BREAKING NEWS

logo

स्टॉप वॉर” की गूंज मेदिनीनगर में — पश्चिम एशिया युद्ध पर भारत की चुप्पी पर उठे सवाल


मेदिनीनगर : इप्टा द्वारा संचालित सांस्कृतिक पाठशाला की 92वीं कड़ी में “पश्चिम एशिया युद्ध और भारत” विषय पर आयोजित संवाद में वक्ताओं ने वैश्विक युद्ध की स्थिति, उसके प्रभाव और भारत की भूमिका पर गंभीर चिंता व्यक्त की। कार्यक्रम में अमेरिका की नीतियों, इसराइल-ईरान संघर्ष और उससे उत्पन्न वैश्विक संकट पर विस्तार से चर्चा की गई।

अखिल भारतीय किसान सभा के राष्ट्रीय सचिव केडी सिंह ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में कहा कि अमेरिका, इसराइल के सहयोग से ईरान के खिलाफ युद्ध जैसी स्थिति पैदा कर दुनिया को संकट में डाल रहा है। उन्होंने कहा कि आज प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से पूरी दुनिया इस युद्ध से प्रभावित है। तेल और गैस की किल्लत के कारण महंगाई बढ़ रही है और आम जनता त्रस्त है। उन्होंने यह भी कहा कि विश्व की जनता अमेरिकी साम्राज्यवादी नीतियों का विरोध कर रही है, लेकिन अधिकांश सरकारें चुप्पी साधे हुए हैं।

केडी सिंह ने भारत की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि एक शक्तिशाली देश होने के बावजूद भारत ने अब तक युद्ध रोकने के लिए कोई ठोस कूटनीतिक पहल नहीं की है। उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि भारत को “स्टॉप वॉर” का संदेश देते हुए खुलकर सामने आना चाहिए।

संवाद के क्रम में पंकज श्रीवास्तव ने कहा कि भारत को गुटनिरपेक्ष नीति को पुनः अपनाना चाहिए। उन्होंने समझाया कि जैसे धर्मनिरपेक्षता का अर्थ किसी धर्म का विरोध नहीं, बल्कि सभी के प्रति समान दृष्टिकोण है, उसी तरह गुटनिरपेक्षता का अर्थ है—सत्य और न्याय के पक्ष में खड़ा होना, न कि किसी एक शक्ति का समर्थन करना।

राजद नेता रामनाथ चंद्रवंशी ने कहा कि भारत कहीं न कहीं पश्चिमी देशों की ओर झुकाव दिखा रहा है, जो चिंताजनक है। उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका अपनी वैश्विक प्रभुत्व की नीति को बनाए रखने के लिए युद्ध का माहौल बना रहा है, जिससे न केवल संबंधित देश, बल्कि भारत समेत कई अन्य देश भी प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि भारत को युद्ध के खिलाफ स्पष्ट आवाज उठानी चाहिए।

इस दौरान शिक्षक अच्छे लाल प्रजापति, शैलेंद्र कुमार शर्मा, ललन प्रजापति, लल्लू सिंह, गोविंद प्रसाद और कुलदीप राम ने भी अपने विचार रखे। वक्ताओं ने कहा कि यदि यह युद्ध लंबा चलता है तो भारत की अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ेगा—भारतीय मुद्रा कमजोर होगी, तेल-गैस महंगे होंगे और महंगाई बढ़ेगी।
शैलेंद्र शर्मा ने तकनीकी क्षेत्र पर पड़ने वाले प्रभाव की ओर इशारा करते हुए कहा कि युद्ध के चलते डेटा ट्रांसमिशन से जुड़ी तकनीक और निर्माण भी प्रभावित हो सकते हैं, जिससे डिजिटल सेवाओं पर भी असर पड़ेगा।

कार्यक्रम में विषय प्रवेश करते हुए प्रेम प्रकाश ने पश्चिम एशिया के संघर्षों के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य को रखते हुए वर्तमान युद्ध के स्वरूप और संभावित परिणामों पर प्रकाश डाला।

कार्यक्रम के अंत में इप्टा और ऑल इंडिया स्टूडेंट फेडरेशन के वरिष्ठ नेता धनंजय शुक्ला ने धन्यवाद ज्ञापन करते हुए कहा कि भारत को स्पष्ट संदेश देना चाहिए—“हमें युद्ध नहीं, दूध चाहिए।”

कार्यक्रम की अध्यक्षता केडी सिंह एवं पंकज श्रीवास्तव ने संयुक्त रूप से की तथा संचालन भी केडी सिंह ने किया। इस अवसर पर संजीव कुमार संजू, शशि पांडे सहित अन्य लोग उपस्थित थे।