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यूरोप में जेट फ्यूल की संभावित कमी का खतरा, दक्षिण कोरिया से बढ़ी सप्लाई


लंदन। यूरोप के विमानन ईंधन बाजार पर आने वाले महीनों में दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाली कंसल्टेंसी Energy Aspects के अनुमान के मुताबिक 2026 की चौथी तिमाही में यूरोप में जेट फ्यूल की मांग और उपलब्ध आपूर्ति के बीच करीब 5.10 लाख बैरल प्रतिदिन का अंतर हो सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि यूरोप के सभी एयरपोर्ट पर तत्काल ईंधन खत्म होने वाला है। बाजार में अतिरिक्त आयात और रिफाइनरी उत्पादन इस दबाव को कुछ हद तक कम कर रहे हैं।

दक्षिण कोरिया से तेजी से बढ़ी ईंधन आपूर्ति

यूरोप में संभावित कमी के बीच दक्षिण कोरिया एक महत्वपूर्ण वैकल्पिक आपूर्तिकर्ता बनकर सामने आया है। Kpler के आंकड़ों के अनुसार सितंबर 2026 में अब तक दक्षिण कोरिया से यूरोप आने वाले जेट फ्यूल की औसत मात्रा करीब 1.29 लाख बैरल प्रतिदिन रही है। यह अक्टूबर 2022 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर बताया गया है। LSEG के शिपिंग आंकड़ों में भी इसी तरह की मजबूत आपूर्ति दिखाई देती है।

इस बढ़ोतरी का एक कारण यूरोप और एशिया के ईंधन बाजारों के बीच कीमतों का अंतर भी है। जब यूरोप में ईंधन की कीमत और मांग एशियाई बाजारों की तुलना में ज्यादा आकर्षक होती है, तो व्यापारियों के लिए लंबी दूरी तय करके एशिया से यूरोप तक कार्गो भेजना आर्थिक रूप से फायदेमंद हो जाता है।

मध्य पूर्व से आपूर्ति में आई बाधा

यूरोपीय जेट फ्यूल बाजार पर दबाव बढ़ने की बड़ी वजह मध्य पूर्व से होने वाली आपूर्ति में व्यवधान है। क्षेत्र में लंबे समय से जारी भू-राजनीतिक तनाव ने पारंपरिक ईंधन आपूर्ति मार्गों को प्रभावित किया है। Reuters के अनुसार, इस व्यवधान के बाद यूरोप ने नाइजीरिया, अमेरिका और कनाडा जैसे देशों से भी अधिक मात्रा में जेट फ्यूल मंगाना शुरू किया है।

यूरोप पहले मध्य पूर्व से मिलने वाले ईंधन पर काफी निर्भर था। ऐसे में वहां से आपूर्ति कम होने पर यूरोपीय खरीदारों को दूर-दराज के देशों से कार्गो मंगाने पड़ रहे हैं। इससे परिवहन लागत और बाजार की संवेदनशीलता दोनों बढ़ सकती हैं।

यूरोप के ईंधन भंडार पर भी दबाव

संभावित कमी की चिंता इसलिए भी बढ़ी है क्योंकि यूरोप के प्रमुख ईंधन भंडारण केंद्र Amsterdam-Rotterdam-Antwerp यानी ARA में जेट फ्यूल का स्टॉक काफी नीचे आ गया है।

Reuters के मुताबिक 10 सितंबर को समाप्त सप्ताह में इस हब पर जेट फ्यूल का स्वतंत्र भंडार लगभग सात साल के निचले स्तर पर पहुंच गया था। कम स्टॉक का मतलब है कि यदि अचानक किसी प्रमुख आपूर्ति मार्ग में फिर से बाधा आती है तो बाजार के पास उसे संभालने के लिए पहले की तुलना में कम बफर उपलब्ध होगा।

दक्षिण कोरिया में बढ़ा जेट फ्यूल उत्पादन

दूसरी तरफ दक्षिण कोरिया की रिफाइनरियां यूरोप के लिए अतिरिक्त ईंधन उपलब्ध कराने की स्थिति में हैं। सरकारी आंकड़ों के हवाले से Reuters ने बताया कि जुलाई में दक्षिण कोरिया का जेट फ्यूल उत्पादन करीब 1.389 करोड़ बैरल तक पहुंच गया, जो लगभग सात वर्षों का सबसे ऊंचा मासिक स्तर था।

इसी अवधि में देश का कुल रिफाइनिंग रन करीब 27 लाख बैरल प्रतिदिन रहा, जो जून की तुलना में लगभग 16 प्रतिशत अधिक था। उत्पादन बढ़ने से दक्षिण कोरियाई कंपनियों के पास घरेलू मांग पूरी करने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में अधिक ईंधन भेजने की क्षमता बनी।

अमेरिका और एशिया में अलग तस्वीर

Energy Aspects का अनुमान यूरोप की स्थिति को अमेरिका और एशिया-प्रशांत क्षेत्र से अलग दिखाता है। Q4 2026 में अमेरिका में करीब 18,000 बैरल प्रतिदिन का संभावित अधिशेष, जबकि एशिया-प्रशांत क्षेत्र में लगभग 4.19 लाख बैरल प्रतिदिन का अधिशेष रहने का अनुमान लगाया गया है।

यही वजह है कि यूरोपीय बाजार एशिया और दूसरे उत्पादक देशों से अतिरिक्त कार्गो आकर्षित कर रहा है। वैश्विक बाजार में उपलब्ध ईंधन को एक क्षेत्र से दूसरे क्षेत्र में भेजने का फैसला अब कीमत, जहाजों की उपलब्धता और परिवहन लागत पर काफी निर्भर करेगा।

क्या यूरोप में विमान उड़ानें प्रभावित होंगी?

फिलहाल व्यापक स्तर पर यूरोपीय विमान सेवाओं के रुकने जैसी स्थिति की पुष्टि नहीं हुई है। Euronews की 23 सितंबर की रिपोर्ट के मुताबिक एशिया से आने वाले करीब 9 लाख टन जेट फ्यूल की खेप आने वाले महीनों में यूरोप पहुंचने की उम्मीद है। अतिरिक्त आयात और यूरोपीय रिफाइनरियों का उत्पादन संभावित भौतिक कमी के जोखिम को कम कर सकता है।

लेकिन बाजार में एक अलग चिंता बनी हुई है—कीमतों का बढ़ना। सितंबर में यूरोपीय जेट फ्यूल की क्षेत्रीय कीमत बढ़कर करीब 207.56 डॉलर प्रति बैरल हो गई थी, जो पिछले महीने के औसत से 27.8 प्रतिशत अधिक बताई गई। यह क्षेत्रीय रिफाइनरी मूल्यांकन है और जरूरी नहीं कि यही कीमत सीधे हर एयरलाइन को चुकानी पड़े।

छोटे एयरपोर्ट ज्यादा संवेदनशील

ईंधन संकट का असर सभी एयरपोर्ट पर एक जैसा होना जरूरी नहीं है। बड़े विमानन केंद्रों के पास आमतौर पर अधिक स्टोरेज और कई आपूर्तिकर्ताओं तक पहुंच होती है, जबकि छोटे एयरपोर्ट सीमित आपूर्ति स्रोतों और कम भंडारण क्षमता के कारण ज्यादा संवेदनशील हो सकते हैं।

Euronews ने Cirium के विश्लेषण का हवाला देते हुए बताया कि पहले भी कुछ छोटे यूरोपीय एयरपोर्ट पर स्थानीय स्तर पर ईंधन उपलब्धता की समस्या सामने आ चुकी है। इसका मतलब यह है कि पूरे यूरोप में पर्याप्त ईंधन उपलब्ध होने के बावजूद किसी विशेष एयरपोर्ट पर अस्थायी दबाव पैदा हो सकता है।

एयरलाइंस और यात्रियों पर संभावित असर

यदि जेट फ्यूल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं, तो एयरलाइंस की परिचालन लागत बढ़ सकती है। इसका असर आगे चलकर टिकट कीमतों, ईंधन खरीद रणनीति और एयरलाइन के रूट संचालन पर पड़ सकता है। हालांकि किसी एयरलाइन पर वास्तविक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि उसने पहले से कितना ईंधन बुक किया है और उसकी हेजिंग रणनीति क्या है।

साथ ही, नवंबर से यूरोप में विमानन मांग में सामान्य मौसमी गिरावट आने की उम्मीद है। इससे चौथी तिमाही में मांग का दबाव कुछ कम हो सकता है और संभावित आपूर्ति अंतर भी घट सकता है।

यूरोपीय आयोग की स्थिति क्या है?

यहां एक महत्वपूर्ण अंतर समझना जरूरी है। यूरोपीय आयोग के Oil Coordination Group ने 8 सितंबर 2026 को कहा था कि उस समय EU में तेल आपूर्ति सुरक्षा को लेकर तत्काल समस्या नहीं थी और जेट फ्यूल तथा डीजल की मांग को यूरोपीय रिफाइनरी उत्पादन तथा वैकल्पिक वैश्विक आपूर्ति से पूरा किया जा रहा था। साथ ही आयोग ने चेतावनी दी थी कि मध्य पूर्व की स्थिति और आने वाले शरद-शीतकालीन मांग पैटर्न बाजार को आगे और तंग कर सकते हैं।

इसलिए मौजूदा तस्वीर को तत्काल "यूरोप में जेट फ्यूल खत्म होने" की स्थिति के बजाय आने वाली तिमाही में संभावित सप्लाई टाइटनेस और ऊंची कीमतों के जोखिम के रूप में देखना अधिक सटीक है।

आगे क्या होगा?

आने वाले हफ्तों में बाजार की दिशा मुख्य रूप से तीन चीजों पर निर्भर करेगी—मध्य पूर्व से आपूर्ति मार्गों की स्थिति, यूरोपीय रिफाइनरियों का उत्पादन और एशिया, अमेरिका तथा अफ्रीका से आने वाले ईंधन कार्गो की मात्रा।

दक्षिण कोरिया फिलहाल यूरोप के लिए महत्वपूर्ण वैकल्पिक स्रोत बन गया है। यदि वहां से निर्यात मजबूत रहता है और एशिया से अतिरिक्त कार्गो समय पर यूरोप पहुंचते हैं, तो संभावित कमी का दबाव कम हो सकता है। लेकिन अगर वैश्विक आपूर्ति मार्गों में फिर व्यवधान आता है, तो कम यूरोपीय स्टॉक के कारण कीमतों पर दबाव तेज हो सकता है।

निष्कर्ष

यूरोप का जेट फ्यूल बाजार इस समय आपूर्ति संकट की आशंका और वैकल्पिक सप्लाई के बीच संतुलन की स्थिति में है। Energy Aspects ने Q4 में करीब 5.10 लाख बैरल प्रतिदिन के संभावित घाटे का अनुमान लगाया है, जबकि दक्षिण कोरिया समेत एशियाई देशों से बढ़ते आयात इस दबाव को कम करने में मदद कर रहे हैं। फिलहाल व्यापक ईंधन संकट की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन कम स्टॉक और भू-राजनीतिक जोखिम के कारण बाजार पर नजर बनी हुई है।