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रहे निहार रमेश’ और ‘किसलय’ का हुआ भव्य लोकार्पण, भूटान सम्मान से सम्मानित हुए दोनों रचनाकार


मेदिनीनगर। हिन्दी साहित्य भारती, पलामू जिला इकाई के तत्वावधान में अनुपम स्कूल ऑफ आर्ट्स एंड कम्युनिकेशन के प्रशाल में साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। समारोह में रमेश कुमार सिंह रचित कुण्डलिया संग्रह ‘रहे निहार रमेश’ एवं अनुज कुमार पाठक रचित यात्रा वृत्तांत ‘किसलय’ का लोकार्पण काष्ठकलाविद प्रेम भसीन, प्रो. कृष्ण कुमार मिश्र, साहित्यकार सुरेंद्र कुमार मिश्र, कवि हरिवंश प्रभात, लोकतंत्र सेनानी रविशंकर पांडेय एवं कवि राकेश कुमार ने संयुक्त रूप से किया। समारोह की अध्यक्षता प्रेम भसीन ने तथा संचालन राकेश कुमार ने किया।
इस अवसर पर भूटान की राजधानी थीम्फू में प्राप्त ‘भूटान-भारत अंतरराष्ट्रीय साहित्य शिरोमणि सम्मान’ के लिए हिन्दी साहित्य भारती की ओर से दोनों रचनाकारों को सम्मानित किया गया। दोनों लेखकों ने अपनी भूटान यात्रा के संस्मरण भी साझा किए।
समारोह की अध्यक्षता करते हुए प्रेम भसीन ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पलामू के लेखकों का सम्मानित होना और लगातार पुस्तकों का प्रकाशन होना जिले के लिए गौरव की बात है। उन्होंने रमेश कुमार सिंह को अपनी एक काष्ठकला कृति भी भेंट की। मुख्य अतिथि प्रो. कृष्ण कुमार मिश्र ने दोनों पुस्तकों की सराहना की। विशिष्ट अतिथि सुरेंद्र कुमार मिश्र ने कहा कि दोनों रचनाकारों ने हिन्दी साहित्य का मान बढ़ाया है। ‘रहे निहार रमेश’ जहां छंदबद्ध रचना है, वहीं ‘किसलय’ जीवंत यात्रा वृत्तांत है। अलग-अलग विधाओं की पुस्तकों का एक साथ लोकार्पण साहित्य जगत के लिए सुखद अवसर है।
कवि हरिवंश प्रभात ने दोनों रचनाकारों को शुभकामनाएं दीं। रविशंकर पांडेय ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि मेदिनीनगर अब ‘लेखनीनगर’ बन गया है। परशुराम तिवारी ने दोनों पुस्तकों की संक्षिप्त समीक्षा प्रस्तुत की। कवयित्री रीना प्रेम दुबे एवं अशोक कुमार मिश्र ‘अल्पज्ञ’ ने भी अपने विचार रखे। सरस्वती वंदना डॉ. राम प्रवेश पंडित ने की, जबकि धन्यवाद ज्ञापन कवयित्री अनुपमा तिवारी ने किया।
समारोह में कामाख्या नारायण सिंह, मनीष कुमार मिश्र, मानस मिश्रा, डॉ. संजय कुमार पाण्डेय, वंदना श्रीवास्तव, प्रमिला सिंह, शालिनी पाठक, कुमारी सिया, विजय कुमार ठाकुर, उदय भानु तिवारी, अरुण प्रकाश पाठक, शिक्षक रविशंकर पाण्डेय, प्रियरंजन पाठक ‘समर्पण’, नवीन कुमार सिंह, अनुराग कुमार, पार्थ प्रतिम गुप्ता, प्रेम प्रकाश दूबे, डॉ. अवधेश कुमार पाण्डेय, अमीन रहबर, एम.जे. अजहर, आचार्य धनंजय पाठक, हेमंत कुमार मिश्रा सहित बड़ी संख्या में साहित्यकार एवं साहित्यप्रेमी उपस्थित थे।