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मेरे आग्रह पर झारखंड विधानसभा के सेंट्रल हॉल में लगेंगे संविधान सभा के आठ महान सपूतों के तैलचित्र : हृदयानंद मिश्र


विधानसभा अध्यक्ष माननीय रवींद्रनाथ महतो ने दी सहमति, तैलचित्रों के साथ प्रदर्शित होगी संक्षिप्त जीवनी


मेदिनीनगर। भारतीय संविधान के निर्माण में झारखंड की ऐतिहासिक भूमिका को सम्मान और नई पीढ़ी तक पहुंचाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल हुई है। मेरे आग्रह पर झारखंड विधानसभा के माननीय अध्यक्ष श्री रवींद्रनाथ महतो ने संविधान सभा के आठ सदस्यों के तैलचित्र विधानसभा के सेंट्रल हॉल में लगाने की घोषणा की है। इन तैलचित्रों के साथ संबंधित महान विभूतियों की संक्षिप्त जीवनी एवं संविधान निर्माण में उनके योगदान को भी प्रदर्शित किया जाएगा।
यह जानकारी देते हुए झारखंड प्रदेश कांग्रेस समन्वय समिति के सदस्य एवं अधिवक्ता हृदयानंद मिश्र ने कहा कि उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष के समक्ष केवल तैलचित्र लगाने का आग्रह ही नहीं किया, बल्कि संविधान सभा के इन आठ महान सदस्यों की संक्षिप्त, शोधपरक जीवनियां स्वयं तैयार कर माननीय विधानसभा अध्यक्ष श्री रवींद्रनाथ महतो को प्रदान की हैं। अध्यक्ष ने इन जीवनियों को ध्यानपूर्वक देखा और इसकी प्रशंसा करते हुए इसे महत्वपूर्ण एवं उपयोगी पहल बताया।
श्री मिश्र ने कहा कि संविधान सभा में तत्कालीन बिहार के उस भूभाग, जो आज झारखंड है, से जुड़े प्रतिनिधियों ने संविधान निर्माण की ऐतिहासिक प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इनमें जयपाल सिंह मुंडा, देवेन्द्रनाथ सामंत, बोनीफास लकड़ा, रामनारायण सिंह, कृष्ण बल्लभ सहाय, यदुवंश सहाय, अमिय कुमार घोष और बिनोदनंद झा प्रमुख हैं।
उन्होंने कहा कि इन महान सपूतों की स्मृति को केवल इतिहास की पुस्तकों तक सीमित रखना पर्याप्त नहीं है। झारखंड विधानसभा के सेंट्रल हॉल में उनके तैलचित्र और जीवन-परिचय स्थापित होना आने वाली पीढ़ियों को यह बताने का स्थायी माध्यम बनेगा कि भारतीय संविधान के निर्माण में झारखंड की धरती की भी महत्वपूर्ण भागीदारी रही है।
यदुवंश सहाय और अमिय कुमार घोष का योगदान विशेष रूप से महत्वपूर्ण
हृदयानंद मिश्र ने कहा कि पलामू के लिए यदुवंश सहाय ‘यदु बाबू’ और अमिय कुमार घोष का संविधान सभा में योगदान विशेष गौरव का विषय है। यदुवंश सहाय का नाम संविधान सभा के अभिलेखों में Jadubans Sahay के रूप में दर्ज है। उन्होंने संविधान सभा में आदिवासी, वंचित एवं सामाजिक-आर्थिक प्रश्नों को गंभीरता से उठाया।
इसी प्रकार अमिय कुमार घोष ने भी संविधान सभा की विभिन्न बहसों में सक्रिय भागीदारी की। उनके विचार संविधान सभा की आधिकारिक कार्यवाही में दर्ज हैं। बाद में वे दाल्टनगंज क्षेत्र के विधायक भी रहे।
श्री मिश्र ने कहा कि उन्होंने इन दोनों महान विभूतियों सहित सभी आठ संविधान सभा सदस्यों की जीवनी तैयार करते समय उपलब्ध ऐतिहासिक दस्तावेजों और संविधान सभा की कार्यवाहियों को आधार बनाया है, ताकि आने वाली पीढ़ियों को उनके योगदान की प्रमाणिक जानकारी मिल सके।
“निर्णय के क्रियान्वयन के लिए अब आगे बढ़ना चाहिए”
श्री मिश्र ने कहा कि माननीय विधानसभा अध्यक्ष द्वारा उनके आग्रह पर सहमति और घोषणा किया जाना स्वागतयोग्य है। अब इस निर्णय को धरातल पर उतारने के लिए आवश्यक प्रशासनिक एवं तकनीकी प्रक्रिया शीघ्र पूरी की जानी चाहिए।
उन्होंने कहा—
“मैंने माननीय विधानसभा अध्यक्ष श्री रवींद्रनाथ महतो से आग्रह किया था कि संविधान निर्माण में झारखंड की भूमिका निभाने वाले इन आठ महान सपूतों को विधानसभा के सेंट्रल हॉल में सम्मानजनक स्थान दिया जाए। अध्यक्ष जी ने मेरे आग्रह को स्वीकार करते हुए तैलचित्र लगाने की घोषणा की और मेरे द्वारा तैयार की गई उनकी संक्षिप्त जीवनियों की भी प्रशंसा की। यह मेरे लिए व्यक्तिगत संतोष का विषय होने के साथ-साथ झारखंड की संवैधानिक विरासत के लिए भी गौरवपूर्ण क्षण है।”
उन्होंने कहा कि यदि तैलचित्रों के साथ जीवन-परिचय भी प्रदर्शित किया जाता है तो विधानसभा का सेंट्रल हॉल केवल एक औपचारिक स्थान नहीं, बल्कि झारखंड की संवैधानिक विरासत की जीवंत पाठशाला बन सकता है।
श्री मिश्र ने विधानसभा अध्यक्ष माननीय श्री रवींद्रनाथ महतो के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस पहल से संविधान सभा के इन महान सदस्यों को उचित सम्मान मिलेगा और विद्यार्थियों, शोधार्थियों तथा आम नागरिकों को अपने इतिहास और संवैधानिक विरासत को समझने का अवसर मिलेगा।
उन्होंने कहा कि निर्णय हो चुका है, अब उसके शीघ्र क्रियान्वयन की दिशा में आवश्यक प्रयास होना चाहिए, ताकि विधानसभा के सेंट्रल हॉल में इन महान संविधान निर्माताओं की स्मृति को स्थायी रूप से प्रतिष्ठित किया जा सके।