आजसू जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह हत्याकांड में 08 हत्यारों को उम्रकैद , 10-10 हजार रुपए जुर्माना, नहीं दिया तो 03 माह काटेंगे अतिरिक्त सश्रम कारावास.
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो
देवघर : झारखंड की राजनीति को हिला देने वाले बहुचर्चित आजसू जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह और उनके चालक सोनू शर्मा हत्याकांड में 13 साल के लंबे इंतजार के बाद आखिरकार सोमवार को इंसाफ की मुहर लग गई। देवघर व्यवहार न्यायालय के एडीजे- 03 राजेंद्र कुमार सिन्हा ने इस सनसनीखेज डबल मर्डर केस में 08 आरोपियों को सश्रम आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
कोर्ट परिसर में सोमवार को फैसले को लेकर सुबह से ही गहमागहमी थी। जैसे ही अदालत ने दोषियों को तलब किया, पूरे परिसर में सन्नाटा पसर गया। एडीजे राजेंद्र कुमार सिन्हा ने अपने फैसले में 08 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई और प्रत्येक पर 10 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। अदालत ने साफ कहा कि जुर्माना नहीं देने पर सभी को तीन महीने की अतिरिक्त सश्रम कारावास भुगतनी होगी।
अदालत से सजा पाने वालों में रोहिणी अजान टोला के मंतोष यादव, कुणाल कुमार साह उर्फ भट्ट साह, बालेश्वर यादव, पंचू राउत, रंजय यादव, संजय यादव, दिनेश यादव और नावाडीह निवासी अमित कुमार सोनी उर्फ चाणक्य शामिल हैं। सजा सुनते ही सभी के चेहरे पर मायूसी छा गई और पुलिस ने उन्हें कड़ी सुरक्षा में जेल भेज दिया।
उल्लेखनीय है कि यह खौफनाक वारदात 27 अगस्त 2013 की है। उस दिन ऑल झारखंड स्टूडेंट यूनियन (आजसू) के तत्कालीन तेजतर्रार जिलाध्यक्ष मुकेश सिंह अपने चालक सोनू शर्मा के साथ जसीडीह थाना क्षेत्र के रोहिणी अजान टोला से गुजर रहे थे। तभी पहले से घात लगाए बैठी उग्र भीड़ ने उनकी गाड़ी को रोक लिया। आरोप है कि भीड़ ने दोनों को गाड़ी से खींचकर लाठी-डंडे और धारदार हथियार से पीट-पीटकर बेरहमी से मौत के घाट उतार दिया था। इतना ही नहीं, हैवानियत की हद पार करते हुए हत्यारों ने उनकी गाड़ी को भी आग के हवाले कर दिया था। दिनदहाड़े हुई इस दोहरे हत्याकांड से पूरे देवघर में सनसनी फैल गई थी।
इस केस की जांच में पुलिस की भूमिका शुरू से ही सवालों के घेरे में रही। परिजनों का आरोप है कि वायरल वीडियो में 25-30 लोग साफ तौर पर मारपीट व हत्या करते दिख रहे थे, लेकिन पुलिस ने महज 05 लोगों के खिलाफ ही चार्जशीट दाखिल की। बाद में अदालत ने संज्ञान लेते हुए कुल 11 लोगों के खिलाफ ट्रायल शुरू किया।
ट्रायल के दौरान ही दो आरोपी जयप्रकाश मंडल और चंचल कुमार सोनी की मौत हो गई। वहीं इस कांड का एक अन्य आरोपी रोहिणी अजान टोला निवासी बग्ला राउत को अदालत ने वर्ष 2014 में ही भगोड़ा घोषित कर दिया था, जो आज 12 साल बाद भी पुलिस की पकड़ से बाहर है।
*फैसले के बाद भी परिजनों में मायूसी, अब हाईकोर्ट में लड़ेंगे लड़ाई*
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इतने बड़े फैसले के बाद भी मृतक मुकेश सिंह के परिजनों में खुशी नहीं, बल्कि मायूसी है। परिजनों का कहना है कि यह अधूरा इंसाफ है। पुलिस ने जानबूझकर कई रसूखदार लोगों को बचाया है। वायरल वीडियो में दिख रहे कई चेहरे आज भी खुलेआम घूम रहे हैं। परिजनों ने अब इस मामले में हाईकोर्ट में रिट याचिका दायर कर पूरे मामले की सीबीआई जांच की मांग करने का ऐलान किया है, ताकि इस साजिश के पीछे के असली मास्टरमाइंड का पर्दाफाश हो सके।
कोर्ट में सरकार की ओर से लोक अभियोजक विजय कुमार, सहायक लोक अभियोजक सुनील सिंह ने बहस की, तो बचाव पक्ष से अधिवक्ता कांशी यादव और बीरेंद्र कुमार सिंह, मृतक के परिजनों की ओर से वरीय अधिवक्ता अशोक राय ने अपनी-अपनी दलीलें रखी।






