देवघर में है स्वामी "रामकृष्ण परमहंस" का ननिहाल,आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी है बाबा नगरी.
देवघर में है "स्वामी रामकृष्ण परमहंस" का ननिहाल, आध्यात्मिक विरासत से जुड़ी है बाबा नगरी.
■ *मां काली के अनन्य भक्त थे 'रामकृष्ण'*
अमित कुमार
रांची एक्सप्रेस ब्यूरो,
देवघर : द्वादश ज्योतिर्लिंग बाबा बैद्यनाथ की नगरी देवघर का संबंध सिर्फ 'स्वामी विवेकानंद' से ही नहीं, बल्कि उनके गुरु "स्वामी रामकृष्ण परमहंस" से भी जुड़ा हुआ है।
मान्यता है कि मां काली के अनन्य भक्त "रामकृष्ण परमहंस" का ननिहाल देवघर के कुंडा मोहल्ले में स्थित था।
■ *कुंडा मुहल्ले से जुड़ी हैं "रामकृष्ण परमहंस" की बचपन की यादें*
स्थानीय इतिहासकारों और रामकृष्ण मिशन के दस्तावेजों के अनुसार, "स्वामी रामकृष्ण परमहंस" की मां चंद्रादेवी का मायका देवघर के कुंडा मुहल्ले में था। बचपन में रामकृष्ण, जिन्हें तब 'गदाधर' के नाम से जाना जाता था, कई बार अपनी मां के साथ कुंडा आए थे। यहां उन्होंने कुछ समय भी बिताया था।
■ *मंदिर और तालाब से है पुराना नाता*
कुंडा स्थित जिस घर को उनका ननिहाल बताया जाता है, उसके पास एक पुराना तालाब और शिव मंदिर भी है। मान्यता है कि बालक 'गदाधर' इसी मंदिर में पूजा किया करते थे। आज भी बड़ी संख्या में 'रामकृष्ण-विवेकानंद' के अनुयायी कुंडा पहुंचकर इस स्थान का दर्शन करते हैं।
■ *रामकृष्ण मिशन कर रहा संरक्षण का प्रयास*
रामकृष्ण मिशन विद्यापीठ, देवघर के सूत्रों ने बताया कि स्वामी रामकृष्ण परमहंस के देवघर से जुड़ाव पर शोध चल रहा है। कुंडा स्थित इस पवित्र स्थल को आध्यात्मिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की योजना है, ताकि आने वाली पीढ़ी को इस विरासत से जोड़ा जा सके।
■ *देवघर बना तीन पीढ़ियों की तपोस्थली*
देवघर की भूमि आध्यात्मिक रूप से इसलिए भी खास है क्योंकि यहां "रामकृष्ण परमहंस" का ननिहाल, 'स्वामी विवेकानंद' की साधना स्थली और उनके शिष्य सिस्टर निवेदिता व अन्य गुरुभाइयों का प्रवास रहा है।
स्थानीय लोगों का मानना है कि बाबा बैद्यनाथ की कृपा से ही देवघर को यह गौरव मिला है।
उल्लेखनीय है कि 'रामकृष्ण-विवेकानंद' परंपरा की तीन पीढ़ियों का जुड़ाव देवघर से है।





