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पलामू से रांची तक गूंज रही छात्रों की आवाज, अब हेमंत सरकार को जवाब देना होगा : सूर्या सोनल सिंह


पलामू से रांची तक गूंज रही छात्रों की आवाज, अब हेमंत सरकार को जवाब देना होगा : सूर्या सोनल सिंह

रांची, 17 अगस्त 2026।

झारखंड के युवाओं के भविष्य और भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग को लेकर चल रहे झारखंड छात्र न्याय सत्याग्रह के समर्थन में पलामू से रांची पहुंचे सूर्या सोनल सिंह ने जयपाल सिंह मुंडा स्टेडियम में आंदोलनरत छात्रों के बीच बैठकर उनके सत्याग्रह को अपना नैतिक समर्थन दिया।

सूर्या सोनल सिंह ने कहा कि 12 अगस्त को पलामू में आयोजित झारखंड छात्र न्याय सत्याग्रह के दौरान भी उन्होंने छात्रों की आवाज को मजबूती से उठाया था। पलामू की धरती से उठी यह आवाज अब रांची तक पहुंच चुकी है और मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन की सरकार को इस आवाज को गंभीरता से सुनना होगा।

उन्होंने कहा, “हेमंत सोरेन जी को यह समझना होगा कि झारखंड का युवा अब सिर्फ आश्वासन नहीं चाहता। उसने अपनी जिंदगी के कई साल प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी में लगाए हैं। उसके भविष्य से जुड़े सवालों पर सरकार की चुप्पी और टालमटोल स्वीकार नहीं की जा सकती।”

उन्होंने कहा कि यह सिर्फ कुछ छात्रों का आंदोलन नहीं, बल्कि झारखंड के लाखों युवाओं के भविष्य और उनके अधिकार की लड़ाई है। सरकार को युवाओं की पीड़ा समझनी होगी और उनके सवालों का स्पष्ट जवाब देना होगा।

उन्होंने छात्रों की प्रमुख मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि JPSC-JSSC भर्ती परीक्षाओं में कथित अनियमितताओं की CBI जांच कराई जाए तथा JSSC-CGL परीक्षा से जुड़ी नियुक्तियों को रद्द करने की छात्रों की मांग पर सरकार तत्काल निर्णय ले।

सूर्या सोनल सिंह ने कहा, “12 अगस्त को पलामू से हमने छात्रों के न्याय की आवाज बुलंद की थी और आज रांची में उन्हीं छात्रों के बीच बैठकर उस संघर्ष को अपना नैतिक समर्थन दे रहा हूं। यह लड़ाई किसी एक व्यक्ति या संगठन की नहीं, झारखंड के हर उस युवा की है जो अपनी मेहनत के दम पर अपना भविष्य बनाना चाहता है।”

उन्होंने हेमंत सोरेन सरकार पर निशाना साधते हुए कहा, “मुख्यमंत्री जी, युवाओं को तारीख नहीं, न्याय चाहिए। अब बयान और आश्वासन नहीं, निर्णायक कार्रवाई का समय है। सरकार छात्रों की दोनों प्रमुख मांगों पर तत्काल फैसला ले, वरना यह आवाज और बुलंद होगी।”

उन्होंने कहा कि शांतिपूर्ण तरीके से अपने अधिकार और भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे छात्रों की आवाज को दबाने के बजाय सरकार को उनकी बात सुनकर तत्काल समाधान निकालना चाहिए।

झारखंड के युवाओं का भविष्य किसी प्रयोग की प्रयोगशाला नहीं है। उनकी मेहनत का सम्मान करना ही होगा। न्याय मिलने तक छात्रों की आवाज मजबूती से उठती रहेगी।

— सूर्या सोनल सिंह