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प्रेमचंद आज भी समाज को दिशा देने वाले साहित्यकार: संगोष्ठी


रांची एक्सप्रेस संवाददाता 
गिरिडीह :जन संस्कृति मंच जसम गिरिडीह की ओर से गिरिडीह कॉलेज में रविवार को 'प्रेमचंद स्मृति व्याख्यान' के तहत 'साहित्य का उद्देश्य : संदर्भ प्रेमचंद' विषय पर संगोष्ठी, सम्मान समारोह एवं मुशायरा सह कवि सम्मेलन का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में वक्ताओं ने प्रेमचंद के साहित्य को सामाजिक बदलाव का सशक्त माध्यम बताते हुए उनकी प्रासंगिकता पर विस्तार से विचार रखे संगोष्ठी में विषय प्रवेश कराते हुए गिरिडीह कॉलेज के हिंदी विभाग के प्रोफेसर एवं जसम की राष्ट्रीय कार्यकारिणी के सदस्य डॉ. बलभद्र ने कहा कि प्रेमचंद ने प्रगतिशील लेखक आंदोलन को नई दिशा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि साहित्य का उद्देश्य केवल मनोरंजन नहीं  बल्कि समाज में चेतना और परिवर्तन का मार्ग प्रशस्त करना है। उन्होंने गिरिडीह के साहित्यिक वातावरण को नई संभावनाओं से भरपूर बताया मुख्य वक्ता डॉ. गुलाम समदानी ने प्रेमचंद से पूर्व उर्दू साहित्य की प्रगतिशील परंपरा और सज्जाद ज़हीर मौलवी अब्दुल हक तथा जोश मलीहाबादी जैसे साहित्यकारों के योगदान पर प्रकाश डाला वहीं डॉ. शैलेन्द्र कुमार शुक्ल और परिवर्तन पत्रिका के संपादक डॉ. महेश सिंह ने प्रेमचंद के विचारों को उद्धृत करते हुए कहा कि साहित्य समाज और राजनीति के आगे मशाल लेकर चलने वाली शक्ति है कार्यक्रम की अध्यक्षता जसम झारखंड के कार्यकारी अध्यक्ष जावेद इस्लाम ने की  जबकि संचालन शंकर पाण्डेय ने किया संगोष्ठी के बाद गिरिडीह के वरिष्ठ कवि प्रदीप कुमार गुप्ता को 'प्रेमचंद स्मृति सम्मान 2026 से सम्मानित किया गया इसके बाद आयोजित मुशायरा सह कवि सम्मेलन का संचालन उर्दू शायर कलीम साजिद ने किया। कार्यक्रम में गगन शाहा  नवीन सिन्हा  संजय करुणेश शमीम अख्तर हलीम हसद  उदय शंकर उपाध्याय भीम कुमार नेतलाल महेश अमन परवेज शीतल सहित अनेक कवियों एवं शायरों ने अपनी रचनाओं का पाठ किया। रचनाओं में समकालीन सामाजिक विषमता  लोकतांत्रिक मूल्यों और जनसरोकारों से जुड़े मुद्दे प्रमुखता से उभरे इस अवसर पर भाकपा माले के जिला सचिव अशोक पासवान सामाजिक कार्यकर्ता रामदेव विश्वबंधु नेहरू युवा केंद्र के अरुण कुमार राजेंद्र त्रिपाठी सहित साहित्य समाज और राजनीति से जुड़े बड़ी संख्या में लोग उपस्थित रहे।