देवघर "एम्स" ने रचा इतिहास, पहली बार Orbital Atherectomy व IVUS तकनीक से जटिल हृदय रोग का सफल इलाज
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो
देवघर : देवघर "एम्स" ने एक बार फिर झारखंड के स्वास्थ्य क्षेत्र में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। संस्थान के हृदय रोग विभाग ने पहली बार Orbital Atherectomy और IVUS-गाइडेड कोरोनरी प्रक्रिया को सफलतापूर्वक संपन्न किया। इसी के साथ अक्टूबर 2025 में कैथ लैब शुरू होने के बाद विभाग ने 200 हृदय संबंधी प्रक्रियाएं पूरी करने का मील का पत्थर भी पार कर लिया है।
यह उन्नत प्रक्रिया एक 67 वर्षीय पुरुष मरीज पर की गई। मरीज को पहले गंभीर हार्ट अटैक आया था, जिसके बाद आपातकालीन एंजियोप्लास्टी की गई थी। फॉलोअप में जांच के दौरान उनकी हृदय की एक अन्य धमनी में अत्यधिक कैल्शियम जमने के कारण गंभीर ब्लॉकेज पाया गया। यह ब्लॉकेज इतना सख्त था कि सामान्य बैलून भी उस जगह तक नहीं पहुंच पा रहा था।
ऐसे जटिल मामलों के लिए डॉक्टरों ने IVUS - इंट्रावस्कुलर अल्ट्रासाउंड का सहारा लिया। यह आधुनिक इमेजिंग तकनीक रक्त वाहिका के अंदर की स्थिति को अंदर से साफ-साफ दिखाती है और डॉक्टरों को सटीक इलाज में मदद करती है।
ब्लॉकेज को हटाने के लिए Orbital Atherectomy तकनीक का उपयोग किया गया। इस तकनीक में विशेष डिवाइस की मदद से धमनी में जमी कठोर कैल्शियम को बारीक कणों में तोड़ दिया जाता है, जिससे बाद में स्टेंट लगाना आसान हो जाता है।
दोनों तकनीकों के उपयोग से मरीज की जटिल समस्या का सफल समाधान निकाला गया। फिलहाल मरीज की स्थिति स्थिर है और वह स्वस्थ है।
यह पूरी प्रक्रिया हृदय रोग विभाग के डॉ. सी.बी. पांडे और डॉ. स्मारक के नेतृत्व वाली टीम द्वारा की गई।
विभाग के अनुसार अब देवघर एम्स झारखंड के उन गिने-चुने केंद्रों में शामिल हो गया है जहां कॉम्प्लेक्स PCI, कैल्शियम मॉडिफिकेशन, IVUS इमेजिंग, कंडक्शन सिस्टम पेसिंग और स्ट्रक्चरल हार्ट इंटरवेंशन जैसी आधुनिक हृदय प्रक्रियाएं उपलब्ध हैं।
अस्पताल प्रशासन ने इस उपलब्धि के लिए देवघर एम्स के कार्यकारी निदेशक नितिन गंगाने के सहयोग और मार्गदर्शन की सराहना की। प्रशासन का कहना है कि इस उपलब्धि से अब झारखंड और पड़ोसी राज्यों के मरीजों को अत्याधुनिक हृदय उपचार के लिए दूसरे राज्यों की ओर नहीं भटकना पड़ेगा।






