पंचम कुमार, युवा सामाजिक चिंतक
किसी भी सभ्य और विकसित समाज की पहचान केवल ऊंची इमारतों, चौड़ी सड़कों और आर्थिक विकास के आंकड़ों से नहीं होती, बल्कि इस बात से होती है कि वहां के नागरिकों को शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी मूलभूत सुविधाएं कितनी बेहतर मिल रही हैं। शिक्षा और स्वास्थ्य किसी भी राष्ट्र के विकास के दो सबसे मजबूत आधार स्तंभ हैं। दुर्भाग्यपूर्ण स्थिति यह है कि आज भी इन दोनों क्षेत्रों में अपेक्षित सुधार दिखाई नहीं देता।
विद्यालयों में पर्याप्त शिक्षक नहीं हैं, कई जगह भवनों की स्थिति खराब है, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, डिजिटल संसाधन और खेल मैदान जैसी आवश्यक सुविधाओं का अभाव है। बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देना सरकार की जिम्मेदारी है, क्योंकि आज के विद्यार्थी ही कल के समाज और राष्ट्र का निर्माण करेंगे। यदि सरकारी विद्यालयों की व्यवस्था मजबूत नहीं होगी तो गरीब और ग्रामीण क्षेत्र के बच्चों के सपने प्रभावित होंगे।
इसी तरह स्वास्थ्य व्यवस्था भी गंभीर चिंता का विषय है। सरकारी अस्पतालों में विशेषज्ञ चिकित्सकों की कमी, आधुनिक जांच सुविधाओं का अभाव, आवश्यक उपकरणों की कमी और बेहतर इलाज की अनुपलब्धता के कारण आम जनता को मजबूरी में निजी अस्पतालों का सहारा लेना पड़ता है। स्वास्थ्य सेवा हर नागरिक का अधिकार है, इसे केवल सुविधा नहीं बल्कि जिम्मेदारी के रूप में देखा जाना चाहिए।
आज समाज के सामने एक महत्वपूर्ण सवाल है कि जब जनप्रतिनिधि, अधिकारी और प्रभावशाली लोग अपने बच्चों की शिक्षा के लिए निजी विद्यालयों को प्राथमिकता देते हैं और बीमारी की स्थिति में निजी अस्पतालों में इलाज कराते हैं, तो सरकारी विद्यालयों और अस्पतालों की व्यवस्था पर उनका विश्वास क्यों नहीं बन पा रहा है? यह आत्ममंथन का विषय है।
यदि सरकार, जनप्रतिनिधि और अधिकारी चाहें तो सरकारी विद्यालयों और अस्पतालों को देश की सबसे बेहतर संस्थाओं में बदला जा सकता है। इसके लिए केवल योजनाओं की घोषणा नहीं, बल्कि ईमानदार प्रयास, नियमित निगरानी और जवाबदेही तय करने की आवश्यकता है। विद्यालयों में योग्य शिक्षक, बेहतर संसाधन और सकारात्मक वातावरण हो तथा अस्पतालों में विशेषज्ञ डॉक्टर, आधुनिक जांच व्यवस्था और गुणवत्तापूर्ण इलाज उपलब्ध हो।
वास्तविक विकास तभी माना जाएगा, जब एक गरीब परिवार का बच्चा भी सरकारी विद्यालय में पढ़कर सफलता प्राप्त कर सके और एक सामान्य नागरिक भी सरकारी अस्पताल में सम्मानजनक एवं बेहतर इलाज प्राप्त कर सके।
सरकार और समाज दोनों को यह समझना होगा कि शिक्षा और स्वास्थ्य पर किया गया निवेश खर्च नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के उज्ज्वल भविष्य की नींव है। मजबूत शिक्षा और मजबूत स्वास्थ्य व्यवस्था ही एक मजबूत राष्ट्र का निर्माण कर सकती है।
पंचम कुमार
युवा सामाजिक चिंतक






