जयंती पर साहित्यकारों को सामाजिक संस्था सेसा ने याद किया
मेदिनीनगर। सामाजिक संस्था सेसा ने सोमवार को 'कोयल की धारा' के लेखक प्रो. सुभाष चंद्र मिश्रा और 'कोयलेर काछे' के रचयिता बुद्धदेव गुहा को उनकी जयंती पर याद किया। इस मौके पर सामाजिक कार्यकर्ता और सेसा के मार्गदर्शक प्रेम भसीन ने इन दोनों लेखकों को कोयल नदी का मानस पुत्र बताया। उन्होंने ने कहा कि भगवान ने भी इन दोनों लेखकों को एक ही दिन पृथ्वी पर भेजा कि वे कोयल के इतिहास, सौंदर्य और उपयोगिता लोगों तक बताएं। प्रो. मिश्रा के साथ रिश्तों को याद करते हुए उन्होंने कहा कि एक दोस्त जो बार-बार नहीं मिलता।
इस मौके पर जीएलए कॉलेज की प्रिंसिपल डॉ. जसबीर बग्गा ने कहा कि पहले वह प्रो. मिश्रा की छात्रा रहीं और बाद में उनकी सहकर्मी भी रही। सेसा के सदस्य के रूप में भी उनके साथ काम करने के दौरान बहुत कुछ सीखा। सेसा के महासचिव कौशिक मल्लिक ने कहा कि बुद्धदेव गुहा ने जब सेसा के गतिविधियों को जाना तब से संस्था से उनका लगाव बढ़ता गया। पलामू व्याघ्र आरक्ष क्षेत्र के ग्रामीण व आदिवासी लोगों से उनका आत्मीय संबंध रहा है। इसलिए सेसा द्वारा केचकी, बेतला, केड़, गारू, मारोमार, बारेसाढ़, अक्सी, रूद आदि गांवों में चलाए जा रहे विभिन्न सेवा कार्यों को जानकर वे बहुत खुश होते थे। दूसरी तरफ, प्रो. सुभाषचंद्र मिश्रा तो पिछले दो दशकों से सेसा के अध्यक्ष रहे । उनका संगठन के हर छोटी- बड़ी कोशिशों में न सिर्फ मार्गदर्शन रहता था बल्कि सहभागिता भी होती थी।
कार्यक्रम में वरिष्ठ पत्रकार और लेखक प्रभात मिश्रा 'सुमन', सेसा के संयुक्त सचिव संजय कुमार, ज्योति टोप्पो, अजय कुमार, विमला कुमारी, प्रो. मिश्रा के पौत्र मानस मिश्रा सहित काफी लोग उपस्थित थे।






