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बिहार में रूफटॉप सोलर उपभोक्ताओं को राहत की उम्मीद, अतिरिक्त बिजली के बदले भुगतान का प्रस्ताव


पटना: बिहार में घरों की छतों पर सोलर पैनल लगवाने वाले उपभोक्ताओं के लिए अच्छी खबर सामने आई है। अब सोलर पैनल से घरेलू जरूरत पूरी करने के बाद बचने वाली बिजली के बदले आर्थिक लाभ मिलने का रास्ता खुल सकता है। ऊर्जा विभाग की ओर से अतिरिक्त बिजली के भुगतान के लिए नियमों में बदलाव का प्रस्ताव रखा गया है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो पात्र उपभोक्ताओं को साल के अंत में बची हुई बिजली के बदले भुगतान मिल सकता है।

अभी कैसे काम करती है नेट मीटरिंग व्यवस्था?

रूफटॉप सोलर सिस्टम में घर की छत पर लगे पैनल सूर्य की रोशनी से बिजली बनाते हैं। सबसे पहले इस बिजली का इस्तेमाल घर के उपकरणों, पंखों, लाइटों और अन्य जरूरतों को पूरा करने में होता है। यदि उत्पादन घरेलू खपत से अधिक हो जाता है, तो अतिरिक्त बिजली ग्रिड में चली जाती है।

नेट मीटरिंग व्यवस्था में बिजली की खपत और ग्रिड को भेजी गई बिजली का हिसाब रखा जाता है। नियमानुसार अतिरिक्त बिजली का क्रेडिट अगले बिलिंग चक्रों में समायोजित किया जा सकता है। मौजूदा व्यवस्था के सालाना हिसाब में बची बिजली के निपटारे को लेकर ही बदलाव का प्रस्ताव सामने आया है।

साल के अंत में बची बिजली के बदले मिल सकता है पैसा

रिपोर्ट के अनुसार, प्रस्ताव में वित्तीय वर्ष के अंत में उपभोक्ता के खाते में बची अतिरिक्त बिजली को खरीदने और उसके बदले भुगतान करने की व्यवस्था शामिल है। इसका उद्देश्य यह है कि सोलर सिस्टम से जरूरत से ज्यादा बिजली पैदा होने पर उपभोक्ताओं को उसका आर्थिक लाभ भी मिल सके।

हालांकि, भुगतान की दर, पात्र उपभोक्ताओं की श्रेणी, हिसाब लगाने का तरीका और रकम बैंक खाते में भेजने की प्रक्रिया जैसे बिंदुओं पर अंतिम नियमों की पुष्टि जरूरी है। बिहार विद्युत विनियामक आयोग की वेबसाइट पर 8 अक्टूबर 2026 को इस विषय में नियमों में संशोधन से जुड़ी याचिका दर्ज है। इसलिए अभी इसे अंतिम रूप से लागू हो चुकी व्यवस्था मानना उचित नहीं होगा।

घरेलू उपभोक्ताओं को क्या फायदा हो सकता है?

यदि प्रस्ताव को मंजूरी मिलती है, तो इससे रूफटॉप सोलर लगाने वाले लोगों को दो तरह से फायदा हो सकता है। पहला, सोलर से बनी बिजली का इस्तेमाल कर बिजली बिल में बचत होगी। दूसरा, सालाना हिसाब के बाद बची पात्र बिजली के लिए भुगतान मिलने की संभावना बनेगी।

इससे सौर ऊर्जा अपनाने के प्रति लोगों की दिलचस्पी बढ़ सकती है। साथ ही, स्वच्छ ऊर्जा के उत्पादन को प्रोत्साहन मिलने और पारंपरिक बिजली पर घरेलू निर्भरता कम करने में भी मदद मिल सकती है। हालांकि, वास्तविक बचत और संभावित भुगतान सोलर सिस्टम की क्षमता, बिजली उत्पादन, घरेलू खपत और लागू नियमों पर निर्भर करेंगे।

उपभोक्ता अभी क्या करें?

रूफटॉप सोलर लगवा चुके उपभोक्ताओं को अपना नेट मीटरिंग समझौता, बिजली बिल और मीटर में दर्ज बिजली के आयात-निर्यात का रिकॉर्ड संभालकर रखना चाहिए। भुगतान की पात्रता और प्रक्रिया जानने के लिए अपने बिजली वितरण क्षेत्र—उत्तर बिहार या दक्षिण बिहार बिजली वितरण कंपनी—से जानकारी लें।

नियमों और आवेदन संबंधी जानकारी के लिए बिहार विद्युत विनियामक आयोग तथा राष्ट्रीय रूफटॉप सोलर पोर्टल पर जारी आधिकारिक सूचनाएं देखें।

निष्कर्ष

बिहार में रूफटॉप सोलर से पैदा होने वाली अतिरिक्त बिजली के बदले भुगतान की संभावना उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण बदलाव साबित हो सकती है। लेकिन इसका वास्तविक लाभ तभी स्पष्ट होगा, जब संबंधित आयोग प्रस्ताव पर फैसला लेकर अंतिम नियम और भुगतान की शर्तें जारी करेगा।