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देवघर जिले में शारदीय नवरात्र की धूम, पहले दिन मां शैलपुत्री की हुई पूजा-अर्चना


अमित कुमार,
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो 

देवघर : शारदीय नवरात्र के प्रथम दिन रविवार को पूरे देवघर जिले में श्रद्धा और भक्ति का सैलाब उमड़ पड़ा। जिले के देवघर, जसीडीह, सारवां, सारठ, पालोजोरी, मधुपुर, मोहनपुर, देवीपुर, करौं और मार्गोमुंडा प्रखंडों में मां दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री का विधि-विधान से पूजन किया गया।

नवरात्र के पहले दिन को प्रतिपदा या कलश स्थापना के नाम से भी जाना जाता है। सुबह से ही मंदिरों और पूजा पंडालों में श्रद्धालुओं की लंबी कतारें देखी गईं।

देवघर शहर में बाबा बैद्यनाथ मंदिर परिसर स्थित दुर्गा मंदिर, बिलासी टाउन, कास्टर टाउन, बेलाबगान, आजाद चौक, रिखिया रोड स्थित पूजा पंडालों में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ कलश स्थापना की गई। मां शैलपुत्री को श्वेत वस्त्र, सफेद फूल और गाय के घी से बनी मिठाइयों का भोग लगाया गया। मान्यता है कि शैलपुत्री हिमालय की पुत्री हैं, जिनके एक हाथ में त्रिशूल और दूसरे में कमल सुशोभित है और वृषभ पर सवार हैं।

जसीडीह में स्टेशन रोड, रोहिणी, देवघर-जसीडीह मुख्य मार्ग के पंडालों में सुबह 6 बजे से ही पूजन शुरू हो गया। यहां महिला श्रद्धालुओं की संख्या अधिक रही।

मधुपुर अनुमंडल में शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के 40 से अधिक छोटे-बड़े पंडालों में घट स्थापना हुई। पथरौल काली मंदिर और चंचलपीर के पंडाल में भक्तों की भारी भीड़ रही।

सारवां, सारठ और करौं  के ग्रामीण क्षेत्रों में पारंपरिक तरीके से मिट्टी के कलश में जौ बोकर पूजन किया गया। सारठ के ऐतिहासिक मनोकामना मंदिर और सारवां के दुखिया मंदिर स्थित दुर्गा मंदिर में ढोल-नगाड़ों के साथ मां का आह्वान किया गया।

पालोजोरी, देवीपुर, मोहनपुर और मार्गोमुंडा में भी नवरात्र को लेकर खास उत्साह देखा गया। पालोजोरी के कुंडा मोड़, देवीपुर के बूढ़ीगड़ी मंदिर, मोहनपुर के रामजोरी और मार्गोमुंडा बाजार के सार्वजनिक दुर्गा पंडालों में मां शैलपुत्री की प्रतिमा के समक्ष अखंड ज्योति जलाई गई। कई स्थानों पर नौ दिनों तक चलने वाले दुर्गा सप्तशती पाठ का भी शुभारंभ हुआ।

जिला प्रशासन द्वारा सभी प्रमुख पंडालों में सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण के लिए दंडाधिकारी और पुलिस बल की तैनाती की गई है। उपायुक्त और एसपी ने श्रद्धालुओं से शांतिपूर्ण और सौहार्दपूर्ण तरीके से पर्व मनाने की अपील की है।

पंडितों के अनुसार प्रथम दिन शैलपुत्री की पूजा से मन को स्थिरता और जीवन में दृढ़ता आती है। 09 दिनों तक चलने वाले इस महापर्व में अब जिले के सभी प्रखंडों में भक्ति का माहौल बना रहेगा।