहीं होते। वैज्ञानिकों ने न्यूरॉन्स के साथ-साथ ग्लियल, प्रतिरक्षा और रक्तवाहिका से संबंधित कोशिकाओं में भी जीन गतिविधि का अध्ययन किया। शोध से पता चलता है कि उम्र बढ़ने के दौरान सभी कोशिकाएं एक जैसे तरीके से नहीं बदलतीं। कुछ कोशिका समूह अपेक्षाकृत स्थिर रह सकते हैं, जबकि कुछ में प्रतिरक्षा गतिविधि, तनाव प्रतिक्रिया और शरीर की जैविक घड़ी से जुड़े आणविक बदलाव अधिक दिखाई देते हैं। अलग अध्ययन में स्वस्थ लोगों के डॉर्सोलैटरल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की उम्र के साथ होने वाली जीन गतिविधि का विश्लेषण किया गया। वैज्ञानिकों ने मोटे तौर पर तीन प्रमुख चरणों की पहचान की—शुरुआती जीवन में तेज आणविक बदलाव, वयस्क जीवन के मध्य चरण में अपेक्षाकृत स्थिरता और करीब 65 वर्ष के बाद फिर से कई आणविक कार्यक्रमों में बदलाव। इससे वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि सामान्य उम्र बढ़ने और बीमारी से जुड़े बदलावों के बीच अंतर कैसे किया जाए। इस तरह का विस्तृत डेटा भविष्य के शोध के लिए एक संदर्भ प्रणाली की तरह काम कर सकता है। यदि किसी मरीज या बीमारी से जुड़े नमूने में किसी खास कोशिका प्रकार के जीन व्यवहार में बदलाव दिखाई देता है, तो वैज्ञानिक उसकी तुलना इस बड़े डेटाबेस से कर सकते हैं। इसके अलावा, शोधकर्ताओं ने आनुवंशिक जोखिम से जुड़े बदलावों को विशिष्ट कोशिका प्रकारों और जीन गतिविधि से जोड़ने की कोशिश भी की है। इससे भविष्य में बीमारी के संभावित आणविक मार्गों और उपचार के लिए संभावित लक्ष्यों की पहचान में मदद मिल सकती है। शोध की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इससे वैज्ञानिकों को मानव मस्तिष्क को पहले से कहीं ज्यादा सूक्ष्म स्तर पर देखने का अवसर मिला है। लेकिन इस डेटा से सीधे कोई नई दवा या इलाज तैयार नहीं हो जाता। अल्जाइमर, पार्किंसन और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियां बेहद जटिल हैं। इनके विकास में आनुवंशिक, कोशिकीय, पर्यावरणीय और उम्र से जुड़े कई कारक भूमिका निभाते हैं। इसलिए नए जीन मैप को बीमारी की पूरी व्याख्या के बजाय एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक संसाधन के रूप में देखना अधिक उचित है। इस शोध की खासियत इसका पैमाना भी है। वैज्ञानिकों ने इतने बड़े समूह से प्राप्त कोशिकीय और आनुवंशिक जानकारी को एक साथ जोड़कर ऐसा संसाधन तैयार किया है, जिसका इस्तेमाल आगे अलग-अलग मस्तिष्क रोगों पर शोध करने में किया जा सकता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि अभी तस्वीर पूरी नहीं हुई है। मस्तिष्क के अन्य हिस्सों में भी इसी तरह के विस्तृत अध्ययन की जरूरत होगी, क्योंकि केवल प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स का अध्ययन पूरे मस्तिष्क की कार्यप्रणाली या बीमारी को पूरी तरह नहीं समझा सकता। मानव प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स का यह विस्तृत जीन मैप वैज्ञानिकों को यह समझने का नया तरीका देता है कि अलग-अलग मस्तिष्क कोशिकाओं में जीन गतिविधि उम्र और बीमारी के साथ कैसे बदलती है। लाखों कोशिकाओं और हजारों दाताओं से मिले आंकड़ों के कारण यह शोध अल्जाइमर, पार्किंसन और अन्य न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के आणविक आधार पर भविष्य के अध्ययन के लिए महत्वपूर्ण आधार बन सकता है।लाखों मस्तिष्क कोशिकाओं का किया गया अध्ययन
प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
अल्जाइमर और पार्किंसन से कैसे जुड़ा है शोध?
अलग-अलग कोशिकाओं की अलग भूमिका सामने आई
उम्र बढ़ने के तीन महत्वपूर्ण चरण
जीन मैप से भविष्य में क्या फायदा हो सकता है?
यह शोध इलाज नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक आधार है
आगे की रिसर्च के लिए बड़ा डेटाबेस
निष्कर्ष
इंसानी दिमाग के अहम हिस्से का बना सबसे विस्तृत जीन मैप, अल्जाइमर-पार्किंसन की समझ में मिल सकती है नई दिशा






