मुंगेर/भागलपुर: बिहार में सड़क संपर्क व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में सुल्तानगंज के अजगैवीनाथ धाम से बिहार-झारखंड सीमा पर स्थित दर्दमारा तक सड़क को फोरलेन में बदलने की योजना आगे बढ़ रही है। इस परियोजना पर करीब 534.53 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है। निर्माण कार्य नवंबर 2026 से शुरू कराने की तैयारी बताई गई है। परियोजना पूरी होने के बाद यात्रियों, स्थानीय कारोबारियों और बाबा बैद्यनाथ धाम जाने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सड़क सुविधा मिलने की उम्मीद है। योजना के तहत सुल्तानगंज से दर्दमारा तक स्टेट हाईवे-22 के संबंधित हिस्से को चौड़ा और मजबूत कर चार लेन में विकसित करने की तैयारी है। जुलाई में प्रकाशित रिपोर्ट के अनुसार, अजगैवीनाथ धाम से बिहार-झारखंड सीमा तक लगभग 40 किलोमीटर सड़क निर्माण के लिए प्रशासनिक स्वीकृति दी गई थी। परियोजना को बिहार स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड यानी BSRDCL के माध्यम से आगे बढ़ाया जाना है। अक्टूबर की शुरुआत में सामने आई रिपोर्टों में इस मार्ग के व्यापक कॉरिडोर की लंबाई करीब 99 किलोमीटर बताई गई है। इसलिए परियोजना के अलग-अलग हिस्सों की लंबाई और निर्माण का दायरा अंतिम विभागीय दस्तावेजों से स्पष्ट होना जरूरी है। वर्तमान में इस मार्ग से गुजरने वाले वाहनों को तारापुर और संग्रामपुर जैसे बाजार क्षेत्रों से होकर निकलना पड़ता है। सड़क संकरी होने और स्थानीय यातायात का दबाव अधिक रहने से कई बार वाहनों की आवाजाही प्रभावित होती है। फोरलेन सड़क बनने के बाद यातायात की क्षमता बढ़ने और बाजार क्षेत्रों में जाम का दबाव घटने की उम्मीद है। इससे स्थानीय लोगों के साथ-साथ मालवाहक वाहनों और दूसरे जिलों की ओर जाने वाले यात्रियों को भी सुविधा मिल सकती है। वास्तविक लाभ सड़क के अंतिम डिजाइन, बाजारों में बाईपास की व्यवस्था और निर्माण पूरा होने के बाद यातायात संचालन पर निर्भर करेगा। सुल्तानगंज का अजगैवीनाथ धाम श्रावणी मेले के दौरान कांवरियों की यात्रा का प्रमुख पड़ाव है। यहां से बड़ी संख्या में श्रद्धालु गंगाजल लेकर देवघर स्थित बाबा बैद्यनाथ धाम की ओर जाते हैं। ऐसे में सड़क चौड़ी होने से यात्रा प्रबंधन, वाहनों की आवाजाही और भीड़ नियंत्रण में मदद मिलने की संभावना है। हालांकि, सड़क निर्माण पूरा होने तक श्रद्धालुओं को मौजूदा मार्ग और प्रशासन की ओर से जारी यातायात निर्देशों का ही पालन करना होगा। निर्माण के दौरान जरूरत पड़ने पर अस्थायी डायवर्जन भी लागू किए जा सकते हैं। इस सड़क परियोजना का असर केवल धार्मिक पर्यटन तक सीमित नहीं रहने की उम्मीद है। बेहतर सड़क संपर्क से आसपास के गांवों, कस्बों और बाजारों को लाभ मिल सकता है। कृषि उत्पादों और अन्य सामान की ढुलाई सुगम होने से स्थानीय व्यापार को भी बढ़ावा मिल सकता है। परियोजना से जुड़ी रिपोर्टों में तारापुर, संग्रामपुर, बेलहर, कटोरिया और चांदन जैसे क्षेत्रों की कनेक्टिविटी बेहतर होने की संभावना जताई गई है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, नवंबर 2026 से काम शुरू कराने की तैयारी है। जुलाई में प्रकाशित जानकारी में निविदा प्रक्रिया आगे बढ़ाने की बात कही गई थी, जबकि अक्टूबर की रिपोर्ट में सर्वे और मापी की गतिविधियों का उल्लेख है। निर्माण एजेंसी, वास्तविक शुरुआत और पूरा होने की समयसीमा की पुष्टि संबंधित विभाग की नवीनतम आधिकारिक सूचना से की जानी चाहिए। सुल्तानगंज से दर्दमारा तक फोरलेन सड़क की योजना बिहार के दक्षिण-पूर्वी हिस्से और झारखंड सीमा के बीच संपर्क बेहतर करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है। परियोजना के धरातल पर उतरने से जाम कम करने, श्रद्धालुओं की यात्रा सुगम बनाने और स्थानीय कारोबार को मदद मिलने की उम्मीद है। अब लोगों की नजर निर्माण कार्य की शुरुआत और विभाग की ओर से जारी होने वाली विस्तृत समय-सारणी पर रहेगी।स्टेट हाईवे-22 को चौड़ा करने की तैयारी
तारापुर और संग्रामपुर में जाम से राहत की उम्मीद
श्रावणी मेले में कांवरियों को मिल सकती है सुविधा
बिहार और झारखंड के बीच संपर्क होगा मजबूत
निर्माण कब शुरू होगा?
निष्कर्ष
बिहार में 534.53 करोड़ रुपये से बनेगी फोरलेन सड़क, सुल्तानगंज से दर्दमारा तक सफर होगा आसान






