"साहित्य को जन-जन तक पहुंचाकर ही आचार्य पंकज को सच्ची श्रद्धांजलि" : अशोकानंद झा.
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो
अमित कुमार
देवघर : हिन्दी विद्यापीठ, देवघर और संताल परगना महाविद्यालय, दुमका के महान शिक्षक, प्रख्यात लेखक-कवि, स्वाधीनता सेनानी एवं समाजसेवी आचार्य प्रोफेसर ज्योतीन्द्र प्रसाद झा ‘पंकज’ की 107वीं जयंती शिवगंगा तट स्थित ‘सार्वजनिक भारती पुस्तकालय’ में श्रद्धा और साहित्यिक उल्लास के साथ मनाई गई।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि, विद्यापीठ के प्रबंधक एवं तक्षशिला विद्यालय के निदेशक अशोकानंद झा ने दिल्ली विश्वविद्यालय के इतिहासकार एवं प्रसिद्ध ग़ज़लकार डॉ. अमर पंकज द्वारा लिखित पुस्तक “इतिहास के वातायन से – पंकज-गोष्ठी, खैराबेमू और आचार्य ज्योतीन्द्र प्रसाद झा पंकज” का विमोचन किया।
श्री झा ने कहा कि आचार्य पंकज ने ‘पंकज-गोष्ठी’ और ‘खैराबेमू’ के माध्यम से संताल परगना में साहित्य-संस्कृति की अलख जगाई थी। आज के साहित्यकारों को भी उनकी राह पर चलते हुए साहित्य को शहर की गली-गली और गांव-गांव तक ले जाना होगा। तभी भारत की सांस्कृतिक अस्मिता को बचाया जा सकेगा।
मुख्य वक्ता के रूप में आचार्य पंकज के शिष्य एवं देवघर न्यायालय के सरकारी अधिवक्ता अशोक कुमार राय ने संस्मरण साझा किए। उन्होंने बताया कि 1934 में महात्मा गांधी के हरिजन-प्रवेश आंदोलन में ‘पंकज’ जी अग्रणी युवा नेता थे। विधायक स्व. सरयू प्रसाद मिर्धा को जब भीड़ ने अधमरा कर दिया था, तब पंकज जी ने अकेले भीड़ का सामना कर उन्हें रिक्शा पर लादकर अस्पताल पहुंचाया और उनकी जान बचाई। श्री राय ने कहा कि ‘पंकज’ जी समाज के सबसे कमजोर वर्ग के साथ खड़े थे।
विशिष्ट वक्ता, केबीएस के सेवानिवृत्त अपर आयुक्त उदय नारायण खवाड़े ने कहा कि बदलते दौर में नैतिक मूल्यों के ह्रास को रोकने के लिए नई पीढ़ी को आचार्य पंकज के जीवन-आचरण से प्रेरणा लेनी चाहिए। उन्होंने स्वयं को दो बार पंकज जी के हाथों पुरस्कृत होने को जीवन की अमूल्य निधि बताया।
नगर-निगम पार्षद शैलेश मिश्र ने कहा कि पंकज जी के पदचिह्नों पर चलकर देवघर के भौतिक, शैक्षिक और सांस्कृतिक उत्थान के लिए कार्य करना ही उनके प्रति सच्ची श्रद्धा होगी।
अध्यक्षता कर रहे संत फ्रांसिस स्कूल के सेवानिवृत्त शिक्षक पंडित शिवराम झा ने कहा कि पंकज जी जैसे महापुरुष कभी मरते नहीं, 107 वर्ष बाद भी वे हमारी प्रेरणा हैं।
वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. तारा चरण खवाड़े का संदेश उनके शिष्य डॉ. विश्वनाथ झा ने पढ़ा। उन्होंने कहा कि आओ, देवघर की मिट्टी के इस महान सपूत को राष्ट्रीय स्तर पर उनका उचित स्थान दिलाने की मुहिम शुरू करें।
उद्घाटन सत्र के बाद वरिष्ठ कवि सर्वेश्वर दत्त द्वारी की अध्यक्षता में ‘पंकज स्मृति काव्य-गोष्ठी’ हुई। इसमें डॉ. शंकर मोहन झा, परेश दत्त द्वारी, अनिल कुमार झा, डॉ. विजय शंकर, डॉ. प्रीति कुमारी, सोनम झा, उदयेश रवि, डॉ. अमर पंकज* सहित देवघर के लगभग सभी प्रमुख कवियों ने कविता, गीत और ग़ज़लें सुनाकर आचार्य पंकज को श्रद्धांजलि दी।
कार्यक्रम में प्रशांत कुमार सिन्हा, शत्रुघ्न प्रसाद, डॉ. दिलीप कुमार झा, डॉ. सुधीर दत्त द्वारी, सूबेदार ललित नारायण द्वारी सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार, शिक्षक और गणमान्य लोग उपस्थित थे।
कार्यक्रम का संचालन पंकज-गोष्ठी न्यास के अध्यक्ष डॉ. विश्वनाथ झा ने किया तथा धन्यवाद ज्ञापन संयोजक डॉ. अमर पंकज ने किया।





