बेलग्रेड, 25 अक्टूबर 2026। यूरोप के बाल्कन क्षेत्र के देश सर्बिया में रविवार को संसदीय चुनाव हो रहा है। इस चुनाव में लंबे समय से सत्ता में प्रभाव रखने वाली सर्बियाई प्रोग्रेसिव पार्टी (SNS) और छात्र आंदोलन से जुड़े उम्मीदवारों के बीच मुकाबला देश की राजनीति के लिए अहम माना जा रहा है। भ्रष्टाचार के आरोपों, सरकारी संस्थाओं की जवाबदेही और लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़े सवालों के बीच यह चुनाव राजनीतिक बदलाव की मांग को परखने का अवसर बन गया है। सर्बिया में छात्र आंदोलन की शुरुआत नवंबर 2024 में नोवी साद रेलवे स्टेशन पर एक निर्माणाधीन या नवीनीकृत हिस्से की छतरी गिरने की घटना के बाद हुई थी। इस हादसे में 16 लोगों की मौत हो गई थी। घटना के बाद छात्रों ने दुर्घटना की निष्पक्ष जांच, जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई और सार्वजनिक परियोजनाओं में पारदर्शिता की मांग की। धीरे-धीरे यह आंदोलन विश्वविद्यालय परिसरों से निकलकर देश के विभिन्न शहरों तक पहुंच गया। प्रदर्शनकारियों ने भ्रष्टाचार के आरोपों और सरकारी संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। आंदोलन से जुड़े लोगों का कहना है कि हादसे ने सार्वजनिक सुरक्षा और जवाबदेही से जुड़ी गंभीर चिंताओं को सामने ला दिया। हालांकि, सरकार ने भ्रष्टाचार और अनियमितताओं से जुड़े आरोपों को खारिज किया है। इस बार छात्र आंदोलन ने केवल विरोध प्रदर्शन तक सीमित रहने के बजाय चुनावी राजनीति में भी भागीदारी की है। आंदोलन से जुड़ी 'स्टूडेंट लिस्ट' में 250 उम्मीदवार शामिल हैं। इस सूची में विश्वविद्यालय के शिक्षकों, पेशेवरों, कलाकारों और किसानों सहित विभिन्न क्षेत्रों के लोगों को जगह दी गई है। इनमें कई ऐसे उम्मीदवार हैं जिन्हें पहले चुनावी राजनीति का अनुभव नहीं रहा है। छात्र समर्थित उम्मीदवारों का प्रमुख एजेंडा भ्रष्टाचार पर नियंत्रण, शिक्षा व्यवस्था में सुधार, सार्वजनिक संस्थाओं की जवाबदेही और कानून के शासन को मजबूत करना है। आंदोलन ने पारंपरिक राजनीतिक नेतृत्व से अलग सामूहिक भागीदारी पर जोर दिया है। हालांकि, सत्ता मिलने की स्थिति में इन प्रस्तावों को लागू करना और प्रशासनिक स्तर पर बदलाव लाना उसके सामने बड़ी चुनौती होगी। सर्बिया की राजनीति में अलेक्जेंडर वुचिच लंबे समय से प्रभावशाली भूमिका निभाते रहे हैं। उनकी पार्टी 2012 से सत्ता में है और उन्होंने प्रधानमंत्री तथा राष्ट्रपति के रूप में देश की राजनीति को प्रभावित किया है। सितंबर 2026 में राष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के बाद वुचिच इस चुनाव में प्रधानमंत्री पद के लिए अपनी पार्टी के अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं। वुचिच के समर्थक उनके कार्यकाल में हुए बुनियादी ढांचे के विकास, सड़कों और रेलवे परियोजनाओं तथा आर्थिक प्रगति को प्रमुख उपलब्धियों के रूप में पेश करते हैं। दूसरी ओर, उनके आलोचक भ्रष्टाचार, मीडिया की स्वतंत्रता और सरकारी संस्थाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठाते रहे हैं। सरकार ने अपने ऊपर लगाए गए भ्रष्टाचार और दमन के आरोपों को खारिज किया है। इस चुनाव में भ्रष्टाचार, शिक्षा, रोजगार, सार्वजनिक सेवाओं और लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता जैसे मुद्दे प्रमुख हैं। इसके साथ ही, मतदान प्रक्रिया की निष्पक्षता पर भी नजर रखी जा रही है। कुछ नागरिक संगठनों और पर्यवेक्षकों ने चुनावी माहौल तथा संभावित अनियमितताओं को लेकर चिंता जताई है, जबकि सरकार का कहना है कि चुनावी व्यवस्था में सुधार के कदम उठाए गए हैं। विदेश नीति भी महत्वपूर्ण विषय है। सर्बिया के चीन और रूस के साथ मजबूत संबंध हैं, वहीं वह यूरोपीय संघ में शामिल होने की दिशा में भी प्रयास करता रहा है। छात्र आंदोलन ने घरेलू सुधारों पर अधिक ध्यान दिया है, लेकिन उसकी विदेश नीति से संबंधित योजनाओं को लेकर कुछ सवाल अभी स्पष्ट नहीं हैं। 25 अक्टूबर को होने वाले इस चुनाव के परिणाम से यह स्पष्ट होगा कि छात्र आंदोलन का जनसमर्थन कितनी हद तक संसदीय प्रतिनिधित्व में बदलता है और सत्तारूढ़ दल अपनी राजनीतिक स्थिति कितनी मजबूत बनाए रखता है। चुनाव से पहले आए सर्वेक्षणों में अलग-अलग तस्वीरें सामने आई हैं, इसलिए मतदान समाप्त होने और आधिकारिक नतीजे आने से पहले किसी दल की जीत का निष्कर्ष निकालना उचित नहीं होगा। सर्बिया का यह चुनाव केवल सत्ता पक्ष और उसके विरोधियों के बीच मुकाबला नहीं है, बल्कि भ्रष्टाचार के खिलाफ उठी आवाजों, राजनीतिक जवाबदेही और संस्थागत सुधारों की मांग की भी परीक्षा है। आने वाले दिनों में चुनाव परिणाम और सरकार गठन की प्रक्रिया देश की घरेलू राजनीति के साथ-साथ यूरोपीय संघ, रूस और चीन के साथ उसके संबंधों पर भी असर डाल सकती है।छात्र आंदोलन कैसे बना राजनीतिक चुनौती?
चुनावी मैदान में उतरे 250 उम्मीदवार
अलेक्जेंडर वुचिच की राजनीति पर नजर
चुनाव में किन मुद्दों पर टिकी निगाहें?
नतीजों से तय होगी आगे की राजनीतिक दिशा
सर्बिया में संसदीय चुनाव: छात्र आंदोलन ने राष्ट्रपति अलेक्जेंडर वुचिच की पार्टी को दी चुनौती


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