पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी बोले- आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों का रिकॉर्ड सार्वजनिक हो, केंद्र और आयोग दें जवाब
मेदिनीनगर। पूर्व मंत्री केएन त्रिपाठी ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली और मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) की पारदर्शिता को लेकर केंद्र सरकार और चुनाव आयोग से जवाब मांगा है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की ओर से उठाए गए ‘वोट चोरी’ के आरोपों के बीच सामने आई मीडिया रिपोर्टों ने चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता को लेकर फिर सवाल खड़े किए हैं।
त्रिपाठी ने कहा कि यदि चुनाव आयोग के भीतर किसी निर्णय को लेकर 14 बार आपत्तियां दर्ज की गई थीं, तो उन आपत्तियों और निर्णय प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है। केंद्र सरकार और चुनाव आयोग को इस पर स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए। उन्होंने कहा कि मतदाताओं को उनके वोट और मतदाता सूची से जुड़ी प्रक्रिया की पूरी जानकारी मिलनी चाहिए।
उन्होंने एसआईआर की प्रक्रिया से जुड़े रिकॉर्ड को सार्वजनिक करने की मांग करते हुए कहा कि आयोग के भीतर दर्ज आपत्तियों पर क्या कार्रवाई हुई, यह भी स्पष्ट किया जाना चाहिए। त्रिपाठी ने सवाल उठाया कि यदि किसी योजना को तीनों चुनाव आयुक्तों की सहमति से लागू किया जाना है, तो कथित तौर पर दो चुनाव आयुक्तों की आपत्तियों को दरकिनार कर निर्णय क्यों लिया गया और उसे लागू किस आधार पर किया गया।
पूर्व मंत्री ने इस मामले में मुख्य चुनाव आयुक्त की भूमिका पर भी सवाल उठाया और केंद्र सरकार से कार्रवाई की मांग की। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग को एसआईआर से जुड़े निर्णय, आपत्तियां और पूरी प्रक्रिया का रिकॉर्ड सार्वजनिक करना चाहिए, ताकि मतदाताओं के बीच पारदर्शिता को लेकर कोई संशय न रहे।






