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देवघर AIIMS नें विश्रामगृह बनाने और मैनेजमेंट के लिए सेवादान आरोग्य फाउंडेशन के साथ MoU साइन किया.


देवघर  AIIMS नें विश्रामगृह बनाने और मैनेजमेंट के लिए 'सेवादान आरोग्य फाउंडेशन' के साथ MoU साइन किया.

■ 100 बेड का डॉरमेट्री, 20 कमरे और डाइनिंग हॉल, मरीजों के अटेंडेंट को मिलेगी सस्ती सुविधा.  


अमित कुमार 
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो, 


देवघर : मरीजों और उनके परिजनों को बड़ी राहत मिलने वाली है। देवघर AIIMS ने पेशेंट-सेंट्रिक हेल्थकेयर को मजबूत करने के लिए 'सेवादान आरोग्य फाउंडेशन' के साथ MoU साइन किया है। यह समझौता AIIMS कैंपस में एक आधुनिक विश्राम गृह के निर्माण और संचालन के लिए किया गया है।

MoU पर प्रो. डॉ. नितिन गंगाने, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर एवं CEO, लेफ्टिनेंट कर्नल अभिक दास, डिप्टी डायरेक्टर प्रशासन और  देवानंद झा, सुपरिंटेंडिंग इंजीनियर की मौजूदगी में हस्ताक्षर हुए। 

प्रस्तावित विश्राम गृह में 100 लोगों की डॉरमेट्री, 20 कमरे और 100 लोगों की क्षमता वाला डाइनिंग हॉल होगा। इसके लिए AIIMS कैंपस में 1935 वर्ग मीटर जमीन चिन्हित की गई है। 

AIIMS प्रबंधन के अनुसार, झारखंड और आसपास के राज्यों के दूरदराज जिलों से इलाज कराने आने वाले मरीजों की संख्या लगातार बढ़ रही है। अस्पताल के आसपास सस्ते और सुरक्षित ठहराव की कमी के कारण कई परिजनों को काफी परेशानी होती है। इस विश्राम गृह से उनकी यह समस्या दूर होगी।

उल्लेखनीय है कि, विश्राम गृह का पूरा खर्च 'सेवादान आरोग्य फाउंडेशन' अपनी 'कॉर्पोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी' (CSR), पहल के तहत उठाएगा। फाउंडेशन ने स्वास्थ्य सेवा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में इसे अपना संकल्प बताया है। 

संस्थान के अधिकारियों ने बताया कि सर्वे और मिट्टी जांच पूरी हो चुकी है और ड्राइंग तैयार की जा रही है। निर्माण कार्य जल्द शुरू होने की संभावना है। 

देवघर AIIMS प्रबंधन के अनुसार विश्राम गृह को बहुत कम और किफायती दर पर चलाया जाएगा, ताकि इलाज के लिए लंबे समय तक रुकने वाले अटेंडेंट्स पर आर्थिक बोझ न पड़े। इससे कैंपस में सुरक्षित, साफ-सुथरी और सुविधाजनक ठहरने की जगह मिलेगी। 

AIIMS के अधिकारियों ने CSR के तहत सहयोग के लिए 'सेवादान आरोग्य फाउंडेशन' की सराहना की। उन्होंने कहा कि यह पहल AIIMS के करुणामय और मरीज-केंद्रित स्वास्थ्य माहौल बनाने की दिशा में एक अहम मील का पत्थर है। 

अनुमान है कि बनने के बाद हर साल हजारों मरीजों और उनके परिजनों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।