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90 दिन क्लास की अनिवार्यता सिर्फ जुमला, वीसी पर एनपीयू के ए के सिंह सहित 12 कॉलेज के 1473 छात्रों के भविष्य से खिलवाड़ का आरोप


हुसैनाबाद:कृष्णा यादव 

हुसैनाबाद,पलामू: 
नीलाम्बर-पीताम्बर विश्वविद्यालय, NPU के कुलपति प्रो. दिनेश सिंह पर 90 दिन क्लास की अनिवार्यता को लेकर दोहरा रवैया अपनाने का गंभीर आरोप लगा है। छात्रों और शिक्षकों ने इसे जुमला करार देते हुए कहा है कि कुलपति अपने मनमर्जी से नियम-कानून चला रहे हैं।
सत्र 2025-29 में चांसलर पोर्टल बंद होने के बाद भी प्रदेश के 12 संबद्ध डिग्री कॉलेजों के 1473 छात्रों ने ऑफलाइन नामांकन लिया था। कॉलेज प्राचार्यों के बार-बार अनुरोध के बावजूद कुलपति ने चांसलर पोर्टल नहीं खोला। बाद में वित्त मंत्री श्री राधाकृष्ण किशोर ने महामहिम राज्यपाल से मिलकर पोर्टल खुलवाया। इसके बाद फरवरी माह के अंत में इन छात्रों का नामांकन और रजिस्ट्रेशन हो गया।
आरोप है कि चूंकि पोर्टल राज्यपाल के दबाव में खुला था, इसलिए कुलपति ने ठान लिया कि ऑफलाइन नामांकित छात्रों को परीक्षा में शामिल नहीं किया जाएगा। इसी बहाने कुलपति ने यू.जी.सी. के 90 दिन क्लास अनिवार्य वाले नियम का हवाला देकर 09 मार्च से सेमेस्टर 1 की परीक्षा की तिथि घोषित कर दी और 1473 छात्रों को परीक्षा से बाहर कर दिया। 
छात्रों का कहना है कि कुलपति ने इसी 90 दिन के नियम को सेमेस्टर 5 पर लागू नहीं किया।  
सत्र 2022-26, सेमेस्टर 4 का रिजल्ट 30.06.2026 को प्रकाशित हुआ।सेमेस्टर 5 का फॉर्म 01.07.2026 से भरवाना शुरू,सेमेस्टर 5 की परीक्षा तिथि 10.08.2026 से 13.08.2026 तक घोषित  कर दिया गया।
छात्रों ने सवाल उठाया कि जब 1 दिन के अंतर पर ही सेमेस्टर 5 का फॉर्म भरवा दिया गया तो सेमेस्टर 1 के लिए 90 दिन की बाध्यता आखिर क्यों?
छात्रों ने कहा कि यदि कुलपति छात्र हितैषी होते तो ऑफलाइन नामांकित छात्रों की परीक्षा भी 09 मार्च से ले लेते या कुछ दिन टालकर सभी छात्रों की परीक्षा एक साथ कराते। लेकिन जिद और अहंकार में 1473 छात्रों के साथ अन्याय किया गया। अब बिना सेमेस्टर 1 की परीक्षा लिए ही सेमेस्टर 2 का फॉर्म भरवाना शुरू कर दिया गया है।
छात्रों की मांग है कि सत्र 2025-29 के शेष 1473 छात्रों के लिए विशेष परीक्षा आयोजित की जाए ,रिजल्ट यथाशीघ्र प्रकाशित किया जाए ,तब तक सेमेस्टर 2 का फॉर्म भरने पर रोक लगाई जाए ताकि सभी छात्र एक साथ परीक्षा दे सकें।
छात्रों ने पलामू के सांसद, विधायक, जनप्रतिनिधियों और वित्त मंत्री से हस्तक्षेप कर न्याय की गुहार लगाई है।