इसरो के निजीकरण की कथित कोशिश देश की सुरक्षा के लिए खतरा : भाकपा
खनिज संपदा विधेयक-2026 का भी विरोध, जनविरोधी नीतियों के खिलाफ चरणबद्ध आंदोलन की चेतावनी
मेदिनीनगर। भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (भाकपा) ने इसरो के कथित निजीकरण की कोशिश और केंद्र सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध जताया है। भाकपा के जिला सचिव सह डालटनगंज विधानसभा क्षेत्र के पूर्व विधायक प्रत्याशी रूचिर कुमार तिवारी, वरिष्ठ कम्युनिस्ट नेता सूर्यपत सिंह एवं बंशीधर त्रिवेदी तथा वरिष्ठ कांग्रेसी नेता नवल किशोर पाठक ने संयुक्त प्रेस बयान जारी कर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाए।
रूचिर कुमार तिवारी ने कहा कि भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) देश की प्रमुख वैज्ञानिक संस्थाओं में शामिल है। चंद्रयान, मंगलयान और सूर्य मिशन सहित अनेक महत्वपूर्ण अंतरिक्ष अभियानों की सफलता ने भारत को वैश्विक स्तर पर अलग पहचान दिलाई है। उन्होंने कहा कि इसरो देश की वैज्ञानिक आत्मनिर्भरता और रणनीतिक क्षमता का महत्वपूर्ण आधार है।
उन्होंने आरोप लगाया कि केंद्र की भाजपा नेतृत्व वाली सरकार इसरो जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रीय संस्था के निजीकरण की दिशा में कदम बढ़ा रही है। भाकपा नेताओं ने कहा कि यदि ऐसा कोई प्रयास किया जाता है तो इससे देश की वैज्ञानिक क्षमता कमजोर होने के साथ राष्ट्रीय सुरक्षा पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने इसरो जैसी रणनीतिक एवं संवेदनशील संस्था की स्वायत्तता बनाए रखने की मांग की।
भाकपा नेताओं ने कहा कि सरकार को निजीकरण की नीति से पीछे हटकर इसरो को पर्याप्त संसाधन, अत्याधुनिक सुविधाएं और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराना चाहिए, ताकि भारत अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में और मजबूती के साथ आगे बढ़ सके।






