मानव भाई से ज्यादा जरूरी जीवन रूपी वृक्ष की रक्षा : डॉ. कौशल
- वन राखी मूवमेंट की स्वर्ण जयंती पर वृक्षों को राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का दिया संदेश
पलामू : वन राखी मूवमेंट की स्वर्ण जयंती के अवसर पर शुक्रवार को पर्यावरण संरक्षण अभियान के राष्ट्रीय अध्यक्ष, पर्यावरण धर्म गुरु सह वन राखी मूवमेंट के प्रणेता डॉ. कौशल किशोर जायसवाल ने वृक्षों को राखी बांधकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि मानव रूपी भाई की रक्षाबंधन से कहीं अधिक जरूरी जीवन रूपी वृक्षों की रक्षा करना है। वृक्ष सुरक्षित रहेंगे, तभी धरती पर जीवन सुरक्षित रहेगा।
डॉ. कौशल ने बताया कि वर्ष 1967 में छतरपुर प्रखंड के डाली गांव स्थित अपनी 7.72 एकड़ निजी भूमि पर वृक्षारोपण कर उन्होंने ‘जंगल लगाओ-जंगल बचाओ’ अभियान की शुरुआत की थी। करीब 10 वर्षों बाद जब लगाए गए पेड़ों को वन माफियाओं द्वारा काटा जाने लगा, तब वर्ष 1977 में उन्होंने पर्यावरण धर्म अपनाया और इसके तहत आठ मूल मंत्र दिए।
इसी सोच के तहत उन्होंने महिलाओं के साथ वृक्षों को भाई मानकर रक्षाबंधन करने की परंपरा शुरू की। उन्होंने कहा कि जिस तरह बहन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधकर उसकी लंबी उम्र और सुरक्षा की कामना करती है, उसी तरह वृक्षों को राखी बांधकर संपूर्ण जीव-जगत की सुरक्षा की कामना की जाती है। इसी उद्देश्य से वन राखी मूवमेंट की शुरुआत हुई।
वन राखी मूवमेंट की स्वर्ण जयंती के अवसर पर ग्राम पंचायत डाली बाजार स्थित कौशल नगर के मोहनलाल खुर्जा-पार्वती देवी पार्क में विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। पार्क में विश्व के 22 देशों से लाए गए करीब 200 प्रजातियों के पौधे लगाए गए हैं। इनमें कई औषधीय और विलुप्तप्राय प्रजातियां भी शामिल हैं।
विश्व के प्रथम पर्यावरण धर्म ज्ञान वृक्ष देव मंदिर प्रांगण में पर्यावरण धर्म की प्रार्थना के साथ पौधारोपण किया डॉ. कौशल ने उपस्थित लोगों को पर्यावरण धर्म के आठ मूल मंत्रों की शपथ दिलाकर अंग वस्त्र 351 पौधा देखकर सम्मानित किया
मौके पर पूर्व उप मुखिया अफजाल अंसारी, जुबेर अंसारी, गुलाम गौस, रजी अहमद, रामजी प्रसाद, श्याम देव पासवान, शिवनाथ राम, बाबूराम, लक्ष्मण राम धर्मदेव यादव समेत काफि संख्या में महिलाएं मौजूद थे।





