मुख्य शहर का ‘आदर्श विद्यालय’ बदहाली का शिकार: गंदगी, जर्जर भवन और अव्यवस्था के बीच कैसे गढ़े जाएंगे भविष्य?
मुख्य सड़क किनारे स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय छतरपुर की बदहाल तस्वीर बनी चर्चा का विषय, वित्त मंत्री के विधानसभा क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल।
पंचम कुमार
छतरपुर : किसी भी समाज का भविष्य उसके विद्यालयों से तय होता है, लेकिन जब शिक्षा का मंदिर ही उपेक्षा का शिकार हो जाए तो व्यवस्था पर सवाल उठना स्वाभाविक है। छतरपुर मुख्य सड़क के किनारे स्थित उत्क्रमित मध्य विद्यालय, छतरपुर, जिसे आदर्श विद्यालय के रूप में जाना जाता है, आज बदहाली और अव्यवस्था की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है जो पूरे शिक्षा तंत्र पर प्रश्नचिह्न लगा रही है।
विद्यालय के मुख्य प्रवेश द्वार पर गंदगी और खुले में पेशाब किए जाने की समस्या आम हो चुकी है। परिसर के आसपास कचरे का अंबार लगा रहता है, जिससे पूरे वातावरण में दुर्गंध फैली रहती है। विद्यालय का पुराना भवन खंडहर में तब्दील हो चुका है, जबकि परिसर की बाउंड्री वॉल भी कई स्थानों पर नहीं है या क्षतिग्रस्त है। ऐसे माहौल में बच्चे शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर हैं।
सबसे हैरानी की बात यह है कि इसी परिसर में प्रखंड शिक्षा प्रसार पदाधिकारी (बीईईओ) का कार्यालय भी संचालित होता है। इतना ही नहीं, छतरपुर के अधिकांश प्रशासनिक पदाधिकारी जिला मुख्यालय या अन्य कार्यों के लिए प्रतिदिन इसी सड़क से गुजरते हैं। विद्यालय की यह बदहाल स्थिति उनकी नजरों से भी अछूती नहीं रहती, फिर भी वर्षों से हालात जस के तस बने हुए हैं।
यह विद्यालय जिस विधानसभा क्षेत्र में स्थित है, उसके विधायक वर्तमान में झारखंड सरकार के वित्त मंत्री हैं। बावजूद इसके मुख्य शहर के इस महत्वपूर्ण विद्यालय की नारकीय स्थिति में कोई बड़ा सुधार दिखाई नहीं देता।
स्थानीय लोगों का कहना है कि अधिकारी बदलते रहे, जनप्रतिनिधि बदलते रहे, लेकिन शिक्षा की बदहाली की तस्वीर नहीं बदली।
सूत्रों के अनुसार विद्यालय परिसर का उपयोग छोटे चारपहिया वाहनों, जैसे बोलेरो, पिकअप आदि के खड़े करने के लिए भी किया जाता है। यदि यह सही है, तो यह सवाल भी उठता है कि क्या विद्यालय परिसर का उपयोग केवल शैक्षणिक गतिविधियों तक सीमित नहीं रहना चाहिए?
स्थानीय अभिभावकों और बुद्धिजीवियों का मानना है कि यदि मुख्य शहर के आदर्श विद्यालय की यह स्थिति है, तो दूर-दराज के विद्यालयों की हालत का सहज अनुमान लगाया जा सकता है। उनका कहना है कि विद्यालय परिसर की नियमित सफाई, जर्जर भवन का निष्पादन, मजबूत बाउंड्री वॉल का निर्माण, अवैध गतिविधियों पर रोक तथा परिसर का समुचित सौंदर्यीकरण कराया जाना चाहिए।
अब देखना यह होगा कि शिक्षा विभाग, जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधि इस बदहाली को केवल देखते रहेंगे या फिर शिक्षा के इस मंदिर को उसकी गरिमा लौटाने के लिए ठोस पहल करेंगे। क्योंकि विद्यालय केवल भवन नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के सपनों की नींव होते हैं।





