टाटा स्टील ने #WeAlsoMakeTomorrow के दूसरे चरण में सस्टेनेबिलिटी की कहानी को दिया नया आयाम
~ प्रसिद्ध ब्रिटिश एनिमेटर मार्टिन पिक और VML के सहयोग से टाटा स्टील ने ‘रीसायकल ऑफ़ लाइफ’ फिल्म प्रस्तुत की है। यह फिल्म स्टील की बार-बार रीसायकल होने की क्षमता और अधिक सस्टेनेबल भविष्य की ओर बढ़ने की कहानी बताती है ~
मुंबई, 16 सितंबर, 2026: टाटा स्टील ने प्रसिद्ध ब्रिटिश एनिमेटर मार्टिन पिक के साथ मिलकर ‘रीसायकल ऑफ़ लाइफ’ नामक एक नई फिल्म बनाई है। यह फिल्म कंपनी के कॉरपोरेट ब्रांड अभियान*#WeAlsoMakeTomorrow के दूसरे चरण की शुरुआत को दर्शाती है।
अभियान की वेबसाइट: https://www.wealsomaketomorrow.tatasteel.com/
2018 में शुरू हुए इस अभियान के पहले चरण में तकनीक और इनोवेशन के जरिए भविष्य को आकार देने पर ध्यान दिया गया था। अब इसके दूसरे चरण में सस्टेनेबिलिटी को केंद्र में रखा गया है। अपने उत्पादों, समाधानों और विभिन्न पहलों के माध्यम से टाटा स्टील यह बता रही है कि जिम्मेदारी के साथ तैयार की गई सामग्री और सस्टेनेबल मैन्युफैक्चरिंग, बेहतर और अधिक सस्टेनेबल भविष्य के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
‘रीसायकल ऑफ़ लाइफ’ देखने के लिए क्लिक करें : https://www.youtube.com/watch?v=gAvHK_1fCtE
‘रीसायकल ऑफ़ लाइफ’ के जरिए टाटा स्टील ने इस विचार को बच्चों के माध्यम से जीवंत किया है, जो आने वाली पीढ़ियों का प्रतीक हैं। इसमें ओरिगामी से प्रेरित रूपांतरणों के जरिए निरंतर बदलाव और नए रूप में इस्तेमाल होने की भावना को दर्शाया गया है। फिल्म में स्टील जैसी बनावट वाला कागज बच्चों के हाथों में बार-बार अपना रूप बदलता है। यह दिखाता है कि स्टील को किस तरह बार-बार नए रूप में ढाला और इस्तेमाल किया जा सकता है।
टाटा स्टील और सस्टेनेबिलिटी
टाटा समूह की ‘आलिंगना’ पहल के अनुरूप, टाटा स्टील ने 2045 तक नेट ज़ीरो हासिल करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इसे हासिल करने के लिए कंपनी विभिन्न क्षेत्रों में कई पहल कर रही है।
भारत में टाटा स्टील पंजाब में इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (EAF) के जरिए स्क्रैप से स्टील बनाने को बढ़ावा दे रही है। इसके अलावा, पश्चिम और दक्षिण भारत में दो और प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। यूरोप में कंपनी लो-कार्बन फ्यूचर की दिशा में आगे बढ़ रही है। इसके तहत पोर्ट टैलबोट में 3.2 मिलियन टन प्रति वर्ष (MTPA) क्षमता वाला EAF और नीदरलैंड्स में ग्रीन स्टील प्लान शामिल हैं। टाटा स्टील का लक्ष्य अगले 10–15 वर्षों में रीसाइक्लिंग के जरिए हर साल 10–15 मिलियन टन स्टील का उत्पादन करना है।
मौजूदा ब्लास्ट फर्नेस प्लांट्स में टाटा स्टील हाईसारना (HISarna) और ईज़ीमेल्ट (EASyMelt) जैसी नई तकनीकों का परीक्षण कर रही है। साथ ही, कार्बन उत्सर्जन कम करने के लिए बायोचार और प्राकृतिक गैस जैसे वैकल्पिक ईंधनों का इस्तेमाल बढ़ाया जा रहा है। कंपनी अपने परिचालनों में नवीकरणीय ऊर्जा के उपयोग और स्क्रैप के इस्तेमाल को भी बढ़ा रही है। सर्कुलर इकॉनमी की दिशा में अपने प्रयासों के तहत टाटा स्टील हर साल लगभग 15 MTPA औद्योगिक बाय प्रोडक्ट्स को उपयोगी संसाधनों में बदल रही है।
फिल्म की कला और तकनीक
ब्रिटिश एनिमेटर मार्टिन पिक के निर्देशन में बनी रीसायकल ऑफ़ लाइफ फिल्म में लाइव एक्शन, CGI और पेंटिंग से तैयार किए गए दृश्यों को एक साथ जोड़ा गया है। इससे लगातार बदलती दुनिया का एक अनोखा रूप सामने आता है। अपनी खास विज़ुअल शैली के लिए पहचाने जाने वाले पिक इस फिल्म के केंद्रीय विचार और प्रगति, लोगों तथा पर्यावरण के बीच संतुलन बनाने की टाटा स्टील की सोच से प्रभावित हुए।
उन्होंने बताया, “इस सोच को पर्दे पर उतारने के लिए मैंने ‘पेंटिंग ईंटू पिक्सेल्स’ नाम की एक खास तकनीक विकसित की। इसमें डिजिटल तस्वीरों को गीले रंगों की तरह इस्तेमाल किया गया, जिससे विज़ुअल्स में एक अलग तरह की बनावट दिखाई देती है। हमारा उद्देश्य टाटा स्टील की सस्टेनेबल प्रक्रियाओं के प्रभाव को उनके रूप, अनुभव और बनावट के जरिए दिखाना था।
बच्चों की जिज्ञासा और आश्चर्य की भावना को सामने लाना फिल्म का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था, क्योंकि वे आने वाले कल की भावना और उम्मीद का प्रतीक हैं। फिल्म में लगातार बदलते रूपों के प्रवाह को बनाए रखना भी जरूरी था। इसके जरिए टाटा स्टील द्वारा सामग्रियों को नए और रचनात्मक रूप देने की प्रक्रिया को बच्चों की सहज रचनात्मकता से जोड़ा गया है। बच्चों की रचनात्मक ऊर्जा, जीवंत रंगों और सहज CGI के मेल से हमने ऐसा दृश्य अनुभव तैयार किया, जो अभियान के बदलाव और जिम्मेदार प्रगति के संदेश को प्रभावी ढंग से सामने लाता है।”
संगीत रचना
फिल्म के विसुअल कहानी को और प्रभावी बनाता है ‘रीसायकल धुन ’, जिसे प्रसिद्ध संगीतकार ध्रुव घाणेकर ने तैयार किया है। इसमें जाने-माने कर्नाटक शास्त्रीय गायक संजय सुब्रह्मण्यम ने अपनी आवाज़ दी है।
ध्रुव घाणेकर ने अपनी रचना के बारे में बताया, “टाटा स्टील के लिए तैयार इस संगीत में भारतीय शास्त्रीय राग प्रणाली को नए रूप में प्रस्तुत किया गया है। इसमें आरोह के दौरान स्वरों को नए क्रम में सजाया गया है। सौ साल से अधिक पुरानी संस्था टाटा स्टील जिस तरह स्टील को रीसायकल करके खुद को नए रूप में ढाल रही है, उसी से प्रेरणा लेते हुए इस संगीत में प्राचीन राग प्रणाली के सात स्वरों को नए तरीके से प्रस्तुत किया गया है।
जैसे-जैसे स्वर ऊपर की ओर बढ़ते हैं, संगीत खुद को रीसायकल करता है, नए सिरे से व्यवस्थित होता है और हर पड़ाव पर एक नए रूप में सामने आता है। प्रसिद्ध कर्नाटक गायक संजय सुब्रह्मण्यम की आवाज़ से जीवंत यह संगीत अलग-अलग शैलियों, भावों और गति से गुजरता हुआ अपने चरम तक पहुँचता है और अंत में खुद को फिर से रीसायकल करते हुए वहीं लौट आता है, जहाँ से इसकी शुरुआत हुई थी।”
‘रीसायकल ऑफ़ लाइफ’ के साथ टाटा स्टील ने #WeAlsoMakeTomorrow अभियान को इनोवेशन की चर्चा से आगे बढ़ाकर सस्टेनेबिलिटी की दिशा में एक नई कहानी दी है। यह अभियान ग्राहकों, समुदायों और पर्यावरण के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन करने की दिशा में कंपनी की प्रतिबद्धता को और मजबूत करता है।






