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केएन बक्शी कॉलेज में सूक्ष्म शिक्षण पर मासिक सेमिनार, प्रशिक्षणार्थियों ने प्रस्तुत किए शोधपरक विचार


रांची एक्सप्रेस संवाददाता बेंगाबाद 

केएन बक्शी कॉलेज ऑफ एजुकेशन में शनिवार को आंतरिक गुणवत्ता आश्वासन प्रकोष्ठ के तत्वावधान में पाठ्यक्रम आधारित मासिक सेमिनार का आयोजन किया गया। ‘सूक्ष्म शिक्षण : सिद्धांत और अभ्यास’ विषय पर आयोजित सेमिनार में प्रशिक्षणार्थियों ने अपने-अपने लेख प्रस्तुत करते हुए सूक्ष्म शिक्षण की अवधारणा, उपयोगिता एवं व्यवहारिक पक्ष पर विस्तार से प्रकाश डाला। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महाविद्यालय के प्राचार्य ने कहा कि सूक्ष्म शिक्षण में छात्राध्यापक कृत्रिम एवं नियंत्रित परिस्थिति में वास्तविक कक्षा शिक्षण का अभ्यास करता है। इसमें शिक्षक प्रशिक्षणार्थी आवश्यकतानुसार किसी विशेष शिक्षण कौशल का बार-बार अभ्यास कर उसमें दक्षता हासिल करता है। उन्होंने कहा कि सूक्ष्म शिक्षण को नियंत्रित अभ्यास की प्रभावी व्यवस्था के रूप में स्वीकार किया जाता है। प्रो. बिनोद कुमार सुमन ने कहा कि सूक्ष्म शिक्षण ऐसी शिक्षण विधि है, जिसमें लघु कक्षा, सीमित विषयवस्तु, छोटी पाठ योजना, कम अवधि, सीमित पाठ्य सामग्री तथा कम संख्या में विद्यार्थियों को शामिल किया जाता है। इससे प्रशिक्षणार्थियों को शिक्षण कौशल को बेहतर ढंग से समझने और विकसित करने का अवसर मिलता है। सेमिनार में प्रशिक्षणार्थी आरती कुमारी ने कहा कि सूक्ष्म शिक्षण एक वास्तविक शिक्षण प्रक्रिया है, जिसमें प्रशिक्षणार्थी प्रत्यक्ष रूप से शिक्षण कार्य करता है। विनीता सोरेन ने बताया कि इसमें एक समय में केवल एक शिक्षण कौशल के विकास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। रोशन सिंह ने कहा कि प्राप्त प्रतिक्रिया के आधार पर पाठ में आवश्यक संशोधन कर प्रशिक्षणार्थी को दोबारा पढ़ाने का अवसर मिलता है। अदिति टुडू ने कहा कि सूक्ष्म शिक्षण में सामान्य कक्षा की जटिलताओं, जैसे विद्यार्थियों की अधिक संख्या और शोर-शराबे को कम कर शिक्षण कौशल के अभ्यास पर विशेष ध्यान दिया जाता है। कार्यक्रम में डॉ. शंकर सिंह, प्रो. निलेश लकड़ा, डॉ. राजेश रविदास, प्रो. राजीव शर्मा सहित प्रशिक्षणार्थियों में रंजीत कुमार, प्रियंका कुमारी, दीपा कुमारी, आशा कुमारी, ललिता सोरेन, अनीता मुर्मू आदि उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ किया गया।