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मधुपुर में चंद्रशेखर आजाद, बाल गंगाधर तिलक की जयंती और कैप्टन लक्ष्मी सहगल का स्मृति दिवस मनाया


■ "आजाद के सपनों का भारत बनाने नौजवानों को आगे आना होगा" - धनंजय प्रसाद

रांची एक्सप्रेस संवाददाता 

मधुपुर बाजार : शहर के भेड़वा नावाडीह स्थित राहुल अध्ययन केंद्र में अमर शहीद क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद और स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की जयंती तथा स्वतंत्रता सेनानी कैप्टन लक्ष्मी सहगल का स्मृति दिवस श्रद्धा के साथ मनाया गया।

कार्यक्रम में उपस्थित लोगों ने तीनों विभूतियों की तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किए।
इस अवसर पर जनवादी चिंतक और कलमकार धनंजय प्रसाद ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद देश की आजादी के लिए सर्वस्व न्यौछावर करने वाले शहीद क्रांतिकारियों में से एक थे। उनके बूते पर ही आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं।

उन्होंने कहा कि आजादी के इतने वर्षों बाद भी हमें साम्राज्यवादी शक्तियों से पूरी मुक्ति नहीं मिली है। आज भी वही शक्तियां सक्रिय हैं, जिनके विरोध में आजाद जैसे क्रांतिकारियों ने आहुति दी थी।

श्री प्रसाद ने बताया कि अंग्रेजी हुकूमत की दमनकारी नीति के खिलाफ चंद्रशेखर आजाद ने नौजवानों को संगठित कर हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन का गठन कर सशस्त्र आंदोलन किया। उन्होंने प्रण लिया था कि वह आजाद हैं, आजाद रहेंगे और आजाद ही मरेंगे। अंग्रेजी सिपाही उन्हें न पकड़ सके और न ही अंग्रेजी गोली उन्हें छू सकी।

उन्होंने कहा कि चंद्रशेखर आजाद के सपनों का भारत बनाने के लिए आज नौजवानों को आगे आकर उनके सपनों को साकार करना चाहिए।
धनंजय प्रसाद ने कहा कि 'स्वराज हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है और इसे हम लेकर रहेंगे' का नारा बुलंद करने वाले लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक थे। अंग्रेजों के लाठीचार्ज में उनकी जान चली गई।

उन्होंने कैप्टन लक्ष्मी सहगल* को स्वतंत्रता संग्राम की सच्ची वीरांगना बताते हुए कहा कि वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की सहयोगी थीं और देश की आजादी में उनकी अहम भूमिका रही।
कार्यक्रम में अन्य वक्ताओं ने भी तीनों विभूतियों के जीवन और आदर्शों पर प्रकाश डाला।