धनबाद। झारखंड के धनबाद में गजलीटांड़ खदान हादसे की 32वीं बरसी पर एक बार फिर उस दर्दनाक घटना की यादें ताजा हो गईं, जिसने पूरे कोयलांचल को झकझोर दिया था। शनिवार को गजलीटांड़ स्थित शहीद स्मारक पर आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में दिवंगत श्रमिकों को याद किया गया। बीसीसीएल के अधिकारियों, श्रमिक संगठनों, जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और मृत श्रमिकों के परिजनों ने स्मारक पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। गजलीटांड़ की यह त्रासदी 26-27 सितंबर 1995 की रात हुई थी। उस समय धनबाद में लगातार और बेहद तेज बारिश हो रही थी। भारी बारिश के कारण कतरी नदी का जलस्तर अचानक बढ़ गया और नदी के तटबंध टूटने के बाद बड़ी मात्रा में पानी भूमिगत गजलीटांड़ खदान में घुस गया। सरकारी रिकॉर्ड के मुताबिक, अचानक पानी भर जाने से भूमिगत खदान में काम कर रहे 64 श्रमिक अंदर फंस गए और उनकी मौत हो गई। उस समय क्षेत्र में हुई बारिश को असाधारण रूप से भारी बताया गया था। हादसे की भयावहता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि पानी के तेज बहाव के कारण खदान के भूमिगत हिस्से में बचाव का पर्याप्त अवसर नहीं मिल सका। राहत एवं बचाव दल ने खदान से पानी निकालने के लिए प्रयास शुरू किए थे, लेकिन अंदर फंसे सभी 64 श्रमिकों को बचाया नहीं जा सका। सरकारी दस्तावेजों के अनुसार, उस समय बीसीसीएल की अन्य खदानें भी बाढ़ से प्रभावित हुई थीं और चार खदानों में कुल 77 लोगों की मौत हुई थी, जिनमें गजलीटांड़ के 64 श्रमिक शामिल थे। गजलीटांड़ में इस हादसे की याद में शहीद स्मारक बनाया गया है। हर साल बरसी के मौके पर यहां श्रद्धांजलि कार्यक्रम आयोजित किया जाता है। इस वर्ष भी बड़ी संख्या में लोग स्मारक स्थल पर पहुंचे और मृत श्रमिकों की स्मृति में श्रद्धा-सुमन अर्पित किए। कार्यक्रम के दौरान सर्वधर्म प्रार्थना सभा का आयोजन किया गया। श्रमिकों की स्मृति में पौधरोपण भी किया गया। इस अवसर पर उनके परिजन और स्थानीय लोग भावुक नजर आए। गजलीटांड़ हादसा केवल एक पुरानी खनन दुर्घटना नहीं है, बल्कि यह खदानों में जलभराव, आपदा प्रबंधन और श्रमिक सुरक्षा के महत्व की गंभीर याद दिलाता है। उस समय हुई घटना के बाद खदान सुरक्षा व्यवस्था और आपदा से निपटने की तैयारियों को लेकर कई सवाल उठे थे। राज्यसभा में तत्कालीन केंद्रीय मंत्री द्वारा दिए गए बयान में भी भारी बारिश, कतरी नदी के उफान और तटबंध टूटने के बाद खदान में पानी घुसने की जानकारी दर्ज है। गजलीटांड़ के शहीदों की याद में स्थानीय स्तर पर हर वर्ष विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। श्रद्धांजलि सभा के अलावा फुटबॉल प्रतियोगिता जैसे आयोजन भी दिवंगत श्रमिकों की स्मृति से जुड़े रहे हैं। इसका उद्देश्य नई पीढ़ी को उस हादसे और उसमें जान गंवाने वाले श्रमिकों के बारे में याद दिलाना है। हर बरसी पर मृत श्रमिकों के परिवारों के लिए यह दिन पुरानी यादों को फिर सामने ले आता है। जिन परिवारों ने वर्षों पहले अपने परिजनों को खोया, उनके लिए गजलीटांड़ का शहीद स्मारक आज भी उस त्रासदी का प्रतीक बना हुआ है। श्रद्धांजलि कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने दिवंगत श्रमिकों के योगदान को याद करते हुए कहा कि उनकी स्मृति को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना जरूरी है। गजलीटांड़ हादसे की बरसी पर श्रद्धांजलि के साथ-साथ खदानों में सुरक्षा व्यवस्था की अहमियत भी सामने आती है। भूमिगत खनन में पानी का अचानक प्रवेश बेहद गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। ऐसे में मौसम की निगरानी, जलनिकासी, तटबंधों की सुरक्षा, आपातकालीन निकासी और प्रभावी बचाव व्यवस्था श्रमिकों की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण होती है। निष्कर्ष:1995 की उस रात क्या हुआ था?
कुछ ही समय में पानी ने लिया विकराल रूप
हर वर्ष स्मारक पर जुटते हैं लोग
हादसे की याद आज भी क्यों महत्वपूर्ण है?
श्रमिकों की स्मृति में लगातार कार्यक्रम
परिवारों के लिए यह दिन भावुक करने वाला
सुरक्षा का संदेश भी देती है यह त्रासदी
धनबाद के गजलीटांड़ खदान हादसे की 32वीं बरसी पर 64 दिवंगत श्रमिकों को श्रद्धा के साथ याद किया गया। तीन दशक से अधिक समय बीत जाने के बाद भी 1995 की वह त्रासदी कोयलांचल की सामूहिक स्मृति में दर्ज है। शहीद स्मारक पर आयोजित कार्यक्रम ने एक बार फिर उन श्रमिकों के बलिदान को याद करने के साथ खदान सुरक्षा के महत्व का संदेश दिया।
धनबाद में गजलीटांड़ खदान त्रासदी की 32वीं बरसी, 64 दिवंगत श्रमिकों को दी गई श्रद्धांजलि






