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रांची में सफाईकर्मियों की हड़ताल की चेतावनी, वेतन बढ़ाने और स्थायी नियुक्ति की मांग


रांची। राजधानी रांची में नगर निगम के सफाईकर्मियों और उनकी यूनियन ने वेतन तथा सेवा से जुड़े मुद्दों को लेकर आंदोलन की चेतावनी दी है। यूनियन की ओर से न्यूनतम 18 हजार रुपये मासिक वेतन, स्थायी नियुक्ति, बोनस और बकाया राशि के भुगतान सहित कई मांगें उठाई गई हैं। यूनियन का कहना है कि यदि मांगों पर समय रहते सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया, तो 15 अक्टूबर से हड़ताल शुरू की जा सकती है।

वेतन और नौकरी की सुरक्षा प्रमुख मांगें

सफाईकर्मियों की यूनियन ने कर्मचारियों के लिए कम से कम 18 हजार रुपये प्रतिमाह वेतन निर्धारित करने की मांग रखी है। इसके साथ ही लंबे समय से काम कर रहे कर्मचारियों को स्थायी नियुक्ति देने, बोनस उपलब्ध कराने और लंबित भुगतान का निपटारा करने की मांग भी शामिल है। यूनियन ने काम से हटाए गए कर्मचारियों को फिर से सेवा में बहाल करने की मांग उठाते हुए रोजगार की सुरक्षा का मुद्दा भी सामने रखा है।

मांगें पूरी नहीं हुईं तो 15 अक्टूबर से आंदोलन

यूनियन के अनुसार, मांगों पर सहमति नहीं बनने की स्थिति में 15 अक्टूबर से हड़ताल शुरू करने का विकल्प अपनाया जा सकता है। हालांकि, हड़ताल की अंतिम स्थिति और आंदोलन की अवधि को लेकर संबंधित यूनियन तथा नगर निगम प्रशासन की आधिकारिक पुष्टि महत्वपूर्ण होगी।

शहर की सफाई व्यवस्था पर पड़ सकता है असर

यदि बड़ी संख्या में सफाईकर्मी काम बंद करते हैं, तो शहर में कचरा उठाव, सड़कों की सफाई और अन्य स्वच्छता संबंधी सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं। इससे नागरिकों को असुविधा होने के साथ कुछ इलाकों में गंदगी बढ़ने की आशंका भी रहेगी। ऐसी स्थिति से बचने के लिए कर्मचारियों की मांगों और प्रशासन के पक्ष के बीच बातचीत महत्वपूर्ण मानी जा रही है।

बातचीत से समाधान की उम्मीद

इस मामले में अब नगर निगम प्रशासन की प्रतिक्रिया और यूनियन के साथ संभावित वार्ता पर नजर रहेगी। कर्मचारियों की मांगों, उपलब्ध बजट और लागू सेवा नियमों के आधार पर समाधान निकालना दोनों पक्षों के लिए अहम होगा।

तथ्य-जांच नोट: न्यूनतम वेतन की मांग, स्थायी नियुक्ति, बकाया भुगतान, हटाए गए कर्मचारियों की बहाली और 15 अक्टूबर से प्रस्तावित हड़ताल की पुष्टि संबंधित यूनियन के आधिकारिक बयान तथा रांची नगर निगम की प्रतिक्रिया से करें। हड़ताल को घोषित निर्णय के बजाय चेतावनी के रूप में ही प्रस्तुत करें, जब तक इसकी अंतिम पुष्टि न हो।