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21 साल की उम्र में बुझ गया घर का चिराग, मासूम बेटे के सिर से उठा पिता का साया।


मंत्री डॉ. इरफान अंसारी बोले—“बुधन को वापस नहीं ला सकता, लेकिन उसके बच्चे को अकेला नहीं पड़ने दूंगा”।
उदय किशोर सिंह,
जामताड़ा। सड़क हादसे में गंभीर रूप से घायल जामताड़ा के 21 वर्षीय बुधन महतो को बचाने के लिए रांची में इलाज के दौरान हरसंभव प्रयास किया गया, लेकिन आखिरकार इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। बुधन के निधन से परिवार में मातम पसर गया है। पीछे उसकी मां, पत्नी और महज एक वर्ष का मासूम बच्चा रह गया है।
बुधन के निधन पर झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री सह जामताड़ा विधायक डॉ. इरफान अंसारी ने गहरी संवेदना व्यक्त की। उन्होंने कहा कि बुधन को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किया गया, लेकिन नियति के आगे सब बेबस हो गए।
मंत्री डॉ. इरफान अंसारी ने भावुक होते हुए कहा, “पीछे उसकी मां, पत्नी और सिर्फ एक साल का मासूम बच्चा रह गया। जब परिवार मेरे पास आया और मैंने उस छोटे से बच्चे को देखा, तो मेरी आंखों से आंसू निकल आए। इतनी छोटी उम्र में पिता का साया उठ जाना… यह दर्द शब्दों में कहना मुश्किल है।”
उन्होंने कहा कि उन्होंने पीड़ित परिवार को भरोसा दिलाया है कि वे इस मुश्किल घड़ी में अकेले नहीं हैं। “मैंने परिवार से सिर्फ इतना कहा—आप चिंता मत कीजिए, आपका इरफान अंसारी आपके साथ खड़ा है।”
डॉ. अंसारी ने कहा कि उन्होंने इस परिवार को अपना परिवार माना है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मासूम बच्चे की पढ़ाई-लिखाई से लेकर उसके भविष्य तक की जिम्मेदारी निभाने के लिए वे हरसंभव सहयोग करेंगे और परिवार के सुख-दुख में साथ खड़े रहेंगे।
उन्होंने कहा, “बुधन को वापस तो नहीं ला सकता, लेकिन उसके बच्चे को अकेला नहीं पड़ने दूंगा। उसके भविष्य की चिंता मुझे रहेगी।”
मंत्री ने कहा कि पद और राजनीति से ऊपर इंसानियत है। “मैं मंत्री बाद में हूं, पहले इंसान हूं। किसी के घर का चिराग बुझ जाए, तो उसके परिवार का हाथ थामना ही सच्ची इंसानियत है।”
बुधन की असमय मौत ने परिवार के साथ-साथ इलाके के लोगों को भी झकझोर दिया है। महज 21 वर्ष की उम्र में परिवार के एक युवा सदस्य की मौत और एक साल के मासूम के सिर से पिता का साया उठ जाना इस हादसे को और भी मार्मिक बना गया है।