रांची एक्सप्रेस संवाददाता
मधुपुर बाजार (देवघर) : शहर कै भेड़वा नावाडीह स्थित राहुल अध्ययन केन्द्र में अमर शहीद राजगुरु की जयंती मनाई गई. मौके पर उपस्थित लोगों ने उनकी तस्वीर पर माल्यार्पण कर श्रद्धासुमन अर्पित किये. मौके पर जलेस के प्रांतीय सह सचिव धनंजय प्रसाद ने कहा कि जिन क्रांतिकारियों के बूते आज हम आजाद हवा में सांस ले रहे हैं. जिनके लिए देश ही सब कुछ था, उन्होंने देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्यौछावर कर दिया राजगुरु वैसे क्रांतिकारियों में से एक थे. उन्हें भगतसिंह व सुखदेव के साथ 23 मार्च 1931 को क्रूर अंग्रेजी हुकूमत के द्वारा फांसी दे दी गई और वे तीन वीर बांकुरों ने हंसते - हंसते देश के लिए अपने प्राणों की आहुति दे दी. वैसे तो उनका जन्म आज के ही दिन 24 अगस्त 1908 को पूणे में हुआ था. वो अच्छे निशानेबाज थे. जलियांवाला बाग नरसंहार की घटना व लाला लाजपतराय की हत्या से उनके मन गहरा सदमा पड़ा और उन्होंने बदला लेना ठान लिया. वो भगतसिंह जैसे क्रांतिकारियों के संपर्क में आये और अंग्रेजी अधिकारी थे पी सांडर्स को गोली मारकर बदला लिया. क्रांतिकारियों का मुख्य मकसद देश से अंग्रेजी हुकूमत को उखाड़ फेंकना और समाजवादी व्यवस्था के तहत देश बनाया, ताकि आवाम का जीवन खुशहाल हो सके.उनके अधूरे सपने को पूरा करना आज की युवा पीढ़ी का दायित्व बनता है कि शहीदों के सपनों का देश बनाने के लिए पहल करें. आज आवाम भूख, भय , भ्रष्टाचार , बेरोजगारी , मंहगाई, गैर-बराबरी व अराजकता से परेशान हैं. आज अभिव्यक्ति, लोकतंत्र व संविधान पर खतरा मंडरा रहा है. भला ऐसे विभूति को कैसे बिसराया जा सकता है. उन्हें याद करना लाजिमी है. अन्य लोगों ने भी अपने विचार व्यक्त किये.







