खनिज संशोधन विधेयक के विरोध में भाकपा माले का प्रदर्शन, राजेश सिन्हा बोले—झारखंड को कमजोर करने की साजिश सफल नहीं होने देंगे
रांची एक्सप्रेस संवाददाता
गिरिडीह: खनिज संशोधन विधेयक 2026 के विरोध में भाकपा माले एवं विभिन्न जनसंगठनों के कार्यकर्ताओं ने मंगलवार को मुफ्फसिल थाना क्षेत्र के सदर प्रखंड अंतर्गत महुआटांड़ स्थित कार्यालय में जुटकर केंद्र सरकार के खिलाफ विरोध जताया। इस दौरान केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई और विधेयक को वापस लेने की मांग उठाई गई। कार्यक्रम में भाकपा माले जिला कमिटी सदस्य राजेश सिन्हा ने कहा कि केंद्र सरकार झारखंड की खनिज संपदा और राज्य के अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा, “झारखंड को केंद्र सरकार बर्बाद करना चाहती है, लेकिन उसकी यह कोशिश सफल नहीं होगी।” उन्होंने कहा कि खनिज संपदा झारखंड की जनता के अधिकार और विकास का महत्वपूर्ण आधार है, इसलिए किसी भी ऐसी नीति का विरोध किया जाएगा जिससे राज्य के हित प्रभावित हों। वहीं कन्हाई पांडेय ने कहा कि झारखंड से भाजपा सरकार को खदेड़े जाने की जरूरत है। उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार लगातार राज्य के अधिकारों पर हस्तक्षेप कर रही है। उन्होंने कहा कि खनिज संशोधन विधेयक के खिलाफ भाकपा माले और उसके सभी जनसंगठन व्यापक आंदोलन करेंगे। वक्ताओं ने कहा कि विधेयक संसद के दोनों सदनों से पारित हो चुका है और अब राष्ट्रपति की मंजूरी की प्रक्रिया शेष है। उन्होंने राष्ट्रपति से भी झारखंड के जल, जंगल, जमीन और खनिज संपदा से जुड़े राज्य के हितों को ध्यान में रखने की अपील की। भाकपा माले नेताओं ने कहा कि खनिज संपदा के अलावा राज्य सरकार को मिलने वाले विभिन्न राजस्व स्रोतों पर भी केंद्र की नीतियों का असर पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि जनहित और राज्य के अधिकारों की रक्षा के लिए आंदोलन को गांव से लेकर सड़क तक तेज किया जाएगा। इस मौके पर मसूदन कोल, राजेश राय, किशोर राय, भीम कोल, मोहन कोल्ह, प्रदीप कुमार, फेकन राय, गुलाब कोल, रंजीत सिंह, टैटू राय, बुधन राय, नौशाद आलम, एकराम अंसारी, मनोज यादव, गांधी और अमन वारसी समेत दर्जनों कार्यकर्ता मौजूद थे


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